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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test

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General Science ki taiyari ke liye 1368+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

🎯 136 Mock Tests Khelein

यूकेरियोटिक कोशिका चक्र के नियमन (Regulation of Cell Cycle) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोशिका चक्र के विभिन्न चरणों (जैसे G1, S, G2 और M) के बीच सुचारू संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए 'साइक्लीन-डिपेंडेंट किनेसेस' (CDKs) और 'साइक्लीन' (Cyclins) प्रोटीन उत्तरदायी होते हैं, जिनमें सीडीके का स्तर पूरे चक्र के दौरान स्थिर रहता है जबकि साइक्लीन की सांद्रता आवधिक रूप से उतार-चढ़ाव करती है। 2. 'M-फेज प्रमोटिंग फैक्टर' (MPF) मुख्य रूप से साइक्लीन B और CDK1 का एक सक्रिय कॉम्प्लेक्स है, जो G2 प्रावस्था से समसूत्री विभाजन (Mitosis) में प्रवेश को प्रेरित करता है तथा केंद्रक झिल्ली के विखंडन और क्रोमोसोम संघनन को बढ़ावा देता है। 3. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के पैचिटीन (Pachytene) चरण के दौरान, समझात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है, और यह प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनैज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है। 4. एनाफेज-प्रमोटिंग कॉम्प्लेक्स (APC/C) एक E3 यूबिक्विटिन लाइगेज है, जो मेटाफेज से एनाफेज में संक्रमण को नियंत्रित करता है, और इसके सक्रिय होने पर यह सिक्यूरिन प्रोटीन को विघटित कर देता है, जिससे सेपरेस (Separase) एंजाइम सक्रिय होकर सिस्टर क्रोमैटिड्स को अलग करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव शरीर में जैविक अणुओं और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपापचय तथा उनकी रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पाइरिडॉक्सिन (विटामिन $B_6$) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'पाइरिडॉक्सल फॉस्फेट' (PLP) अमीनो अम्लों के ट्रांसमिनेशन, डीकार्बोक्सिलेशन और रासेमीकरण जैसी प्रतिक्रियाओं के लिए अनिवार्य रूप से उत्तरदायी होता है। 2. साइनोकोबलामिन (विटामिन $B_{12}$) में कोबाल्ट धातु आयन कोरिन रिंग प्रणाली के केंद्र में स्थित होता है, और यह मुख्य रूप से मेथिलीन-टेट्राहाइड्रोफोलेट रिडक्टेस के साथ मिलकर डीएनए संश्लेषण के लिए आवश्यक थाइमीडिलाइट सिंथेस को सीधे उत्प्रेरित करता है। 3. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन $C$) कोलेजन तंतुओं के हाइड्रॉक्सीलेशन (प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के) के लिए आवश्यक प्रोलील हाइड्रॉक्सीलेज़ एंजाइम में उपस्थित आयरन ($Fe^{2+}$) को अपचयनित अवस्था में बनाए रखने वाला एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। 4. बायोटिन (विटामिन $B_7$) विभिन्न कार्बोक्सिलेज एंजाइमों (जैसे एसिटाइल-CoA कार्बोक्सिलेज) के लिए एक सह-एंजाइम के रूप में कार्य करता है, जो एटीपी-निर्भर प्रतिक्रियाओं में बाइकार्बोनेट आयन ($HCO_3^-$) के स्थानांतरण और कार्बन डाइऑक्साइड के स्थिरीकरण को सुगम बनाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में क्रमिक कमी आती है, किंतु हैलोजन तत्वों की तुलना में उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) की वांडर वाल्स त्रिज्या काफी बड़ी होती है क्योंकि उनकी त्रिज्या का निर्धारण वांडर वाल्स बलों के आधार पर होता है। 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी तत्वों के लिए ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में ऑक्सीजन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान सल्फर से अधिक होता है। 3. पोलिंग पैमाने के अनुसार आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युतऋणात्मकता फ्लोरीन की होती है, और किसी परमाणु की विद्युतऋणात्मकता केवल उसकी इलेक्ट्रॉन बंधुता पर निर्भर करती है, न कि उसकी ऑक्सीकरण अवस्था पर। 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) का मुख्य कारण $4f$ कक्षकों का अत्यधिक और प्रभावी परिरक्षण (Shielding effect) प्रभाव है, जिसके परिणामस्वरूप 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों का आकार 3d और 4d श्रेणियों के तत्वों की तुलना में बहुत अधिक हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की सूक्ष्म कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय की मुख्य कोशिकाएँ (Chief cells या Peptic cells) निष्क्रिय पेप्सिनोजेन का स्रावण करती हैं, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित होता है, और यह प्रोटीनों को प्रोटीोज, पेप्टोन और डाइपेप्टाइड्स में जल-अपघटित करता है। 