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क्वांटम यांत्रिकी और आधुनिक भौतिकी के मूल सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. डी ब्रॉली की परिकल्पना के अनुसार गतिमान कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) एक तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, जिसकी तरंगदैर्ध्य संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा केवल सूक्ष्म कणों तक सीमित न होकर स्थूल (macroscopic) वस्तुओं के लिए भी सैद्धांतिक रूप से लागू होती है।
  2. 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की आइंस्टीन द्वारा की गई व्याख्या यह सिद्ध करती है कि प्रकाश ऊर्जा के विविक्त पैकेटों (फोटॉनों) के रूप में संचरित होता है, तथा उत्सर्जित photoelectron की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की तीव्रता (Intensity) पर निर्भर करती है।
  3. 3. कॉम्पटन प्रभाव (Compton Effect) एक्स-किरणों और इलेक्ट्रॉनों के बीच अप्रत्याशित प्रकीर्णन को दर्शाता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि फोटॉन में न केवल ऊर्जा होती है बल्कि संवेग भी होता है, जो प्रकाश के कण स्वरूप (Particle nature) की पुष्टि करता है।
  4. 4. किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन का चक्रण (Spin) और उसका कक्षीय कोणीय संवेग क्वांटम संख्याओं द्वारा निर्धारित होते हैं, जहाँ 'चुंबकीय क्वांटम संख्या' कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: डी ब्रॉली समीकरण $\lambda = h/p$ के अनुसार प्रत्येक गतिमान कण से एक तरंग जुड़ी होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य उसके संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। यह सिद्धांत सभी द्रव्यों पर लागू होता है, यद्यपि स्थूल वस्तुओं के लिए तरंगदैर्ध्य इतनी सूक्ष्म होती है कि उसका प्रायोगिक प्रेक्षण असंभव होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रकाश विद्युत प्रभाव में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की 'आवृत्ति' (Frequency) पर निर्भर करती है, न कि उसकी तीव्रता (Intensity) पर। तीव्रता बढ़ाने से केवल उत्सर्जित होने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या (प्रवाह) बढ़ती है, उनकी गतिज ऊर्जा नहीं। कथन 3 सही है: कॉम्पटन प्रभाव में उच्च आवृत्ति के फोटॉनों का इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्रकीर्णन होता है, जिससे तरंगदैर्ध्य में वृद्धि (Compton shift) होती है; यह घटना फोटॉन के कण स्वभाव और उसके संवेग को प्रमाणित करती है। कथन 4 सही है: चुंबकीय क्वांटम संख्या ($m_l$) अंतरिक्ष में कक्षक के विशिष्ट अभिविन्यास (Spatial orientation) को निरूपित करती है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, आधुनिक भौतिकी इन सिद्धांतों पर आधारित है। अतः सही विकल्प (b) है।
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