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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test

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General Science ki taiyari ke liye 1368+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आयनिक यौगिकों के क्रिस्टल जालक में विपरीत आवेशित आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल कार्य करते हैं, जिसके कारण ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में इनके आयन गति के लिए स्वतंत्र हो जाने के कारण ये विद्युत का सुचालक बन जाते हैं। 2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल वे होते हैं जिनका आकार छोटा, धनात्मक आवेश उच्च और ध्रुवणनीयता कम होती है, तथा वे प्राथमिकता से कठोर क्षारों के साथ अधिक स्थायी और मजबूत यौगिक का निर्माण करते हैं। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल (जैसे एसिटिक अम्ल $CH_3COOH$) का उदासीनीकरण प्रबल क्षार (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड $NaOH$) के साथ किया जाता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का हो जाता है। 4. बफर विलयन वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$) एवं अमोनियम हाइड्रोक्साइड ($NH_4OH$) का मिश्रण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और उनके जैव-रासायनिक उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें यकृत और कंकाल पेशियों में संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-1-फास्फेट में अपघटन होता है, जिसे 'ग्लाइकोजन फास्फोराइलेज' एंजाइम उत्प्रेरित करता है। 2. ग्लूकोनियोजेनेसिस (Gluconeogenesis) के दौरान, गैर-कार्बोहाइड्रेट स्रोतों जैसे कि लैक्टेट, ग्लिसरोल और ग्लूकोजेनिक अमीनो अम्ल से ग्लूकोज का संश्लेषण होता है, जो मुख्य रूप से अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं में संपन्न होता है। 3. वसा अम्लों के बीटा-ऑक्सीडेशन (Beta-oxidation) की प्रक्रिया माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होती है, जिससे एसिटाइल-CoA के अणु बनते हैं जो सीधे क्रेब्स चक्र में प्रवेश करके एटीपी का उत्पादन करते हैं। 4. प्रोटीन कुपोषण के कारण होने वाले गंभीर विकार 'क्वाशियोकोर' (Kwashiorkor) में आहार में प्रोटीन और कुल कैलोरी दोनों की भीषण कमी होती है, जबकि 'मॅरास्मस' (Marasmus) में मुख्य रूप से केवल प्रोटीन की गंभीर कमी होती है और इसमें एडिमा (Edema) प्रमुख लक्षण के रूप में देखा जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन (Pachytene) उप-अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच खंडों के आदान-प्रदान के फलस्वरूप होती है। 2. इस जैव-रासायनिक प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए 'रेकॉम्बिनेज' (Recombinase) नामक विशिष्ट एंजाइम की सक्रियता अनिवार्य होती है, जो डीएनए स्ट्रैंड्स को काटने और पुनः जोड़ने का कार्य करता है। 3. जीन विनिमय के स्थल पर समजात गुणसूत्रों के बीच बनने वाली X-आकार की संरचनाओं को 'कियास्माटा' (Chiasmata) कहा जाता है, जिनका निर्माण पैकीटीन अवस्था में ही हो जाता है किंतु उनका स्पष्ट अंतर्संक्रमण और पृथक्करण डायकाइनेसिस (Diakinesis) अवस्था में समाप्त होता है। 4. क्रॉसिंग ओवर की आवृत्ति (Frequency) दो जीनों के बीच की भौतिक दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional) होती है, अर्थात् जितने पास जीन होंगे, क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के प्रकाश-स्वतंत्र चक्र (केल्विन चक्र) और पादप हार्मोनों की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) पादप जगत के पहले ऐसे स्थल पौधे हैं जिनमें वास्तविक संवहन ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, और इनका मुख्य पादप शरीर स्पोरोफाइट (बीजाणोद्भिद) होता है, जो जड़, तना और पत्तियों में विभेदित रहता है। 2. C3 पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान $CO_2$ का प्राथमिक स्थिरीकरण 'PEP कार्बोक्सिलेज' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे 4-कार्बन वाला यौगिक (ऑक्सालोएसेटिक एसिड) बनता है, जबकि C4 पौधों में यह कार्य रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम द्वारा 3-कार्बन यौगिक (PGA) के माध्यम से संपन्न होता है। 3. एथिलीन (Ethylene) एक गैसीय पादप हार्मोन है जो फलों के पकने (Fruit ripening) को प्रेरित करता है, तथा यह पादपों में 'ट्रिपल रिस्पांस' (शीर्ष की गोलाई, अनुप्रस्थ वृद्धि और क्षैतिज वृद्धि) को भी नियंत्रित करता है। 4. abscisic acid (ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है, क्योंकि यह जल की कमी की स्थिति में रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है और बीजों के प्रसुप्तिकरण (Seed dormancy) को बढ़ावा देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ सेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. भंवर धाराएँ (Eddy currents) किसी चालक के भीतर तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction furnace) में धातुओं को पिघलाने तथा चुंबकीय ब्रेक (Magnetic braking) प्रणालियों में किया जाता है। 4. किसी धारावाही परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता उसके सिरों पर अधिकतम होती है और केंद्र की ओर जाने पर घटती जाती है, तथा यह क्षेत्र परिनालिका की त्रिज्या पर निर्भर करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भूस्थिर उपग्रहों (Geostationary Satellites) और ध्रुवीय उपग्रहों (Polar Satellites) की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक ऐसी कक्षा में स्थापित किए जाते हैं जहाँ उनका परिक्रमण काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल (ठीक 24 घंटे) के बराबर होता है और उनकी परिक्रमा की दिशा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर होती है। 