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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के दौरान विकसित 'भक्ति आंदोलन' और 'सूफीवाद' तथा उनसे जुड़े संतों और उनके दार्शनिक सिद्धांतों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के दर्शन के विपरीत, दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार ब्रह्म और व्यक्तिगत आत्मा (जीव) दोनों वास्तविक और भिन्न हैं, किंतु आत्मा ब्रह्म का ही एक अंश है।
- 2. सूफी सिलसिलों में 'चिश्ती सिलसिला' भारत में सबसे अधिक उदार और लोकप्रिय माना जाता है, जिसके संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती थे, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य की राजनीति से पूरी तरह से दूरी बनाए रखने के लिए सुल्तानों द्वारा दी जाने वाली जागीर (इनाम भूमि) और आर्थिक सहायता को सहर्ष स्वीकार कर लिया था।
- 3. पंद्रहवीं शताब्दी के महान संत कबीर ने किसी भी संगठित धर्म, जातिगत भेदभाव और बाह्य कर्मकांडों का कड़ा विरोध करते हुए निराकार ईश्वर की भक्ति पर बल दिया, जबकि उनके समकालीन संत वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैत' और 'पुष्टिमार्ग' की स्थापना करते हुए भगवान कृष्ण की भक्ति को मोक्ष का मुख्य मार्ग बताया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: आदि शंकराचार्य का दर्शन 'अद्वैत वेदांत' (निरपेक्ष अद्वैतवाद) पर आधारित था, जिसके अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है और जगत माया है। इसके विपरीत, रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' (Qualified Monism) का प्रतिपादन किया, जिसमें उन्होंने माना कि जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न होते हुए भी उसी का अभिन्न अंग हैं।
कथन 2 गलत है: चिश्ती सिलसिले के संतों ने अपनी नीति के तहत सुल्तानों, राजाओं और अमीरों द्वारा दिए जाने वाले उपहारों, जागीर (इनाम भूमि) और राजकीय सहायता को स्वीकार करने से सख्त परहेज किया था। वे अपनी आजीविका के लिए सादा जीवन जीते थे और भिक्षा या अपने श्रम पर निर्भर रहते थे, ताकि वे शासकों के प्रभाव से मुक्त रहकर जनता की सेवा कर सकें।
कथन 3 सही है: संत कबीर ने रूढ़िवादिता, मूर्तिपूजा, जाति व्यवस्था और बाह्य कर्मकांडों की तीखी आलोचना की और निराकार ईश्वर (निर्गुण भक्ति) पर जोर दिया। वहीं, संत वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैत' वेदांत का प्रतिपादन किया और 'पुष्टिमार्ग' के माध्यम से श्रीकृष्ण की सगुण भक्ति और उनकी अनुकंपा को मोक्ष का आधार बताया।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित债券' (Green Bonds) और सतत वित्त पोषण (Sustainable Finance) के प्रावधानों तथा वैश्विक मानकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बॉन्ड (Green Bonds) ऐसे निश्चित आय वाले वित्तीय उपकरण (Fixed-income instruments) हैं जिनका उपयोग विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण-हितैषी परियोजनाओं, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए पूंजी जुटाने हेतु किया जाता है।
2. भारत में सार्वभौमिक हरित बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) का ढांचा वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसके तहत जुटाई गई आय को देश की भारत समचित निधि (Consolidated Fund of India) में अन्य सामान्य सरकारी प्राप्तियों के साथ मिला दिया जाता है और अलग से कोई विशेष ट्रैकिंग की आवश्यकता नहीं होती है।
3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरित बॉन्ड बाजार की पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए 'ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स' (Green Bond Principles - GBP) का प्रबंधन इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट एसोसिएशन (ICMA) द्वारा किया जाता है, जो उपयोग की आय, परियोजना मूल्यांकन और चयन तथा रिपोर्टिंग के लिए स्वैच्छिक दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'प्रधानमंत्री गति शक्ति' (PM GatiShakti) योजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में देश के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए शुरू किया गया था, जिसके अंतर्गत सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर होने वाले कुल पूंजीगत व्यय में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग समान रूप से (प्रत्येक की एक तिहाई) परिकल्पित की गई है।
