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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (Supreme Court - अनुच्छेद 124 से 147) तथा सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों और क्षेत्राधिकार के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का 'आरंभिक क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद में अनन्य रूप से लागू होता है, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसी संधि, समझौते या प्रसंविदा से उत्पन्न हुआ हो जो संविधान के लागू होने से पहले की गई थी और अभी भी प्रवृत्त है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसे प्रत्येक संदर्भ पर अपनी राय राष्ट्रपति को प्रेषित करे।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, और संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए यह शक्ति प्राप्त है कि वह अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री पारित कर सकता है या आदेश दे सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का आरंभिक क्षेत्राधिकार संघ और राज्यों के बीच के विवादों पर लागू होता है, लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण अपवाद यह है कि यह क्षेत्राधिकार किसी ऐसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य समान लिखत से उत्पन्न विवाद पर लागू नहीं होता है जो संविधान के लागू होने से पहले की गई थी और उस पर रोक लगाती है (यानी प्री-कॉन्स्टिट्यूशन संधियाँ इसके दायरे से बाहर हैं)। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांगने की शक्ति है। यदि प्रश्न कानून या तथ्य के सार्वजनिक महत्व का है, तो सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति को राय देने के लिए 'विवश' (obligated) नहीं है; बल्कि अनुच्छेद 143 के खंड (1) के तहत न्यायालय 'राय दे भी सकता है और मना भी कर सकता है'। हाँ, खंड (2) के तहत संविधान पूर्व-संवैधानिक संधियों से उत्पन्न मामलों में राय देना अनिवार्य बनाता है, लेकिन सामान्य मामलों में यह अनिवार्य नहीं है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर आबद्धकर होती है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को अपने समक्ष लंबित किसी वाद में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की व्यापक शक्ति प्रदान करता है।
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