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Civil services — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 257 Mock Tests Khelein
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1916 के 'लखनऊ अधिवेशन' और 'होम रूल लीग आंदोलन' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के 1916 के लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता अम्बिका चरण मजूमदार ने की थी, तथा इसी अधिवेशन में गरम दल और नरम दल के बीच नौ वर्षों के अंतराल के बाद पुनः एकता स्थापित हुई, जिसके पीछे मुख्य रूप से बालगंगाधर तिलक और एनी बेसेंट के प्रयास शामिल थे। 2. लखनऊ अधिवेशन में ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य 'लखनऊ पैक्ट' संपन्न हुआ, जिसके तहत कांग्रेस ने पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorates) की मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार किया। 3. वर्ष 1916 में स्थापित 'अखिल भारतीय होम रूल लीग' (All India Home Rule League) के तहत एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में मद्रास (अडyar) में अपनी लीग की स्थापना की, जिसके मुख्य संगठनकर्ता जॉर्ज अरुंडेल थे, जबकि बालगंगाधर तिलक की लीग का कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र, मध्य प्रांत और कर्नाटक तक सीमित था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance) और 'राजकोषीय समेकन' (Fiscal Consolidation) से जुड़े विभिन्न संकेतकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'राजकोषीय घाटा' (Fiscal Deficit) सरकार की कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर है, और यह इस बात का द्योतक है कि सरकार को अपने कुल खर्चों को पूरा करने के लिए कुल कितना उधार लेना पड़ेगा। 2. 'प्रभावी राजस्व घाटा' (Effective Revenue Deficit), जो कि वर्ष 2011-12 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था, राजस्व घाटे और पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए दिए जाने वाले अनुदानों के बीच का अंतर होता है। 3. 'प्राथमिक घाटा' (Primary Deficit) चालू वर्ष के राजकोषीय घाटे और पिछले ऋणों पर सरकार द्वारा किए गए कुल ब्याज भुगतानों (Interest Payments) का योग होता है, जो यह दर्शाता है कि बिना ब्याज चुकाए सरकार का वास्तविक राजकोषीय प्रबंधन कैसा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बॉन्ड' (Green Bonds) और 'सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड' (Sovereign Green Bonds) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हरित बॉन्ड एक प्रकार का निश्चित आय वाला साधन है जिसका उपयोग विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण से संबंधित परियोजनाओं (जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ परिवहन) के लिए वित्तपोषण या पुनर्वित्तपोषण हेतु किया जाता है, और ये वैश्विक स्तर पर 'ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स' (GBP) द्वारा शासित होते हैं। 2. भारत सरकार ने अपनी प्रतिबद्धताओं के तहत वर्ष 2022-23 के बजट घोषणा के अनुरूप पहली बार 'सार्वभौमिक हरित बॉन्ड' (Sovereign Green Bonds) जारी किए, तथा इन बॉन्डों से प्राप्त होने वाली आय को केंद्र सरकार के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग देश के किसी भी विकासात्मक या राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किया जा सकता है। 3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरित बांडों का प्रमाणन और यह सत्यापित करने की प्रक्रिया कि परियोजनाएं पर्यावरण अनुकूल मानदंडों का पालन करती हैं या नहीं, मुख्य रूप से 'क्लाइमेट बॉन्ड इनिशिएटिव' (Climate Bonds Initiative) जैसी स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह उपबंध नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत होने के कारण देश की न्यायपालिका द्वारा स्वतः प्रवर्तनीय (Self-enforceable) है। 2. 'शामला बनाम स्टेट ऑफ पंजाब' और 'सारला मुद्गल बनाम भारत संघ' जैसे ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में समय-समय पर यह रेखांकित किया गया है कि देश में एक समान नागरिक संहिता का होना राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने और लैंगिक न्याय (Gender Justice) को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक है। 