2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन के दौरान बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ (External intercostal muscles) और डायाफ्राम के संकुचन से वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतरापोषीय दाब वायुमंडलीय दाब से कम हो जाता है और वायु फेफड़ों के अंदर प्रवाहित होती है। 3. हृदय के चालन तंत्र में विद्युत आवेगों की शुरुआत एट्रियोवेंट्रिकल (AV) नोड से होती है, जिसे हृदय का प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, और यह आवेग बंडल ऑफ हिस से होते हुए सिनोट्रायल (SA) नोड तक पहुँचता है। 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग 'हाइपोथैलेमस' भूख, प्यास, शरीर के तापमान और दैहिक लय (Circadian rhythm) के नियमन के साथ-साथ पीयूष ग्रंथि के स्रावण को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की उन्नत कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय की 'पैरीटाल याऑक्सिंटिक कोशिकाएँ' (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो आंत में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है। 2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन के दौरान बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों और डायाफ्राम का संकुचन वक्षीय गुहा के आयतन को कम करता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतरापोषीय दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है और वायु बाहर प्रवाहित होती है। 3. हृदय के चालन तंत्र में विद्युत आवेगों की शुरुआत सिनोट्रायल (SA) नोड से होती है, जिसे हृदय का प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, और यह आवेग एट्रियोवेंट्रिकल (AV) नोड, बंडल ऑफ हिस तथा पर्किंजे तंतुओं से होते हुए निलयों के संकुचन को प्रेरित करता है। 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अंतर्गत 'मस्तिष्क आवरण' (Meninges) की सबसे बाहरी और कठोर परत 'ड्यूरा मेटर' (Dura mater) होती है, और प्रमस्तिष्क (Cerebrum) का 'लिम्बिक तंत्र' (Limbic system) भावनाओं, स्मृति और प्रेरणा के नियमन में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर उपस्थित ABO प्रतिजन (Antigens) ग्लाइकोस्फिंगोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जिनका निर्माण विशिष्ट ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा होता है, जिन्हें 'ABO' जीन द्वारा नियंत्रित किया जाता है। 2. 'बॉम्बे फिनोटाइप' ($O_h$) से ग्रस्त व्यक्तियों के प्लाज्मा में सामान्य प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के अतिरिक्त एक विशिष्ट और आक्रामक 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति से रक्त नहीं ले सकते हैं। 3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) पिता और एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) माता से दूसरी बार गर्भधारण होता है, क्योंकि प्रथम प्रसव के समय माँ के शरीर में बनी IgG प्रकार की एंटी-Rh एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार करके भ्रूण की RBCs को नष्ट कर देती हैं। 4. रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की बाह्य प्रणाली (Extrinsic pathway) की शुरुआत तब होती है जब रक्त वाहिका की आंतरिक एंडोथेलियल क्षति के कारण संपर्क कारक (Contact factor या Factor XII) सीधे उपकला के नीचे कोलेजन तंतुओं के संपर्क में आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और ABO तथा Rh रक्त समूह प्रणालियों के सूक्ष्म जैव-रासायनिक एवं immunotoxicolgical संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, रक्त समूह 'A' और 'B' के व्यक्तियों के प्लाज्मा में क्रमशः 'एंटी-B' और 'एंटी-A' एंटीबॉडी पाई जाती हैं, जो कि मुख्य रूप से IgM प्रकार की इम्युनोग्लोबुलिन होती हैं, और इनका आणविक आकार बड़ा होने के कारण ये प्लेसेंटा (अपरा) को पार करके गर्भस्थ शिशु तक नहीं पहुँच सकती हैं। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H-एंटीजन' का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 (Fucosyltransferase 1) जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके प्लाज्मा में एंटी-A, एंटी-B के साथ-साथ एक शक्तिशाली 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी प्राकृतिक रूप से उपस्थित होती है। 