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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 136 Mock Tests Khelein
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मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों (विटामिन और खनिज) के जैव-रासायनिक कार्यों तथा उनके उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. थيامिन (विटामिन $B_1$) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट उपापचय में पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित करता है, और इसकी गंभीर कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है। 2. नियासिन (विटामिन $B_3$) का संश्लेषण मानव शरीर में ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल से हो सकता है, तथा इसकी कमी से पैलाग्रा रोग उत्पन्न होता है जिसके क्लासिक लक्षणों में डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया शामिल हैं। 3. एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन $C$) एक जल-विलेय एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलेजन फाइबर के हाइड्रॉक्सीलेशन (प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के) के लिए आवश्यक प्रो-कोलेजन हाइड्रोक्सिलाइज एंजाइम को सक्रिय रखता है, और इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है। 4. विटामिन A (रेटिनॉल) का मुख्य सक्रिय रूप '11-सिस-रेटिनॉल' है, जो आँखों की शलाकाओं (Rods) में मौजूद वर्णक 'रोडोप्सिन' का एक प्रमुख घटक है, और इसकी कमी से केवल 'रौंधी' (Night blindness) होती है, जबकि कॉर्निया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोनों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइटा (Bryophyta) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि इनमें जल और स्थल दोनों की आवश्यकता होती है, और इनका मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद) होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रकाशसंश्लेषण करता है, जबकि स्पोरोफाइट आंशिक रूप से पोषण के लिए गेमेटोफाइट पर निर्भर रहता है। 2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें 'PEP कार्बोक्सिलेज' एंजाइम द्वारा प्राथमिक $CO_2$ स्थिरीकरण बंडल शीथ कोशिकाओं में होता है और रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम उच्च $CO_2$ सांद्रता वाले सूक्ष्म वातावरण में कार्य करता है। 3. ऑक्सिन (Auxin / IAA) त्रेप्तोफैन अमीनो अम्ल से संश्लेषित होने वाला हार्मोन है जो पौधे में 'शीर्ष प्रमुखता' (Apical dominance) को प्रेरित करता है, तथा पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को रोकता है, जबकि साइटोकाइनिन इस प्रभाव का विरोध करते हुए पार्श्व शाखाओं के विकास को उत्तेजित करता है। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) मुख्य रूप से आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्व संधियन (Internode elongation) को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाता है, तथा यह बीजों के अंकुरण के दौरान 'एल्यूरॉन परत' में अल्फा-एमाइलेज एंजाइम के संश्लेषण को उत्प्रेरित करके स्टार्च के अपघटन को प्रेरित करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन स्थिरवैद्युत आकर्षण बलों द्वारा क्रिस्टल जालक में दृढ़ता से बंधे होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में वे विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन गति के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं। 2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकती हैं (अर्थात इलेक्ट्रॉन-न्यून), जबकि लुईस क्षार वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकती हैं, जैसे कि अमोनिया ($NH_3$)। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) का उदासीनीकरण प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ किया जाता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का होता है। 4. बफर विलयन वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल एवं सोडियम एसिटेट का मिश्रण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों, उनके सूक्ष्मजीवितीय कारकों तथा नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्षय रोग (Tuberculosis) के निदान के लिए किया जाने वाला 'मोंटौक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण (Skin test) है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के विरुद्ध सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी की उपस्थिति को दर्शाता है, किंतु यह सक्रिय संक्रमण और पूर्व टीकाकरण या पुरानी ठीक हो चुकी संक्रमण के बीच भेद करने में विफल रहता है। 2. एड्स (AIDS) के संपुष्टि (Confirmatory) परीक्षण के रूप में 'वेस्टर्न ब्लॉट' (Western blot) विधि का उपयोग किया जाता है, जिसमें वायरल प्रोटीन्स को जेल वैद्युतकणसंचलन (Gel electrophoresis) द्वारा अलग करके रोगी के सीरम में मौजूद विशिष्ट एंटीबॉडीज़ की पहचान की जाती है, 3. एन्टामोएबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) एक परजीवी प्रोटोजोआ है जो मनुष्य की बड़ी आंत में संक्रमण फैलाकर 'अमीबायसिस' या अमीबी पेचिश उत्पन्न करता है, और इसके गंभीर मामलों में यह आंतों की दीवार को भेदकर यकृत (Liver) में गंभीर फोड़ा (Liver abscess) भी बना सकता है। 4. टाइफाइड बुखार के परीक्षण के लिए प्रयुक्त 'विडाल परीक्षण' (Widal test) एक प्रतिजन-प्रतिपिंड (Antigen-Antibody) प्रतिक्रिया पर आधारित एग्लूटीनेशन परीक्षण है, जो 'साल्मोनेला टाइफी' के 'O' और 'H' एंटीजेंस का पता लगाता है, और संक्रमण के पहले सप्ताह में इसकी संवेदनशीलता शत-प्रतिशत सटीक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों, मात्रकों और उनकी विमाओं (Dimensions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पार्सैक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो कि एक ऐसी चाप की दूरी है जिसके द्वारा पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या (1 खगोलीय मात्रक) पर 1 आर्कसेकंड का कोण अंतरित होता है। 