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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 136 Mock Tests Khelein
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके संचरण के तरीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्षय रोग (Tuberculosis) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, जबकि 'डॉट्स' (DOTS) प्रणाली इसके उपचार के लिए अपनाई जाने वाली प्रत्यक्ष अवलोकन उपचार रणनीति है। 2. जापानी एन्सेफलाइटिस एक विषाणु जनित मस्तिष्क का संक्रमण है, जिसका संचरण मुख्य रूप से 'क्युलेक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और इसके विषाणु के लिए सुअर तथा पक्षी प्राथमिक पोषक (Reservoir hosts) के रूप में कार्य करते हैं। 3. रिलैप्सिंग फीवर और टाइफस ज्वर जैसे संक्रामक रोग जीवाणुओं (जैसे बोरेलिया और रिकेट्सिया) के कारण होते हैं, जिनका संचरण टिक (Ticks), जूँ (Lice) और पिùओं (Fleas) जैसे आर्थ्रोपोड वैक्टर द्वारा होता है। 4. हेपेटाइटिस बी एक डीएनए विषाणु है जो मुख्य रूप से दूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है, तथा इसके संक्रमण से आंतों की उपकला कोशिकाओं का गंभीर क्षय और यकृत सिरोसिस (Liver Cirrhosis) उत्पन्न होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऊष्मागतिकी के शून्यवें नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) और विभिन्न तापमापीय पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य (Thermal equilibrium) में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। 2. परम शून्य ताप (Absolute Zero) वह सैद्धांतिक तापमान है जिस पर किसी आदर्श गैस की गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है, और सेल्सियस पैमाने पर इसका मान -273.15 °C होता है। 3. फारेनहाइट और सेल्सियस पैमाने एक विशिष्ट तापमान पर बिल्कुल समान पाठ्यांक (Reading) दर्शाते हैं, और यह तापमान -40 डिग्री होता है। 4. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant volume gas thermometer) में पारे का उपयोग किया जाता है क्योंकि पारा सभी तापमानों पर एकसमान प्रसार गुणांक प्रदर्शित करता है और काँच को नहीं भिगोता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु भौतिकी और नाभिकीय अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय नियतांक (Decay constant, $\lambda$) और उसकी अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) के बीच का संबंध $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिसका अर्थ है कि क्षय नियतांक जितना अधिक होगा, नाभिक की अर्ध-आयु उतनी ही कम होगी। 2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान 'द्रव्यमान क्षति' (Mass defect) ही ऊर्जा में रूपांतरित होती है, जिसे आइंस्टीन के समीकरण $E = \mc^2$ द्वारा समझाया जाता है, और यूरेनियम-235 के एक विखंडन से औसतन लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त होती है। 3. नियंत्रित नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रतिक्रियाओं को पृथ्वी पर संचालित करने के लिए 'टोकामक' (Tokamak) जैसी युक्तियों में अत्यधिक उच्च तापमान और चुंबकीय परिरक्षण (Magnetic confinement) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि संलयन के लिए आवश्यक कूलामी प्रतिकर्षक बल को पार करने हेतु उच्च गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 4. बीटा-क्षय (Beta decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले 'न्यूट्रिनो' और 'एंटी-न्यूट्रिनो' कणों का द्रव्यमान शून्य और आवेश इकाई धनात्मक होता है, जो दुर्बल नाभिकीय बल (Weak nuclear force) के अंतर्गत ऊर्जा और कोणीय संवेग के संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और प्रगामी तरंगों की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों के संचरण के दौरान माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर कंपन करते हैं, जिससे माध्यम में संपीडन (Compressions) और विरलन (Rarefactions) उत्पन्न होते हैं। 2. किसी गैस में ध्वनि की चाल माध्यम के दाब पर निर्भर करती है, और न्यूटन के सूत्र के अनुसार यह isothermal (समतापीय) प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत मानक ताप और दाब पर ध्वनि की सैद्धांतिक चाल और प्रायोगिक मान में थोड़ा अंतर होता है, जिसे लाप्लास ने अपने संशोधन द्वारा दूर किया। 3. माध्यम का तापमान बढ़ाने पर उसमें ध्वनि की चाल बढ़ जाती है, क्योंकि तापमान में वृद्धि से माध्यम की प्रत्यास्थता (Elasticity) बढ़ती है और घनत्व में वृद्धि होती है। 4. डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect) के अनुसार, जब ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो श्रोता को सुनाई देने वाली ध्वनि की आवृत्ति में परिवर्तन प्रतीत होता है, और यह प्रभाव प्रकाश तरंगों तथा ध्वनि तरंगों दोनों पर लागू होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों के मापन और विमीय विश्लेषण (Dimensional Analysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्लांक स्थिरांक ($h$) और कोणीय संवेग (Angular Momentum) की विmaier (Dimensions) आपस में पूर्णतः समान होती हैं, तथा दोनों का विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ होता है। 