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Civil services — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 257 Mock Tests Khelein
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (Supreme Court - अनुच्छेद 124 से 147) तथा सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों और क्षेत्राधिकार के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का 'आरंभिक क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद में अनन्य रूप से लागू होता है, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसी संधि, समझौते या प्रसंविदा से उत्पन्न हुआ हो जो संविधान के लागू होने से पहले की गई थी और अभी भी प्रवृत्त है। 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसे प्रत्येक संदर्भ पर अपनी राय राष्ट्रपति को प्रेषित करे। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, और संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए यह शक्ति प्राप्त है कि वह अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री पारित कर सकता है या आदेश दे सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) तथा 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग पर तब की जा सकती है जब युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के कारण भारत या उसके राज्यक्षेत्र की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था। 2. मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित संस्तुति प्राप्त होने के पश्चात ही राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं, और इस प्रकार उद्घोषित राष्ट्रीय आपातकाल को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक मास के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है। 3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के प्रभावस्वरूप संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके साथ ही अनुच्छेद 20 तथा अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को भी राष्ट्रपति द्वारा एक आदेश के माध्यम से आपातकाल के दौरान निलंबित किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1920-22 के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) तथा उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और घटनाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागपुर के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध चित्तरंजन दास (सी.आर. दास), मदन मोहन मालवीय और एनी बेनीसेंट जैसे नेताओं द्वारा किया गया था, हालाँकि दिसंबर 1920 के नागपुर के नियमित वार्षिक अधिवेशन में चित्तरंजन दास ने ही असहयोग के मुख्य प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था। 2. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से जलाया गया था, जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'निष्ठावान बर्बरता' (Loyal Savagery) और राष्ट्रीय बर्बादी की संज्ञा दी थी, क्योंकि उनका मानना था कि कपड़ों को नष्ट करने के बजाय उनका सदुपयोग गरीबों की मदद के लिए किया जाना चाहिए था। 3. इस आंदोलन के दौरान केरल (मालाबार क्षेत्र) में हुए 'मोपला विद्रोह' (Moplah Rebellion, 1921) को असहयोग और खिलाफत आंदोलन का पूर्ण समर्थन प्राप्त था, और यह आंदोलन शुरू से अंत तक पूरी तरह से अहिंसक बना रहा, जिसे ब्रिटिश सरकार द्वारा केवल शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाप्त किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पचायतें - अनुच्छेद 243 से 243O) तथा '73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान में 'ग्यारहवीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 29 कार्यात्मक विषयों (Functional Items) का उल्लेख किया गया है। 2. संविधान के अनुच्छेद 243-B के अनुसार सभी राज्यों में त्रि-स्तरीय (Three-Tier) पंचायत प्रणाली की स्थापना करना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की कुल जनसंख्या तीस लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर (Intermediate Level) की पंचायत का गठन न करने की छूट प्रदान की गई है। 3. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को कर लगाने, शुल्क वसूलने और अपनी वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने की शक्ति का प्रावधान स्वतः (Automatically) किया गया है, जिसका अर्थ है कि राज्य विधानमंडल द्वारा किसी कानून को पारित किए बिना भी पंचायतें सीधे कर आरोपित कर सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1946 में गठित 'अंतरिम सरकार' (Interim Government) तथा उससे जुड़े विभिन्न घटनाक्रमों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कैबिनेट मिशन योजना के प्रस्तावों के आधार पर 2 सितंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था, जिसमें शुरू में मुस्लिम लीग शामिल नहीं हुई थी, किंतु बाद में वायसराय लॉर्ड वेवल के प्रयासों से अक्टूबर 1946 में मुस्लिम लीग के पाँच सदस्य भी इस सरकार में शामिल हो गए थे और लियाकत अली खान को महत्वपूर्ण 'वित्त विभाग' (Finance Portfolio) सौंपा गया था। 2. अंतरिम सरकार में शामिल होने के पश्चात मुस्लिम लीग ने प्रशासनिक सहयोग देने की नीति अपनाई और संविधान सभा की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए भारत के विभाजन की मांग को औपचारिक रूप से त्याग दिया था। 3. वायसराय लॉर्ड वेवल द्वारा बुलाई गई अंतरिम सरकार की बैठकों में मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों ने लगातार बाधा उत्पन्न की, जिसके कारण सरकार के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के दौरान विकसित 'भक्ति आंदोलन' और 'सूफीवाद' तथा उनसे जुड़े संतों और उनके दार्शनिक सिद्धांतों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के दर्शन के विपरीत, दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार ब्रह्म और व्यक्तिगत आत्मा (जीव) दोनों वास्तविक और भिन्न हैं, किंतु आत्मा ब्रह्म का ही एक अंश है। 2. सूफी सिलसिलों में 'चिश्ती सिलसिला' भारत में सबसे अधिक उदार और लोकप्रिय माना जाता है, जिसके संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती थे, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य की राजनीति से पूरी तरह से दूरी बनाए रखने के लिए सुल्तानों द्वारा दी जाने वाली जागीर (इनाम भूमि) और आर्थिक सहायता को सहर्ष स्वीकार कर लिया था। 3. पंद्रहवीं शताब्दी के महान संत कबीर ने किसी भी संगठित धर्म, जातिगत भेदभाव और बाह्य कर्मकांडों का कड़ा विरोध करते हुए निराकार ईश्वर की भक्ति पर बल दिया, जबकि उनके समकालीन संत वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैत' और 'पुष्टिमार्ग' की स्थापना करते हुए भगवान कृष्ण की भक्ति को मोक्ष का मुख्य मार्ग बताया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) तथा उनसे जुड़े संवैधानिक संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39A के अंतर्गत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान मूल संविधान में ही निहित था, जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा हटाया गया, क्योंकि यह राज्यों की वित्तीय क्षमता के बाहर था। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए खंड जोड़े गए, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A), तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवहन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं। 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में एक नया खंड (खंड 2) जोड़ा गया, जिसके अनुसार राज्य को विशेष रूप से आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties - अनुच्छेद 51A) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, जिसके तहत प्रारंभ में कुल 10 मूल कर्तव्य थे। 2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संविधान में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके अनुसार छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य होगा। 3. मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, जिसका अर्थ यह है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसे सीधे दंडित किया जा सकता है या प्रवर्तित कराया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance), 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003' (FRBM Act) तथा राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. FRBM अधिनियम, 2003 का मुख्य उद्देश्य देश में वित्तीय अनुशासन को सुनिश्चित करना, राजस्व घाटे को समाप्त करना तथा दीर्घकालिक व्यापक आर्थिक स्थिरता प्राप्त करना था, जिसके तहत केंद्र सरकार के लिए वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटे की सीमा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3 प्रतिशत लक्षित की गई थी। 2. वर्ष 2018 में एन.के. सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर FRBM अधिनियम में संशोधन किया गया, जिसके तहत सरकार को यह कानूनी बाध्यता दी गई कि वह वर्ष 2020-21 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत और कुल ऋण (Debt-to-GDP Ratio) को केंद्र सरकार के लिए 40 प्रतिशत तथा संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों के लिए 60 प्रतिशत तक सीमित करे। 3. 'राजस्व घाटा' (Revenue Deficit) उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ सरकार का कुल राजस्व व्यय कुल राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है, और यदि सरकार द्वारा राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए उधार (Borrowing) का उपयोग किया जाता है, तो इसे अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक और पूंजी-सृजक राजकोषीय उपाय माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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