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत शामिल अधिकांश प्रावधान भले ही वाद योग्य (Justiciable) नहीं हैं, किंतु संविधान के अनुच्छेद 37 में स्वयं यह स्पष्ट किया गया है कि इसमें अंतर्विष्ट सिद्धांत देश के शासन में मौलिक (Fundamental) हैं और विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा 'संशोधनों' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है। 3. वर्मा समिति (1999) ने अपने प्रतिवेदन में कुछ महत्वपूर्ण मूल कर्तव्यों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की पहचान की थी, जैसे कि 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम' (1971) और 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' (1972), जो यह सुनिश्चित करते हैं कि देश में नागरिकों द्वारा कुछ विशेष कर्तव्यों का पालन विधायी माध्यमों से भी अनिवार्य रूप से किया जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण के संदर्भ में, 'जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण' (Biological Nitrogen Fixation) और नाइट्रोजन चक्र से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद पौधे इसे सीधे अवशोषित नहीं कर सकते, इसलिए कुछ विशेष सूक्ष्मजीव (जैसे राइजोबियम, ऐज़ाटोबैक्टर और सायनोबैक्टीरिया) नाइट्रोजन एंजाइम (Nitrogenase complex) की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं। 2. नाइट्रोसोमोनास और नाइट्रोबैक्टर जैसे रसायनसंश्लेषी (Chemoautotrophic) बैक्टीरिया 'नाइट्रीकरण' (Nitrification) प्रक्रिया के दौरान अमोनिया को सीधे मुक्त नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित करके वापस वायुमंडल में भेजने के लिए उत्तरदायी होते हैं। 3. 'विनाइट्रीकरण' (Denitrification) प्रक्रिया मुख्य रूप से अवायवीय (Anaerobic) परिस्थितियों में स्यूडोमोनास जैसे बैक्टीरिया द्वारा संचालित होती है, जिसके अंतर्गत नाइट्रेट्स का अपचयन होकर नाइट्रोजन गैस का निर्माण होता है, जो नाइट्रोजन चक्र को संतुलित बनाए रखती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूमध्यसागरीय जलवायु' (Mediterranean Climate) की विशेषताओं तथा इससे जुड़ी भौगोलिक घटनाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूमध्यसागरीय जलवायु मुख्य रूप से महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर 30° से 45° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के बीच पाई जाती है, और इस जलवायु की सबसे विशिष्ट विशेषता यह है कि यहाँ अधिकांश वर्षा गर्मियों के महीनों में चक्रवातीय depressions के कारण होती है, जबकि सर्दियाँ शुष्क रहती हैं। 2. इस क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन शुष्क और गर्म मौसम के लिए मुख्य रूप से उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटियों (Subtropical High-Pressure Belts) का ध्रुवीय दिशा में खिसकना उत्तरदायी होता है, जो हवाओं की नमी को रोक देता है। 3. भूमध्यसागरीय क्षेत्र में चलने वाली 'सिराको' (Sirocco) एक गर्म, शुष्क और धूल भरी स्थानीय हवा है जो सहारा मरुस्थल से उत्तर की ओर भूमध्य सागर को पार करते हुए दक्षिणी यूरोप (विशेषकर इटली) में पहुँचती है, जिसे कभी-कभी वहाँ 'रक्त वर्षा' (Blood Rain) का कारण माना जाता है क्योंकि हवा अपने साथ लाल धूल के कण उड़ाकर लाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है। 3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन' (Public Debt Management) और 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. FRBM अधिनियम, 2003 के मूल प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार का यह लक्ष्य था कि वह वर्ष 2008-09 तक राजस्व घाटे को पूरी तरह से समाप्त कर देगी और राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत तक सीमित करेगी। 2. वर्ष 2018 के संशोधनों के पश्चात FRBM अधिनियम में यह संस्तुति की गई कि केंद्र सरकार का ऋण-से-जीडीपी (Debt-to-GDP) अनुपात वर्ष 2024-25 तक कुल मिलाकर 40 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए, जिसमें केंद्र सरकार के लिए 40% और राज्यों के लिए अलग से 20% का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 3. 'एन.के. सिंह समिति' (जिसकी संस्तुतियों के आधार पर FRBM अधिनियम में कई महत्वपूर्ण संशोधन सुझाए गए थे) ने यह सिफारिश की थी कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'राजकोषीय घाटा नियम' (Fiscal Deficit Target) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और वर्ष 2023 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक और बाद में 3 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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