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विद्युत परिपथों, सेल के आंतरिक प्रतिरोध और किचहॉफ के नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी विद्युत सेल का आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance) सेल के भीतर इलेक्ट्रोलाइट द्वारा धारा के प्रवाह में उत्पन्न अवरोध है, और जब सेल से कोई विद्युत धारा खींची जाती है (निःसृजन के दौरान), तो इसका टर्मिनल विभवांतर (Terminal Voltage) इसके विद्युत वाहक बल (EMF) से अधिक होता है।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, किचहॉफ का द्वितीय नियम (पाश नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
- 3. जब विभिन्न प्रतिरोधों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के किसी भी व्यक्तिगत न्यूनतम प्रतिरोध के मान से भी कम होता है, तथा प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर समान रहता है।
- 4. अधिकतम शक्ति प्रमेय (Maximum Power Transfer Theorem) के अनुसार, किसी स्रोत से बाह्य प्रतिरोध को अधिकतम शक्ति तब स्थानांतरित होती है जब बाह्य प्रतिरोध का मान स्रोत के आंतरिक प्रतिरोध के ठीक आधे के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि जब किसी सेल से विद्युत धारा खींची जाती है (यानी सेल का निःसृजन होता है), तो उसका टर्मिनल विभवांतर $V = E - Ir$ होता है, जिसका अर्थ है कि टर्मिनल विभवांतर विद्युत वाहक बल (EMF, $E$) से **कम** होता है, अधिक नहीं। कथन 2 सही है; किचहॉफ का पाश नियम (KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यह नियम बंद लूप में विभव पतन और स्रोतों के ईएमएफ के संतुलन को स्थापित करता है। कथन 3 सही है, क्योंकि समांतर क्रम संयोजन में समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम व्यक्तिगत प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है, जिससे कुल प्रतिरोध सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम हो जाता है और विभवांतर समान रहता है। कथन 4 गलत है, क्योंकि अधिकतम शक्ति प्रमेय के अनुसार स्रोत से बाह्य प्रतिरोध को अधिकतम शक्ति तब स्थानांतरित होती है जब बाह्य प्रतिरोध का मान स्रोत के आंतरिक प्रतिरोध के **बराबर** ($R = r$) होता है, आधे के बराबर नहीं।
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आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत (Natural Selection) में 'योग्यतम की उत्तरजीविता' (Survival of the Fittest) का अर्थ केवल शारीरिक शक्ति से नहीं है, बल्कि यह उस प्रजनन सफलता (Reproductive Success) को दर्शाता है जिसके द्वारा कोई जीव अपनी संतान के माध्यम से जीन पूल में अधिक योगदान देता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ह्यूगो डी व्रीस द्वारा प्रतिपादित 'उत्परिवर्तन सिद्धांत' (Mutation Theory) के अनुसार विकास की प्रक्रिया क्रमिक और धीमी न होकर आकस्मिक, दिशाहीन और बड़े पैमाने पर होने वाले उत्परिवर्तन (Saltation) के कारण होती है।
3. आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) एक नियतिवादी (Deterministic) प्रक्रिया है जो बड़े जनसंख्या आकारों में सबसे अधिक प्रभावशाली होती है, और यह प्राकृतिक चयन के विपरीत अनुकूल लक्षणों के बिना भी एलील आवृत्तियों में तेजी से परिवर्तन ला सकती है।
4. समजात अंग (Homologous Organs) उत्पत्ति और संरचनात्मक रूप से समान होते हैं, भले ही उनके कार्य भिन्न हों (जैसे व्हेल के फ्लिपर और चमगादड़ के पंख), और यह 'अपसारी विकास' (Divergent Evolution) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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क्वांटम यांत्रिकी और आधुनिक भौतिकी के मूल सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डी ब्रॉली की परिकल्पना के अनुसार गतिमान कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) एक तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, जिसकी तरंगदैर्ध्य संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा केवल सूक्ष्म कणों तक सीमित न होकर स्थूल (macroscopic) वस्तुओं के लिए भी सैद्धांतिक रूप से लागू होती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की आइंस्टीन द्वारा की गई व्याख्या यह सिद्ध करती है कि प्रकाश ऊर्जा के विविक्त पैकेटों (फोटॉनों) के रूप में संचरित होता है, तथा उत्सर्जित photoelectron की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की तीव्रता (Intensity) पर निर्भर करती है।
3. कॉम्पटन प्रभाव (Compton Effect) एक्स-किरणों और इलेक्ट्रॉनों के बीच अप्रत्याशित प्रकीर्णन को दर्शाता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि फोटॉन में न केवल ऊर्जा होती है बल्कि संवेग भी होता है, जो प्रकाश के कण स्वरूप (Particle nature) की पुष्टि करता है।
4. किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन का चक्रण (Spin) और उसका कक्षीय कोणीय संवेग क्वांटम संख्याओं द्वारा निर्धारित होते हैं, जहाँ 'चुंबकीय क्वांटम संख्या' कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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ऊष्मागतिकी का कौन सा नियम एंट्रॉपी की अवधारणा देता है?
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प्रकाश की चाल सर्वाधिक किस माध्यम में होती है?
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