General Science
Asked 8 hours ago · Viewed 1 times
भौतिक राशियों, मात्रकों और मापन की त्रुटियों (Errors in Measurement) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी भौतिक राशि के माप में दो या दो से अधिक राशियों को गुणा या भाग किया जाता है, तो आपेक्षिक त्रुटियाँ (Relative errors) जुड़ जाती हैं, अर्थात् यदि $Z = \frac{A^2 B}{C}$ हो, तो अधिकतम आल्पतम (fractional) त्रुटि $\frac{\Delta Z}{Z} = 2\left(\frac{\Delta A}{A}\right) + \frac{\Delta B}{B} + \frac{\Delta C}{C}$ होगी।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, भौतिक राशियों के मापन में 'यथार्थता' (Accuracy) यह दर्शाती है कि किसी माप का मान उसके वास्तविक या सत्य मान के कितना समीप है, जबकि 'परिशुद्धता' (Precision) इस बात को स्पष्ट करती है कि विभिन्न प्रेक्षणों के मान एक-दूसरे के कितने समीप हैं।
- 3. विमीय विश्लेषण की विधि का उपयोग करके किसी भी भौतिक समीकरण की सत्यता की जाँच की जा सकती है, परंतु यदि कोई समीकरण विमीय रूप से सही है, तो यह पूर्ण रूप से निश्चित है कि वह भौतिक रूप से भी शत-प्रतिशत सही होगा।
- 4. पार्सैक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी प्रायोगिक इकाई है, जो कि उस चाप की लंबाई है जिस पर एक खगोलीय इकाई (AU) का चाप किसी बिंदु पर एक चाप सेकंड (1 arcsec) का कोण अंतरित करता है, और यह लगभग $3.26$ प्रकाश वर्ष के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि गुणन या भाग की स्थिति में आपेक्षिक (fractional) त्रुटियाँ हमेशा जुड़ जाती हैं और घातों को गुणा के रूप में लिखा जाता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार कथन 2 भी पूर्णतः सत्य है; यथार्थता सत्य मान के निकटता को दर्शाती है जबकि परिशुद्धता मापन के विभेदन (resolution) या एकरूपता को दर्शाती है। कथन 3 गलत है क्योंकि विमीय रूप से सही समीकरण (उदाहरण के लिए $s = vt + \frac{1}{2}at^3$) भौतिक रूप से गलत हो सकता है (यहाँ सही समीकरण $s = ut + \frac{1}{2}at^2$ है)। विमीय सत्यता केवल एक आवश्यक प्रतिबंध है, पर्याप्त नहीं। कथन 4 सही है, पार्सैक दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है और 1 पार्सैक $\approx 3.26$ प्रकाश वर्ष होता है। अतः सही विकल्प (a) है।
अगला प्रश्न →
विद्युत परिपथों, सेल के आंतरिक प्रतिरोध और किचहॉफ के नियमों के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में…
Related Questions
→
क्वांटम यांत्रिकी और आधुनिक भौतिकी के मूल सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डी ब्रॉली की परिकल्पना के अनुसार गतिमान कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) एक तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, जिसकी तरंगदैर्ध्य संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा केवल सूक्ष्म कणों तक सीमित न होकर स्थूल (macroscopic) वस्तुओं के लिए भी सैद्धांतिक रूप से लागू होती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की आइंस्टीन द्वारा की गई व्याख्या यह सिद्ध करती है कि प्रकाश ऊर्जा के विविक्त पैकेटों (फोटॉनों) के रूप में संचरित होता है, तथा उत्सर्जित photoelectron की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की तीव्रता (Intensity) पर निर्भर करती है।
3. कॉम्पटन प्रभाव (Compton Effect) एक्स-किरणों और इलेक्ट्रॉनों के बीच अप्रत्याशित प्रकीर्णन को दर्शाता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि फोटॉन में न केवल ऊर्जा होती है बल्कि संवेग भी होता है, जो प्रकाश के कण स्वरूप (Particle nature) की पुष्टि करता है।
4. किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन का चक्रण (Spin) और उसका कक्षीय कोणीय संवेग क्वांटम संख्याओं द्वारा निर्धारित होते हैं, जहाँ 'चुंबकीय क्वांटम संख्या' कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव शरीर में जैविक अणुओं, विटामिनों और पोषण (Nutrition and Vitamins) के जैव-रासायनिक महत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वसा में घुलनशील विटामिन 'के' (Vitamin K) प्रोथ्रॉम्बिन और अन्य रक्त स्कंदन कारकों के यकृत में संश्लेषण के लिए एक आवश्यक सह-कारक (Cofactor) के रूप में कार्य करता है, तथा इसकी कमी से रक्त का थक्का जमने का समय बढ़ जाता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, जल में घुलनशील विटामिन बी-12 (सायन्कोकोबलामिन) का अवशोषण आमाशय की पार्श्व (पारीय) कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'आंतरिक कारक' (Intrinsic Factor) की उपस्थिति के बिना प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता है।
3. कार्बोहाइड्रेट चयापचय के दौरान, पाचक एंजाइम 'एमाइलेज' केवल अल्फा-1,4 ग्लाइकोसिडिक बंधों को तोड़ता है, जिसके कारण स्टार्च के पाचन से ग्लूकोज के साथ-साथ 'आइसोमल्टोस' और 'अशाखित डेक्सट्रिन' भी बनते हैं, जिनका पाचन क्षुद्रांत में उपस्थित माल्टेज और आइसोमाल्टेज द्वारा होता है।
4. प्रोटीन संरचना के संदर्भ में, प्रोटीनों का द्वितीयक ढांचा (Secondary structure) पेप्टाइड श्रृंखलाओं के बीच हाइड्रोजन बंधों के स्थिर विन्यास के कारण बनता है, जिसमें अल्फा-हेलिक्स और बीटा-प्लीटेड शीट संरचनाएं प्रमुख हैं, और यह संरचना तापमान या pH में परिवर्तन से विकृत (Denature) हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
→
ऊष्मागतिकी का कौन सा नियम एंट्रॉपी की अवधारणा देता है?
→
प्रकाश की चाल सर्वाधिक किस माध्यम में होती है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.