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Civil services — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 257 Mock Tests Khelein
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language - अनुच्छेद 343 से 351) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी, और संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (1, 2, 3...) होगा, किंतु राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए हिंदी भाषा के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा के या देवनागरी रूप के अतिरिक्त अंकों के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकते हैं। 2. अनुच्छेद 348 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, और किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, राज्य के उच्च न्यायालय की कार्रवाइयों में हिंदी भाषा या उस राज्य में राजकीय प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है। 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों के माध्यम से बढ़ाया गया, और वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ शामिल हैं, जिनमें 'अंग्रेजी' भाषा भी एक आधिकारिक क्षेत्रीय भाषा के रूप में सम्मिलित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) देश के सभी शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक दीर्घकालिक, समयबद्ध और राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है, जिसका लक्ष्य 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर ($PM_{2.5}$ और $PM_{10}$) सांद्रता में 2017 के आधार वर्ष की तुलना में 20-30% की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके 2026 तक 40% की कमी का लक्ष्य कर दिया गया है। 2. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत स्थापित 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) देश भर में परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (Ambient Air Quality Standards) को निर्धारित करने और निगरानी करने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत शीर्ष निकाय है। 3. 'राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक' (AQI) को भारत में कुल आठ प्रमुख प्रदूषकों - जैसे कि $PM_{2.5}$, $PM_{10}$, $NO_2$, $SO_2$, $CO$, $O_3$, $NH_3$, और सीसा (Pb) - के आधार पर एक एकल संख्या, रंग कोड और वर्णन के रूप में वायु की गुणवत्ता को दर्शाने के लिए जारी किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' के अंतर्गत 'पंचायती राज' (Panchayats - अनुच्छेद 243 से 243-O) तथा '73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिस राज्य की जनसंख्या बीस लाख से अधिक नहीं है, वह राज्य मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन न करने का विकल्प चुन सकता है। 2. 73वें संशोधन अधिनियम के तहत प्रत्येक पंचायत में महिलाओं के लिए सभी सीटों पर कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित होना अनिवार्य किया गया है, और यह आरक्षण केवल प्रत्यक्ष रूप से चुने जाने वाले स्थानों तक सीमित है, अध्यक्ष (Chairperson) के पदों पर लागू नहीं होता है। 3. राज्य का वित्त आयोग (State Finance Commission) हर पाँच वर्ष में राज्यपाल को यह संस्तुति करता है कि राज्य द्वारा एकत्रित करों, शुल्कों, टोल और फीसों के शुद्ध आगमों को पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच किस प्रकार विभाजित किया जाए तथा पंचायतों को दिए जाने वाले अनुदानों के लिए कौन से सिद्धांत निर्धारित किए जाएँ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) तथा उनसे संबंधित विभिन्न संशोधनों और न्यायिक निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39A के अंतर्गत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' (Equal Justice and Free Legal Aid) का प्रावधान मूल संविधान में नहीं था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, और इसके क्रियान्वयन के लिए संसद ने 'विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987' (Legal Services Authorities Act, 1987) अधिनियमित किया था। 2. अनुच्छेद 48A, जो पर्यावरण का संरक्षण तथा संवोधन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा से संबंधित है, को भी 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा ही नीति निर्देशक तत्वों में शामिल किया गया था, जबकि इसी संशोधन के माध्यम से शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया था। 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में एक नया खंड (2) जोड़ा गया, जिसके तहत राज्य को विशिष्ट रूप से यह निर्देश दिया गया कि वह आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम से कम करने का प्रयास करे। 4. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान की नींव 'मूल अधिकार' और 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' दोनों के संतुलन पर टिकी हुई है, और यदि मूल अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 14 और 19) को प्रभावी बनाने के लिए अनुच्छेद 39(b) या 39(c) के नीति निर्देशक तत्वों को प्राथमिकता दी जाती है, तो ऐसा कानून अनुच्छेद 14 या 19 के उल्लंघन के आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329) तथा निर्वाचन आयोग से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार संसद, राज्य के विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग में निहित है, और मूल संविधान में यह एक बहु-सदस्यीय निकाय था जिसे बाद में 1989 में एकल-सदस्यीय बनाया गया था। 2. मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है। 3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की सेवा की शर्ते और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती है, और संविधान ने निर्वाचन आयोग के सदस्यों के लिए कोई निश्चित कार्यकाल या सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित नहीं की है, बल्कि यह संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर निर्भर करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'भारत का महान्यायवादी' (Attorney-General for India - अनुच्छेद 76) तथा 'महाधिवक्ता' (Advocate-General - अनुच्छेद 165) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह व्यक्ति महान्यायवादी नियुक्त होने के लिए अर्हित होगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह है, तथा संविधान ने महान्यायवादी के लिए कोई निश्चित पदावधि (Term of office) निर्धारित नहीं की है। 2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों तथा संसद की किसी भी समिति में, जिसका वह सदस्य नामित किया गया हो, बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु उसे मतदान का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता है। 3. राज्य स्तर पर महाधिवक्ता (Advocate-General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, और महान्यायवादी की तरह ही महाधिवक्ता को भी राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों (जहाँ द्विसदनीय व्यवस्था है) या समितियों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, तथा उसे भी विधानमंडल में मतदान करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'संघ और राज्यों के बीच प्रशासनिक संबंध' (Administrative Relations - अनुच्छेद 256 से 263) तथा अखिल भारतीय सेवाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, और संघ की कार्यकारी शक्ति राज्य को ऐसे निर्देश देने तक विस्तारित है जो इस प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हों। 2. अनुच्छेद 312 के अंतर्गत संसद को राज्यसभा द्वारा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित संकल्प के आधार पर संघ और राज्यों के लिए एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) का सृजन करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तथा भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को इस अनुच्छेद के तहत संवैधानिक रूप से सीधे मान्यता प्राप्त थी, जबकि भारतीय वन सेवा (IFoS) को बाद में 1966 में इस श्रेणी में जोड़ा गया। 3. अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) की स्थापना कर सकता है, जिसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच विवादों की जाँच करना, उन पर सलाह देना तथा ऐसे विषयों पर चर्चा करना है जिनमें संघ और राज्यों अथवा दो या अधिक राज्यों के सामान्य हित हैं, और यह परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक' (Comptroller and Auditor-General of India - CAG - अनुच्छेद 148 से 151) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है, और अपना पद छोड़ने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद (Office of profit) धारण करने के लिए पात्र होता है, बशर्ते इसके लिए संसद या संबंधित राज्य विधानमंडल द्वारा विशेष अनुमति प्रदान की गई हो। 3. अनुच्छेद 151 के अनुसार CAG संघ के खातों से संबंधित अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्टों को राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाया जाता है, तथा राज्य के खातों से संबंधित उसकी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी जाती है, जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights - अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'न्यायिक पुनर्वलोकन' से संबंधित 'अनुच्छेद 13' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13(2) के अनुसार राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनता है या न्यून करता है, और इस प्रकार बनाया गया प्रत्येक कानून उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगा। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत संसद द्वारा किया गया कोई भी संवैधानिक संशोधन 'अनुच्छेद 13(3) में प्रयुक्त 'विधि' (Law) शब्द के अंतर्गत शामिल होता है, जिसके कारण मूल अधिकारों को संशोधित करने वाले संशोधन अधिनियमों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'गोलकनाथ वाद (1967)' में यह निर्णय दिया था कि संसद को मूल अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति नहीं है क्योंकि संविधान संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' के दायरे में आते हैं, जिसे बाद में 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा निष्प्रभावी कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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