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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test

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General Science ki taiyari ke liye 1368+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

🎯 136 Mock Tests Khelein

विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के पूर्णतः बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है। 2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं, और इस प्रक्रिया की क्रियाविधि को 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' (Intermediate compound formation theory) द्वारा समझाया जाता है। 3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित कर पश्च अभिक्रिया की दर को अत्यधिक तीव्र कर देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिकांगों (Organelles) और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सिसोम' (F0-F1 कण) ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के दौरान एटीपी (ATP) के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं, और माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र से जुड़े एंजाइम प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं। 2. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का 'सिस्टर्नी' (Cisternae) नेटवर्क ध्रुवीय रूप से व्यवस्थित होता है, जिसमें 'सिस' (Cis) सिरा निर्माणकारी (Forming) या अभिमुखी सिरा होता है जो अंतःद्रव्य जालिका (ER) की ओर होता है, जबकि 'ट्रांस' (Trans) सिरा परिपक्व (Maturing) सिरा होता है। 3. लाइसोसोम में उपस्थित 'हाइड्रोलिटिक एंजाइम' (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज, कार्बोहाइड्रेज) अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अनुकूलित pH को बनाए रखने के लिए लाइसोसोम झिल्ली पर सक्रिय प्रोटॉन पंप ($H^+$ ATPase) कार्य करते हैं। 4. परऑक्सिसोम (Peroxisomes) एकहरे झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं जो पादपों और जंतुओं दोनों में पाए जाते हैं, और इनमें उपस्थित 'कैटालेज' एंजाइम हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($H_2O_2$) को जल और ऑक्सीजन में विघटित करके कोशिकाओं को विषैले प्रभावों से बचाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक तार का प्रतिरोध ($R$) उसकी लंबाई ($l$) के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता ($ ho$) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, उसके आयामों पर नहीं। 2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (लूप नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग लागू किए गए कुल विद्युत वाहक बल (EMF) के बराबर होता है। 4. श्रेणीक्रम (Series combination) में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है, और इस संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की जैव-रासायनिक और प्रतिरक्षात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह प्रतिजन (Antigens) प्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जिनका संश्लेषण सीधे 'ABO' जीन द्वारा कूटबद्ध (coded) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से होता है, न कि ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों के माध्यम से। 2. 'बॉम्बे फिनोटाइप' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों में H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B के साथ-साथ एक विशेष 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह से रक्त लेने से रोकती है। 3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, यदि एक Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, तो प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनी IgG प्रकार की एंटी-Rh एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार कर सकती हैं और प्रथम शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। 4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक प्रणाली (Intrinsic pathway) की शुरुआत रक्त वाहिका की क्षति के बाद संपर्क कारकों (Contact factors जैसे Factor XII) के उपकला के नीचे स्थित कोलेजन या ऋणात्मक आवेशित सतहों के संपर्क में आने से होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो राउल्ट के नियम के अनुसार विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है। 2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक सभी एक ही भौतिक अवस्था में होते हैं, और इसकी क्रियाविधि को मुख्य रूप से 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' द्वारा समझाया जाता है। 3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का प्रमुख उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के सक्रियण ऊर्जा को कम करके अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं, किंतु यह साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित नहीं करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच होती है, जो कि अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैचिटीन (Pachytene) अवस्था के दौरान 'रिकॉम्बिनैज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है। 2. क्रॉसिंग ओवर के परिणामस्वरूप आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Genetic recombination) होता है, जो संतति में नए लक्षणों के प्रकट होने का मुख्य कारण है और यह जीवों की जातियों में विकास (Evolution) की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है। 