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आनुवंशिकी और जैव विकास के आणविक एवं आनुवंशिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मेेलियन वंशागति के अपवाद के रूप में 'अपूर्ण प्रभाविता' (Incomplete Dominance) मिराबिलिस जलापा (संध्या मलय) में देखी जाती है, जहाँ $F_2$ पीढ़ी का फेनोटाइप और जीनोटाइप अनुपात दोनों ही 1:2:1 होते हैं।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, थॉमस हंट मॉर्गन द्वारा ड्रोसोफिला मेलानोएस्टर पर किए गए लिंकेज (सहलग्नता) और रीकॉम्बिनेशन के प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ कि जीन गुणसूत्रों पर रैखिक रूप से व्यवस्थित होते हैं और जिन जीनों के बीच की दूरी कम होती है, उनमें पुनर्संयोजन की आवृत्ति (Recombination frequency) अधिक होती है।
- 3. वंशागति का क्रोमोसोमल सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance) सटन और बोवेरी द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जो यह बताता है कि युग्मकों के निर्माण के दौरान सजातीय गुणसूत्रों का जोड़ा बनना और अलग होना मेंडेलियन कारकों (एलील्स) के व्यवहार के समानांतर होता है।
- 4. बहुप्रभाविता (Pleiotropy) वह स्थिति है जिसमें एक एकल जीन एक से अधिक फेनोटाइपिक लक्षणों को नियंत्रित करता है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण मनुष्यों में 'सिकल सेल एनीमिया' है, जहाँ हीमोग्लोबिन बीटा-चेन में एक एकल अमीनो अम्ल का परिवर्तन कई शारीरिक विकारों का कारण बनता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अपूर्ण प्रभाविता में $F_2$ पीढ़ी का फेनोटाइपिक और जीनोटाइपिक अनुपात दोनों 1:2:1 होते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि जिन जीनों के बीच की दूरी कम होती है, उनके बीच लिंकेज मजबूत होता है और उनके बीच पुनर्संयोजन की आवृत्ति (Recombination frequency) कम होती है, न कि अधिक। कथन 3 सही है, सटन और बोवेरी ने वंशागति का क्रोमोसोमल सिद्धांत दिया था। कथन 4 सही है, बहुप्रभाविता (Pleiotropy) में एक एकल जीन कई लक्षणों को प्रभावित करता है जैसे कि सिकल सेल एनीमिया। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जैव विकास और आनुवंशिक विविधता के ये नियम आधुनिक जीव विज्ञान के आधार स्तंभ हैं।
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क्वांटम यांत्रिकी और आधुनिक भौतिकी के मूल सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डी ब्रॉली की परिकल्पना के अनुसार गतिमान कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) एक तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, जिसकी तरंगदैर्ध्य संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह अवधारणा केवल सूक्ष्म कणों तक सीमित न होकर स्थूल (macroscopic) वस्तुओं के लिए भी सैद्धांतिक रूप से लागू होती है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की आइंस्टीन द्वारा की गई व्याख्या यह सिद्ध करती है कि प्रकाश ऊर्जा के विविक्त पैकेटों (फोटॉनों) के रूप में संचरित होता है, तथा उत्सर्जित photoelectron की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की तीव्रता (Intensity) पर निर्भर करती है।
3. कॉम्पटन प्रभाव (Compton Effect) एक्स-किरणों और इलेक्ट्रॉनों के बीच अप्रत्याशित प्रकीर्णन को दर्शाता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि फोटॉन में न केवल ऊर्जा होती है बल्कि संवेग भी होता है, जो प्रकाश के कण स्वरूप (Particle nature) की पुष्टि करता है।
4. किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन का चक्रण (Spin) और उसका कक्षीय कोणीय संवेग क्वांटम संख्याओं द्वारा निर्धारित होते हैं, जहाँ 'चुंबकीय क्वांटम संख्या' कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत (Natural Selection) में 'योग्यतम की उत्तरजीविता' (Survival of the Fittest) का अर्थ केवल शारीरिक शक्ति से नहीं है, बल्कि यह उस प्रजनन सफलता (Reproductive Success) को दर्शाता है जिसके द्वारा कोई जीव अपनी संतान के माध्यम से जीन पूल में अधिक योगदान देता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ह्यूगो डी व्रीस द्वारा प्रतिपादित 'उत्परिवर्तन सिद्धांत' (Mutation Theory) के अनुसार विकास की प्रक्रिया क्रमिक और धीमी न होकर आकस्मिक, दिशाहीन और बड़े पैमाने पर होने वाले उत्परिवर्तन (Saltation) के कारण होती है।
3. आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) एक नियतिवादी (Deterministic) प्रक्रिया है जो बड़े जनसंख्या आकारों में सबसे अधिक प्रभावशाली होती है, और यह प्राकृतिक चयन के विपरीत अनुकूल लक्षणों के बिना भी एलील आवृत्तियों में तेजी से परिवर्तन ला सकती है।
4. समजात अंग (Homologous Organs) उत्पत्ति और संरचनात्मक रूप से समान होते हैं, भले ही उनके कार्य भिन्न हों (जैसे व्हेल के फ्लिपर और चमगादड़ के पंख), और यह 'अपसारी विकास' (Divergent Evolution) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं के कोशिकांगों (Organelles) और अंतःझिल्ली तंत्र (Endomembrane System) की संरचनात्मक तथा कार्यात्मक गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतःप्रद्रव्य जालिका (Endoplasmic Reticulum) के खुरदरे भाग (RER) पर राइबोसोम की सब-यूनिट्स को बांधने वाले विशिष्ट प्रोटीन 'राइबोफोरिन' (Ribophorin I और II) उपस्थित होते हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण और उनके स्थानांतरण में मदद करते हैं।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का 'सिस' (Cis) सिस्टर्नी क्षेत्र हमेशा नाभिक की ओर उन्मुख होता है और इसे निर्माणकारी या प्रवेश चेहरा (Forming face) कहा जाता है, जहाँ ईआर से संश्लेषित प्रोटीन ग्लाइकोसिलेशन के लिए प्रवेश करते हैं।
3. लाइसोसोम (Lysosomes) में अम्लीय हाइड्रोलिसेस (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेटेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिनकी सक्रियता के लिए कोशिकाद्रव्य का pH लगभग 7.4 होना आवश्यक होता है, और pH में मामूली वृद्धि होते ही ये एंजाइम अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं।
4. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सीसोम' (F_0-F_1 कण) एटीपी संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं, जिसमें प्रोटॉनों का प्रवाह अंतःझिल्ली अवकाश से माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स की ओर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की मुख्य (पैप्टिक या ज़ाइमोजीन) कोशिकाएं पेप्सिनोजेन का स्राव करती हैं, जिसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) द्वारा सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित किया जाता है, और यह सक्रिय पेप्सिन प्रोटीन को प्रोटियोज़ और पेप्टोन में तोड़ता है।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विश्राम की अवस्था में एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति द्वारा प्रति मिनट श्वसन दर सामान्यतः 12 से 16 बार होती है, तथा प्रश्वसन (Inspiration) के दौरान डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों (External intercostal muscles) के संकुचन से वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ जाता है और आंतरिक दाब कम हो जाता है।
3. हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, जब आलिंद सिस्टॉल (Atrial systole) की स्थिति में होते हैं, तो उस समय रक्त का प्रवाह आलिंदों से निलयों में लगभग 70% तक निष्क्रिय रूप से पहले ही हो चुका होता है, और आलिंदों के संकुचन से शेष 30% रक्त निलयों में पंप किया जाता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पश्च मस्तिष्क (Hindbrain) के अंतर्गत आने वाला मेडुला ओब्लॉन्गेटा (Medulla oblongata) श्वसन केंद्र, हृदय संबंधी कार्डियोवैस्कुलर केंद्रों और गैस्ट्रिक स्राव को नियंत्रित करने वाले प्रमुख केंद्रों का नियंत्रण करता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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