2. 'प्रत्यास्थता गुणांक' (Modulus of Elasticity) और 'दाब' (Pressure) दोनों की विमाएँ समान होती हैं, क्योंकि दोनों को प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। 3. सार्वत्रिक गैस स्थिरांक ($R$) की विमा और 'ऊष्मीय धारिता' (Heat Capacity) की विमा समान होती है, क्योंकि दोनों ऊर्जा और तापमान के अनुपात को निरूपित करती हैं। 4. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) और बल नियतांक (Spring Constant) दोनों का विमीय सूत्र $[MT^{-2}]$ होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative properties) तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम पर आधारित एक अणुसंख्यक गुणधर्म है जो विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता। 2. क्वथनांक उन्नयन ($ΔT_b$) और हिमांक अवनमन ($ΔT_f$) दोनों ही विलायक के मोलल उन्नयन और अवनमन स्थिरांक पर निर्भर करते हैं, तथा ये मान विलायक की प्रकृति के साथ-साथ विलेय के मोलर द्रव्यमान की गणना करने में सहायता करते हैं। 3. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (जैसे सभी द्रव या सभी गैस) में होते हैं, जिसमें 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' सक्रियण ऊर्जा को बढ़ाकर अभिक्रिया की दर को त्वरित करता है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार इनकी क्रियाशीलता विशिष्ट क्रियाधार (Substrate) अणुओं के साथ उनके सक्रिय स्थलों पर बंध बनाने पर निर्भर करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और रेडियोएक्टिव क्षय की प्रक्रियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला (Proton-Proton chain) द्वारा हाइड्रोजन का हीलियम में संलयन है, जिसके लिए अत्यंत उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता होती है ताकि नाभिकों के बीच के कूलामी प्रतिकर्षक बल को पार किया जा सके। 2. अल्फा-क्षय (Alpha decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाला अल्फा कण वास्तव में एक हीलियम नाभिक ($^4_2He$) होता है, और इस प्रक्रिया में जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 तथा द्रव्यमान संख्या 4 से घट जाती है। 3. गामा-क्षय (Gamma decay) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रेडियोएक्टिव नाभिक द्वारा अल्फा या बीटा कणों का उत्सर्जन किया जाता है, जिससे नाभिक की द्रव्यमान संख्या में परिवर्तन होता है और यह हमेशा एक नए रासायनिक तत्व में परिवर्तित हो जाता है। 4. न्यूट्रॉन-प्रोटॉन अनुपात ($n/p$) के असंतुलन को संतुलित करने के लिए, न्यूट्रॉन-समृद्ध नाभिक बीटा-माइनस ($eta^-$) क्षय प्रदर्शित करते हैं, जिसमें एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और एक एंटी-न्यूट्रिनो में रूपांतरित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार तथा लवणों के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आयनिक यौगिकों में धनायन के आकार में वृद्धि और ऋणायन के आकार में कमी होने पर फजान के नियमों के अनुसार सहसंयोजक लक्षण (Covalent character) में वृद्धि होती है। 2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण (Electron-pair acceptors) करने की क्षमता रखते हैं, जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन-न्यून अणु जैसे $BF_3$ और धातु धनायन शामिल हैं। 3. जब एक दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट, $CH_3COONa$) का जल-अपघटन किया जाता है, तो जलीय विलयन ऋणात्मक आयनों के जल-अपघटन के कारण क्षारीय प्रकृति का हो जाता है। 4. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी संकल्पना के अनुसार, जल एक उभयधर्मी (Amphoteric) यौगिक की भाँति व्यवहार करता है, जो अम्ल और क्षार दोनों रूप में कार्य कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों, उनके मापन और विमीय विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक ($G$) का विमीय सूत्र $[M^{-1}L^3T^{-2}]$ होता है, और SI पद्धति में इसका मात्रक $\text{N m}^2 \text{kg}^{-2}$ है। 2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) की विमाएँ $[ML^{-1}T^{-1}]$ होती हैं, जो कि प्रतिबल (Stress) और वेग प्रवणता (Velocity Gradient) के अनुपात को व्यक्त करती हैं। 3. प्लांक स्थिरांक ($h$) और जड़त्वाघूर्ण (Moment of Inertia) का विमीय सूत्र पूर्णतः समान होता है, क्योंकि दोनों ऊर्जा के संचयन से संबंधित हैं। 4. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) और बल आघूर्ण (Torque) दोनों का SI मात्रक और विमीय सूत्र समान होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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