3. काय्स्माटा (Chiasmata) का निर्माण डिप्लोटीन (Diplotene) अवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ समजात गुणसूत्र एक-दूसरे से अलग होने लगते हैं किंतु विनिमय बिंदु पर जुड़े रहते हैं। 4. सहलग्नता (Linkage) और जीन विनिमय एक-दूसरे के सीधे आनुपातिक (Directly proportional) होते हैं, अर्थात् जितने अधिक निकट जीन स्थित होंगे, उनके बीच क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाले जनसंख्या में एलील आवृत्तियाँ (Allele frequencies) पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं, बशर्ते जनसंख्या में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन (Genetic drift), जीन प्रवाह और गैर-यादृच्छिक संभोग का अभाव हो। 2. लैमार्कवाद का मूल सिद्धांत 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of acquired characters) और अंगों के उपयोग व अनुपयोग पर आधारित था, जिसे बाद में वीज्मैन के 'जननद्रव्य की निरंतरता के सिद्धांत' (Theory of Continuity of Germplasm) द्वारा खंडित किया गया था। 3. प्राकृतिक चयन के डार्विनवादी सिद्धांत में 'योग्यतम की उत्तरजीविता' (Survival of the fittest) का तात्पर्य सबसे आक्रामक या शारीरिक रूप से सबसे बलवान जीव से है, न कि पर्यावरण के प्रति सबसे अनुकूलित जीव से। 4. आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) विशेष रूप से छोटी जनसंख्या में प्रभाव डालता है, जिसके कारण 'संस्थापक प्रभाव' (Founder effect) और 'बॉटलनेक प्रभाव' (Bottleneck effect) जैसी घटनाएँ उत्पन्न होती हैं जो नई जातियों के उद्भव में योगदान दे सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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रासायनिक बंधन, समन्वय यौगिकों और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फजान के नियमों (Fajans' rules) के अनुसार, आयनिक यौगिक में सहसंयोजक लक्षण तब अधिक होते हैं जब धनायन का आकार छोटा हो, ऋणायन का आकार बड़ा हो और धनायन पर आवेश का घनत्व उच्च हो। 2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल (Hard acids) सामान्यतः छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश और कम ध्रुवणनीयता वाले धनायन होते हैं जो कठोर क्षारों के साथ मजबूत और स्थिर संकुल बनाते हैं। 3. लुईस अम्ल संकल्पना के अंतर्गत, वे सभी स्पीशीज लुईस अम्ल के रूप में कार्य करती हैं जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की प्रवृत्ति रखती हैं, जैसे अमोनिया ($NH_3$) और जल ($H_2O।$) 4. समइलेक्ट्रॉनिक (Isoelectronic) स्पीशीज के बीच, नाभिकीय आवेश ($Z$) में वृद्धि होने पर ऋणायनों के आकार में कमी आती है जबकि धनायनों का आकार बढ़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, किंतु प्रत्येक आवर्त के अंत में उपस्थित उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) की परमाणु त्रिज्या अपने से ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की तुलना में काफी बड़ी होती है क्योंकि उत्कृष्ट गैसों के आकार का निर्धारण उनकी वांडर वाल्स त्रिज्या (Van der Waals radius) के आधार पर किया जाता है। 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु आवर्त सारणी में ऑक्सीजन और फ्लोरीन जैसे द्वितीय आवर्त के तत्वों का इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान उनके ठीक नीचे आने वाले तृतीय आवर्त के तत्वों (क्रमशः सल्फर और क्लोरीन) की तुलना में अधिक होता है। 3. पॉलिंग पैमाने के अनुसार विद्युतऋणात्मकता का मान आवर्त सारणी में फ्लोरीन के लिए अधिकतम होता है, और किसी परमाणु की विद्युतऋणात्मकता केवल उसकी इलेक्ट्रॉन बंधुता पर निर्भर करती है, उसके संकरण (Hybridization) अवस्था या ऑक्सीकरण अवस्था पर नहीं। 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) का प्रमुख कारण $4f$ कक्षकों का अत्यधिक अपूर्ण और दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Poor shielding effect) है, जिसके कारण 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार 3d और 4d श्रेणियों के तत्वों के लगभग समान हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

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मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय की 'पैरीटाल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ' (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो आंत में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है। 2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन के दौरान बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों और डायाफ्राम का संकुचन वक्षीय गुहा के आयतन को कम करता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतरापोषीय दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है और वायु बाहर प्रवाहित होती है। 3. हृदय के चालन तंत्र में विद्युत आवेगों की शुरुआत सिनोट्रायल (SA) नोड से होती है, जिसे हृदय का प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, और यह आवेग एट्रियोवेंट्रिकल (AV) नोड, बंडल ऑफ हिस तथा पर्किंजे तंतुओं से होते हुए निलयों के संकुचन को प्रेरित करता है। 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अंतर्गत 'मस्तिष्क आवरण' (Meninges) की सबसे बाहरी और कठोर परत 'ड्यूरा मेटर' (Dura mater) होती है, और प्रमस्तिष्क (Cerebrum) का 'लिम्बिक तंत्र' (Limbic system) भावनाओं, प्रेरणा और कामुकता के नियमन में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

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