3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) पिता और एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) माता से उत्पन्न होने वाला पहला शिशु Rh-धनात्मक होता है, और प्रसव के दौरान माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडी का निर्माण होता है। 4. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया में कैल्शियम आयन ($Ca^{2+}$) एक आवश्यक सह-कारक के रूप में कार्य करता है, जो प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने तथा फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में बहुलीकृत करने के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के जैव-रासायनिक चक्रों और पादप हार्मोन्स की अंतःक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को 'पादप जगत का उभयचर' (Amphibians of the plant kingdom) कहा जाता है क्योंकि इन्हें अपने यौन प्रजनन के लिए जल की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और इनके जीवन चक्र में प्रमुख स्वतंत्र अवस्था युग्मकोद्भिद् (Gametophyte) होती है जो बीजाणुद्भिद् (Sporophyte) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर करती है। 2. $C_4$ पादपों में प्रकाश संश्लेषण की 'हच-स्लैग मार्ग' (Hatch-Slack pathway) प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक स्थिरीकरण पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में फॉस्फोएनोलपाइरुवेट (PEP) कार्बोक्सिलेज एंजाइम द्वारा होता है, जिससे 4-कार्बन यौगिक ऑक्सोएसेटिक अम्ल (OAA) का निर्माण होता है। 3. 'केलविन चक्र' ($C_3$ चक्र) के दौरान कार्बोक्सिलेशन, अपचयन (Reduction) और रीजेनरेशन (Regeneration) के चरणों में, ग्लूकोज के एक अणु के शुद्ध निर्माण के लिए एटीपी (ATP) और एनएडीपीएच (NADPH) की आवश्यकता होती है, जिसमें प्रत्येक $CO_2$ के स्थिरीकरण हेतु 3 एटीपी और 2 एनएडीपीएच का उपभोग होता है। 4. जिबरेलिन ($GA_3$) और ऑक्सिन पादप हार्मोन्स एक-दूसरे के विरोधी (Antagonistic) रूप में कार्य करते हुए बीज प्रसुप्तति (Seed dormancy) को बनाए रखते हैं और पर्णपाती वृक्षों में विलगन (Aleurone layer) को प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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केपलर के ग्रहों की गति के नियमों और उपग्रहों की कक्षीय गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केपलर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत गति करते हुए किसी ग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिससे ग्रह सूर्य के निकट होने पर अधिक तीव्र गति से चलता है। 2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है और उसे अनंत तक भेजने के लिए बाह्य ऊर्जा की आवश्यकता होगी। 3. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है, और यह उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन दिशा के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में परिक्रमण करता है। 4. किसी उपग्रह के अंदर स्थित अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण (गुरुत्वीय त्वरण) से मुक्त पतन की स्थिति में होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि किसी सूक्ष्म कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) की स्थिति और संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, तथा इनका अनिश्चितता गुणनफल $\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{h}{4\pi}$ होता है। 2. पाउली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s, m$) का मान कभी भी सर्वसम नहीं हो सकता है, अर्थात् एक कक्षक में विपरीत चक्रण (Spin) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। 3. बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में कक्षकों की ऊर्जा का निर्धारण करने के लिए 'आफबाऊ सिद्धांत' के साथ-साथ (n + l) नियम का उपयोग किया जाता है, जिसके अनुसार जिस कक्षक के लिए (n + l) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा अधिक होती है। 4. हुंड का अधिकतम बहुकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि उपकोशों ($p, d, f$) में कक्षकों का युग्मन (Pairing) तब तक प्रारंभ नहीं होता जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ न भर जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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