2. ध्रुवीय उपग्रह बहुत कम ऊँचाई (लगभग 500 से 800 किमी) पर चक्कर लगाते हैं और इनकी कक्षा उत्तर-दक्षिण दिशा में होती है, जिससे ये पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुवों के ऊपर से गुजरते हुए पूरे ग्लोब का रिमोट सेंसिंग और मौसम पूर्वानुमान के लिए प्रेक्षण करते हैं। 3. तुल्यकालिक कक्षा (Synchronous Orbit) में घूमते हुए किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital velocity), भूस्थिर कक्षा के उपग्रह की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इसकी ऊँचाई भूस्थिर उपग्रह की तुलना में कम होती है। 4. किसी उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करना बंद कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों का त्वरण शून्य हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) के पश्च भाग (Neurohypophysis) से स्रावित होने वाला 'ऑक्सीटोसिन' (Oxytocin) हार्मोन प्रसव के दौरान गर्भाशय की चिकनी पेशियों के संकुचन को प्रेरित करता है तथा स्तन ग्रंथियों से दुग्ध निष्कासन (Milk ejection) को नियंत्रित करता है। 2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का मेडुला भाग 'एपिनेफ्रिन' और 'नॉरएपिनेफ्रिन' हार्मोन स्रावित करता है, जिन्हें 'आपातकालीन हार्मोन' या 'फ्लाइट और फाइट' (Fight or Flight) प्रतिक्रिया का संचालक कहा जाता है। 3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है, जबकि पैराथायराइड हार्मोन (PTH) रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को कम करता है। 4. अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं, जो यकृत और कंकाल पेशियों में ग्लाइकोजेनिएसिस (Glycogenesis) की प्रक्रिया को बढ़ावा देकर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव शरीर में पोषण और जैव-रासायनिक उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राइबोफ्लेविन (विटामिन $B_2$) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'फ्लैविन एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड' (FAD) और 'फ्लैविन मोनोन्यूक्लियोटाइड' (FMN) है, जो क्रेब्स चक्र के दौरान सक्सीनेट डीहाइड्रोजनेज एंजाइम को उत्प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2. साइनोकोबालामिन (विटामिन $B_{12}$) में कोबाल्ट धातु आयन उपस्थित होता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पार्श्व कोशिकाओं (Parietal cells) द्वारा स्रावित 'इन्ट्रींसिक फैक्टर' (Intrinsic factor) अनिवार्य होता है। 3. एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन $C$) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन संश्लेषण के दौरान प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए उत्तरदायी प्रो-कोलेजन हाइड्रोक्सिलाइज एंजाइम को अपचयित अवस्था (Reduced state) में बनाए रखता है। 4. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक जल-विलेय विटामिन है जिसका संश्लेषण सूर्य के पराबैंगनी विकिरणों द्वारा त्वचा में होता है, और यह आंत से कैल्शियम तथा फॉस्फेट के अवशोषण को पूरी तरह से रोकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का कारण अणुओं के बीच लगने वाला ससंजक बल (Cohesive force) है, और तापमान बढ़ाने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है, जबकि घुलनशील अशुद्धियाँ मिलाने पर यह बढ़ भी सकता है। 2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह गुण है जिसके कारण द्रव की विभिन्न परतें अपनी ही परतों के बीच होने वाली相対 गति का विरोध करती हैं, और गैसों में श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है जबकि द्रवों में ताप बढ़ने पर बढ़ती है। 3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, और वस्तु के तैरने के लिए वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से अधिक होना चाहिए। 4. केशिकत्व (Capillarity) की घटना पृष्ठ तनाव के कारण होती है, जिसके अंतर्गत यदि काँच की किसी नली को जल में डुबोया जाए तो जल नली में ऊपर चढ़ जाता है क्योंकि जल और काँच के बीच का आसंजक बल (Adhesive force), जल के ससंजक बल की तुलना में अधिक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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एलकेन्स (Alkanes) के रासायनिक गुणों और उनके निर्माण की विधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वुर्ट्ज अभिक्रिया (Wurtz reaction) के दौरान जब एल्किल हैलाइड की अभिक्रिया शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ कराई जाती है, तो उच्च सममितीय (Symmetrical) एल्केन प्राप्त होते हैं, किंतु इस विधि द्वारा विषम कार्बन परमाणुओं वाले एल्केन का उच्च शुद्धता के साथ उत्पादन नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें उप-उत्पाद के रूप में विभिन्न एल्केन्स का मिश्रण प्राप्त होता है। 2. डीकार्बोक्सिलेशन (Decarboxylation) प्रक्रिया में सोडियम कार्बोक्सिलेट लवण को सोडालाइम (NaOH और CaO का मिश्रण) के साथ गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप मूल कार्बोक्सिलेट अणु की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम वाला एल्केन (जैसे मीथेन) प्राप्त होता है। 3. एल्केन्स को 'पैराफिन' (Paraffins) भी कहा जाता है, जिसका लैटिन में अर्थ 'कम सक्रियता' होता है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में ये अम्ल, क्षार, ऑक्सीकारकों और अपचायकों के प्रति निष्क्रिय होते हैं, किंतु सूर्य के प्रकाश की विसरित उपस्थिति में ये हैलोजनीकरण (Halogenation) की मुक्त मूलक (Free radical) प्रतिस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करते हैं। 4. कोल्बे की विद्युत अपघटनी विधि (Kolbe's electrolytic method) द्वारा सोडियम या पोटेशियम कार्बोक्सिलेट के जलीय विलयन का विद्युत अपघटन करने पर एनोड पर केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन और ऐल्काइन) प्राप्त होते हैं, जबकि कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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