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Civil services — Free MCQ Questions & Mock Test

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Civil services ki taiyari ke liye 2576+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और उसके अधिकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान ही होते हैं। 2. निर्वाचन आयोग के अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से किसी भी समय हटाया जा सकता है, क्योंकि संविधान उन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समान विधिक सुरक्षा या महाभियोग जैसी प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है। 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 123 के अंतर्गत 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practices) की परिभाषा में केवल जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना ही शामिल है, और यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी के निजी जीवन या उसके व्यक्तिगत चरित्र से जुड़े पहलुओं पर बयान देता है, तो वह इस धारा के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के सूफी संप्रदायों (Silsilas) और उनकी विचारधाराओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती संप्रदाय (Chishti Silsila) की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस संप्रदाय के संतों ने राज्य के संरक्षण, शाही दरबार के साथ घनिष्ठ संबंधों और राजनीतिक सत्ता में प्रत्यक्ष भागीदारी को अपने आध्यात्मिक मार्ग का अनिवार्य अंग माना। 2. सुहरावर्दी संप्रदाय (Suhrawardi Silsila) के संतों ने चिश्ती संप्रदाय के विपरीत राज्य के साथ सहयोग करने की नीति अपनाई, राजकीय पदों (जैसे शैख-उल-इस्लाम) को स्वीकार किया, और अपने शिष्यों को धन संचय करने तथा विलासितापूर्ण जीवन जीने से परहेज न करने की अनुमति दी। 3. नक्शबंदी संप्रदाय (Naqshbandi Silsila) की स्थापना भारत में ख्वाजा बाकी बिल्लाह द्वारा की गई थी, और इस संप्रदाय के सबसे प्रमुख संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद अलिफसानी) थे, जिन्होंने अकबर की उदार धार्मिक नीतियों और 'दीन-ए-इलाही' का कड़ा विरोध करते हुए रूढ़िवादी इस्लाम की पुनः स्थापना पर जोर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'ओजोन परत क्षरण' (Ozone Layer Depletion), 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' (Montreal Protocol) और उससे जुड़े संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि है जिसे ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों (ODSs) जैसे कि क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (CFCs), हैलॉन और कार्बन टेट्राक्लोराइड के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए अपनाया गया था, और यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सार्वभौमिक अनुसमर्थन (Universal Ratification) प्राप्त करने वाली पहली संधि है। 2. 'किगाली संशोधन' (Kigali Amendment), जिसे वर्ष 2016 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत अपनाया गया, ने हाइड्रोफ्लुओरोकार्बन (HFCs) को ओजोन क्षयकारी पदार्थों की सूची में शामिल किया और इसके तहत सभी देशों के लिए यह कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया गया कि वे अगले तीन दशकों में HFCs के उपयोग में 80% से अधिक की कटौती करें। 3. वायुमंडल में ओजोन का क्षरण मुख्य रूप से समताप मंडल (Stratosphere) में होता है, जहाँ पराबैंगनी विकिरणों के प्रभाव से क्लोरोफ्लुओरोकार्बन से मुक्त होने वाले क्लोरीन और ब्रोमीन के परमाणु उत्प्रेरक (Catalysts) के रूप में कार्य करते हैं और ओजोन के अणुओं को लगातार ऑक्सीजन में तोड़ते रहते हैं, जिससे एक ही क्लोरीन परमाणु हजारों ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ' (Services under the Union and the States - अनुच्छेद 308 से 323) तथा लोक सेवा आयोगों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का गठन किया जाएगा, तथा दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद विधि द्वारा उन राज्यों के लिए एक 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JPSC) का गठन कर सकती है, जो एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। 2. संघ लोक सेवा आयोग या संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास होता है, राज्यपाल के पास नहीं। 3. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार लोक सेवा आयोग का कोई भी सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात उसी आयोग के अध्यक्ष पद पर या किसी अन्य लोक सेवा आयोग (संघ या राज्य) के अध्यक्ष पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार (Employment) को प्राप्त करने के लिए पूर्णतः अपात्र हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits - अनुच्छेद 264 से 300A) तथा भारत की संचित निधि और लोक लेखा के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत की 'संचित निधि' (Consolidated Fund of India) एक ऐसा निधि है जिसमें भारत सरकार को प्राप्त होने वाले सभी राजस्व, उसके द्वारा जारी किए गए ट्रेजरी बिलों, ऋणों और ऋणों की अदायगी से प्राप्त सभी धन जमा किए जाते हैं, और इस निधि से धन संसद की विनियोग विधि (Appropriation Act) के पारित होने के पश्चात ही निकाला जा सकता है। 2. भारत के 'लोक लेखा' (Public Account of India - अनुच्छेद 266 का खंड 2) के अंतर्गत सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त किए जाने वाले सभी अन्य लोक धन (जैसे भविष्य निधि जमा, न्यायिक जमा, प्रेषण, बचत बैंक जमा आदि) जमा किए जाते हैं, और इस निधि से धन निकालने के लिए संसद की पूर्व स्वीकृति या विनियोग अधिनियम की आवश्यकता होती है। 3. संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत संसद को 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) की स्थापना करने की शक्ति दी गई है, जिसे राष्ट्रपति के распоря (अधिकार) के अधीन रखा जाता है, और इस निधि से किसी भी अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है, जिसके लिए बाद में संसद की अनुमति लेना आवश्यक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language - अनुच्छेद 343 से 351) तथा आठवीं अनुसूची के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा, लेकिन संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा अंग्रेजी भाषा के प्रयोग को कुछ निश्चित प्रयोजनों के लिए अनिश्चितकाल तक जारी रख सकती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके लिए वह केवल संस्कृत भाषा से ही अपनी शब्दावली ग्रहण करेगा, किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा से नहीं। 3. संविधान की 'आठवीं अनुसूची' में मूल रूप से चौदह (14) भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाया गया, और वर्तमान में इस अनुसूची में कुल बाईस (22) भाषाएँ शामिल हैं, जिनमें अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा भी आधिकारिक रूप से सम्मिलित हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, समुद्र तल प्रसार (Sea Floor Spreading) और प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) सिद्धांत के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'समुद्र तल प्रसार' की अवधारणा को सबसे पहले वर्ष 1961 में रॉबर्ट डीट्ज़ (Robert Dietz) द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जबकि हैरी हेस (Harry Hess) ने मध्य-महासागरीय कटकों (Mid-Oceanic Ridges) के सहारे महासागरीय पर्पटी के लगातार फटने और नए मैग्मा के ऊपर आकर जमने की प्रक्रिया के रूप में इसे विस्तृत रूप दिया। 2. पुराचुंबकत्व (Paleomagnetism) के अध्ययन से यह सिद्ध हुआ कि मध्य-महासागरीय कटकों के दोनों ओर चट्टानों में चुंबकीय पट्टियाँ (Magnetic Stripes) एक समान और सममित (Symmetrical) रूप से व्यवस्थित हैं, जो समुद्र तल के प्रसार और महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में सबसे प्रबल प्रमाण प्रदान करती हैं। 3. विवर्तनिक प्लेटों के किनारों पर होने वाली गतियों के संदर्भ में, अभिसारी सीमा (Convergent Boundary) पर हमेशा भारी और घनी महासागरीय प्लेट हल्की महाद्वीपीय प्लेट के नीचे क्षैतिज रूप से सबडक्ट (Subduct) होती है, जिसके कारण कभी भी महाद्वीपीय-महाद्वीपीय प्लेट अभिसरण की स्थिति में पर्वतों का निर्माण नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-B' के अंतर्गत 'सहकारी समितियाँ' (Co-operative Societies - अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT) तथा '97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के माध्यम से संविधान में तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए: मौलिक अधिकारों में अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार एक स्पष्ट मौलिक अधिकार के रूप में जोड़ा गया, नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 43-B को शामिल किया गया, और संविधान में एक नया भाग IX-B जोड़ा गया। 2. इस संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 243-ZK में यह प्रावधान किया गया कि किसी भी सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्यों की अधिकतम संख्या इक्कीस (21) से अधिक नहीं होगी, और इसमें महिलाओं तथा अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों के लिए क्रमशः कम से कम एक-तिहाई और दो सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। 3. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'एस. संघन पाटिल बनाम भारत संघ (2021)' मामले में 97वें संविधान संशोधन अधिनियम की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करते हुए यह निर्णय दिया गया कि चूँकि इस संशोधन ने राज्यों के विधाई क्षेत्रों (राज्य सूची की प्रविष्टि 32) को सीधे तौर पर प्रभावित किया था, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 368(2) के परंतुक (Proviso) के अनुसार कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा इसका अनुसमर्थन प्राप्त करना अनिवार्य था, और राज्यों के अनुसमर्थन के अभाव में भाग IX-B को पूरी तरह से असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह प्रावधान एक न्यायोचित (Justiciable) अधिकार है जिसे लागू कराने के लिए कोई भी नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकता है। 2. गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 (Portuguese Civil Code) के रूप में एक समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है, जो धार्मिक संप्रदायों के आधार पर व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) में अंतर किए बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले प्रावधानों में से कुछ को समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से जोड़ा गया है, किंतु अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता) मूल संविधान में ही नीति निर्देशक तत्वों के भाग के रूप में निहित था, जिसे किसी भी संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - अनुच्छेद 51A) तथा 'स्वर्ण सिंह समिति' (Swaran Singh Committee) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से रूसी संविधान (तत्कालीन सोवियत संघ) से प्रेरणा लेकर संविधान में जोड़ा गया था, और मूल रूप से स्वर्ण सिंह समिति ने केवल 8 मूल कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की थी, किंतु संसद ने संशोधन करते समय इनकी संख्या बढ़ाकर 10 कर दी थी। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत वर्तमान में कुल 11 मूल कर्तव्य शामिल हैं, जिनमें 11वाँ मूल कर्तव्य वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़ा गया, जो 6 से 14 वर्ष की आयु के अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने के माता-पिता या संरक्षक के कर्तव्य से संबंधित है। 3. मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, अर्थात इनके उल्लंघन या अनुपालन न करने पर सीधे तौर पर किसी भी न्यायालय द्वारा कोई कानूनी दंड या प्रवर्तनीय रिट (Writ) जारी नहीं की जा सकती है, जब तक कि संसद द्वारा इसके क्रियान्वयन के लिए कोई विशिष्ट दंडात्मक विधि न बनाई गई हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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