2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) और प्लांक नियतांक (Planck's constant) दोनों की विमाएँ (Dimensions) आपस में समान होती हैं। 3. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का विमीय सूत्र $[ML^0T^{-2}]$ होता है, तथा एसआई (SI) पद्धति में इसका मात्रक न्यूटन प्रति मीटर होता है। 4. किसी भौतिक राशि के मापन में होने वाली आपेक्षिक त्रुटि (Relative Error) का मान, माध्य निरपेक्ष त्रुटि और मापित मान के वास्तविक औसत के अनुपात द्वारा व्यक्त किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिका चक्र (Cell Cycle) और इसके नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोशिका चक्र की G1 से S प्रावस्था में संक्रमण (G1/S Checkpoint) का मुख्य नियंत्रण 'साइक्लिन-डिपेंडेंट किनेज' (CDK) और साइक्लिन के परिसरों द्वारा किया जाता है, तथा इस बिंदु पर डीएनए क्षति होने पर 'p53' प्रोटीन सक्रिय होकर चक्र को रोक देता है या एपोप्टोसिस को प्रेरित करता है। 2. सूत्री विभाजन (Mitosis) की मध्यावस्था (Metaphase) में 'स्पिंडल चेकपॉइंट' यह सुनिश्चित करता है कि सभी गुणसूत्रों के किनेटोकोर से तर्कु तंतु (Spindle fibers) ठीक प्रकार से जुड़े हैं या नहीं, जिसके बिना एनाफेज प्रावस्था में प्रवेश संभव नहीं होता। 3. कोलचिसिन (Colchicine) रसायन ट्यूबुलीन प्रोटीन के बहुलीकरण को बाधित करके तर्कु तंतुओं के निर्माण को रोकता है, जिससे कोशिका विभाजन एनाफेज अवस्था में रुक जाता है और यह द्विगुणित कोशिकाओं को बहुगुणित (Polyploidy) बनाने में सहायक होता है। 4. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान होमोलोगस क्रोमोसोम के बीच आनुवंशिक विनिमय (Crossing over) की प्रक्रिया 'लैप्टोटीन' (Leptotene) उप-अवस्था में होती है, जिसके लिए 'रेकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम अनिवार्य रूप से कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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संक्रमण धातुओं, उनके यौगिकों और धातुकर्म (Metallurgy) प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) अयस्क के सांद्रण के पश्चात प्रगलक (Smelting) प्रक्रिया के दौरान प्राप्त 'कॉपर मैट' (Copper matte) मुख्य रूप से $Cu_2S$ और $FeS$ का मिश्रण होता है, जिसे बेसीमेराइजेशन के दौरान सिलिका की उपस्थिति में ऑक्सीकृत करके फेरस सल्फाइड को फेरस सिलिकेट धातुमल ($FeSiO_3$) के रूप में अलग किया जाता है। 2. 'हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम' (Hall-Heroult process) द्वारा एल्युमिनियम के विद्युत अपघटनी निष्कर्षण में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के साथ घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से विलायक के रूप में कार्य करके एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने में सहायक होता है। 3. संक्रमण धातुओं और उनके आयनों द्वारा रंगीन यौगिक बनाने का मुख्य कारण आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, जिनमें d-d संक्रमण ($d-d$ transition) संभव होता है, किंतु जिंक आयन ($Zn^{2+}$) और स्कैंडियम आयन ($Sc^{3+}$) अपने पूर्णतः भरे हुए या रिक्त d-कक्षक के कारण रंगहीन (Colorless) होते हैं। 4. 'सफेद फॉस्फोरस' ($P_4$) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और वाष्पशील ठोस है जो अंधेरे में चमकता है (केमिलुमिनिसेंस) और इसे वायु में खुला छोड़ने पर यह स्वतः आग पकड़ लेता है, जबकि लाल फॉस्फोरस बहुलकीय संरचना के कारण कम क्रियाशील होता है और सामान्य ताप पर वायु में स्वतः प्रज्वलित नहीं होता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वाइन फ्लू (H1N1 इनफ्लूएंजा) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके संपुष्टि परीक्षण के लिए 'रियल-टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पॉलीमरेज चेन रिएक्शन' (rRT-PCR) विधि का उपयोग किया जाता है। 2. उपदंश (Syphilis) एक यौन संचारित बैक्टीरियल संक्रमण है जो 'ट्रेपोनेमा पैलिडम' नामक स्पिरोकीट जीवाणु के कारण होता है, और इसके निदान के लिए 'वीडीआरएल' (VDRL) परीक्षण किया जाता है। 3. डिप्थीरिया मुख्य रूप से 'कोरिबैक्टीरियम डिप्थिरिया' जीवाणु के संक्रमण से होता है, जिसमें बनने वाला एक्सोटॉक्सिन श्वास नली में एक स्रावी झिल्ली (Pseudomembrane) बनाता है, और इसकी संवेदनशीलता की जांच 'शिस परीक्षण' (Schick test) द्वारा की जाती है। 4. कुष्ठ रोग (Leprosy), जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, एक विषाणु जनित संक्रामक बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र और त्वचा को प्रभावित करती है, और इसके परीक्षण के लिए 'लीप्रोमिन परीक्षण' (Lepromin test) का उपयोग किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत ($\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{h}{4\pi}$) यह प्रतिपादित करता है कि किसी गतिमान सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ अत्यंत यथार्थता से निर्धारण करना असंभव है। 2. पाउلي का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's exclusion principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s, m$) का मान कभी भी सर्वसम नहीं हो सकता है, अर्थात् एक ही कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन विपरीत चक्रण (Spin) के साथ रह सकते हैं। 3. हुंड का अधिकतम बहुकता नियम (Hund's rule of maximum multiplicity) यह निर्देश देता है कि किसी उपकोश (Subshell) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता, जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ प्रवेश नहीं कर जाता। 4. मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) कक्षक के आकार और ऊर्जा को निर्धारित करती है, जबकि दिगंशी या azimuthal क्वांटम संख्या ($l$) कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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