2. 'प्रधानमंत्री गति शक्ति - राष्ट्रीय मास्टर प्लान' एक डिजिटल मंच है जो अर्थव्यवस्था के सात प्रमुख इंजनों (सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, मास ट्रांसपोर्ट, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा) के विकास को समेकित करने और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के डेटा को एक मंच पर लाता है।
3. NIP और PM GatiShakti दोनों ही पहलों का मुख्य उद्देश्य केवल केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष बजट आवंटन पर निर्भर रहना है, और इन परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, भारत में 'मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण' (Inflation Targeting) और 'मौद्रिक नीति समिति' (Monetary Policy Committee - MPC) के प्रावधानों तथा उनके कामकाज के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा गठित मौद्रिक नीति समिति (MPC) एक छह सदस्यीय निकाय है, जिसमें तीन सदस्य भारतीय रिजर्व बैंक के होते हैं और तीन सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा एक खोज-सह-चयन समिति की संस्तुति पर की जाती है।
2. अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों का कार्यकाल चार वर्ष का होता है, और वे इस पद पर पुनः नियुक्ति के पात्र नहीं होते हैं, तथा समिति के निर्णयों के लिए कोरम (Ganm) कम-से-कम चार सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य करता है।
3. यदि मौद्रिक नीति समिति लगातार तीन तिमाहियों तक निर्धारित मुद्रास्फीति लक्ष्य (Inflation Target) को प्राप्त करने में असफल रहती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक को केंद्र सरकार को एक औपचारिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है जिसमें इस विफलता के कारणों और इसके निवारण के लिए उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों का उल्लेख करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय छाया क्षेत्र' (Seismic Shadow Zone) और इसके निर्माण की क्रियाविधि के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप का 'छाया क्षेत्र' वह विशिष्ट क्षेत्र होता है जहाँ भूकंपीय तरंगें (P-तरंगें और S-तरंगें दोनों) अभिलेखी यंत्रों (Seismographs) द्वारा या तो दर्ज ही नहीं की जाती हैं या अत्यंत कमजोर रूप में दर्ज की जाती हैं, और यह क्षेत्र भूकंप के अधिकेंद्र (Epicenter) से 105° और 145° के बीच एक विस्तृत पट्टे (Belt) के रूप में पृथ्वी के चारों ओर पाया जाता है।
2. प्राथमिक तरंगों (P-waves) का छाया क्षेत्र द्वितीयक तरंगों (S-waves) के छाया क्षेत्र की तुलना में अधिक विस्तृत होता है, क्योंकि P-तरंगें पृथ्वी के तरल बाह्य क्रोड़ (Outer Core) में प्रवेश करते ही पूरी तरह से अवशोषित हो जाती हैं और आगे गमन नहीं कर पाती हैं।
3. चूँकि S-तरंगें केवल ठोस माध्यम से ही गमन कर सकती हैं और तरल माध्यम (Outer Core) में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं, इसलिए S-तरंगों का छाया क्षेत्र अधिकेंद्र से 105° से आगे के संपूर्ण गोलार्ध को कवर करता है, जो पृथ्वी के लगभग 40 प्रतिशत से अधिक हिस्से को आच्छादित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और इसके विधिक ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) का गठन वर्ष 2003 में 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत एक सांविधिक, स्वायत्त निकाय के रूप में किया गया था, जिसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है।
2. यह प्राधिकरण जैव विविधता अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन, संरक्षण और जैविक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए केंद्र सरकार को सलाह देने के साथ-साथ विदेशी नागरिकों या कंपनियों द्वारा देश के जैविक संसाधनों और उससे जुड़ी पारंपरिक ज्ञान तक पहुँच को विनियमित करने का विशेष अधिकार रखता है।
3. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे में राष्ट्रीय स्तर पर NBA, राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) शामिल हैं, किंतु स्थानीय निकायों (BMC) को जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग पर स्थानीय स्तर पर कर या शुल्क लगाने का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।
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