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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आमाशय की मुख्य (पैप्टिक या ज़ाइमोजीन) कोशिकाएं पेप्सिनोजेन का स्राव करती हैं, जिसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) द्वारा सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित किया जाता है, और यह सक्रिय पेप्सिन प्रोटीन को प्रोटियोज़ और पेप्टोन में तोड़ता है।
  2. 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विश्राम की अवस्था में एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति द्वारा प्रति मिनट श्वसन दर सामान्यतः 12 से 16 बार होती है, तथा प्रश्वसन (Inspiration) के दौरान डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों (External intercostal muscles) के संकुचन से वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ जाता है और आंतरिक दाब कम हो जाता है।
  3. 3. हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, जब आलिंद सिस्टॉल (Atrial systole) की स्थिति में होते हैं, तो उस समय रक्त का प्रवाह आलिंदों से निलयों में लगभग 70% तक निष्क्रिय रूप से पहले ही हो चुका होता है, और आलिंदों के संकुचन से शेष 30% रक्त निलयों में पंप किया जाता है।
  4. 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पश्च मस्तिष्क (Hindbrain) के अंतर्गत आने वाला मेडुला ओब्लॉन्गेटा (Medulla oblongata) श्वसन केंद्र, हृदय संबंधी कार्डियोवैस्कुलर केंद्रों और गैस्ट्रिक स्राव को नियंत्रित करने वाले प्रमुख केंद्रों का नियंत्रण करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। पाचन तंत्र में आमाशय की ज़ाइमोजीन (मुख्य) कोशिकाएं निष्क्रिय पेप्सिनोजेन स्रावित करती हैं जो HCl द्वारा सक्रिय पेप्सिन में बदलता है। श्वसन तंत्र के तहत, प्रश्वसन के समय डायाफ्राम के चपटे होने और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों के संकुचन से फेफड़ों में हवा खींचने के लिए ऋणात्मक दाब बनता है। परिसंचरण तंत्र में हृदय चक्र के दौरान आलिंदों के संकुचन से पहले ही अधिकांश रक्त गुरुत्वाकर्षण और वाल्व खुलने से निलयों में पहुँच चुका होता है (लगभग 70-80%), जबकि शेष 30% आलिंद संकुचन से जाता है। अंततः, तंत्रिका तंत्र में मेडुला ओब्लॉन्गेटा श्वसन, हृदय गति और स्वायत्त क्रियाओं के नियंत्रण का प्रमुख केंद्र है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मानव शरीर के ये सभी तंत्र होमियोस्टैसिस बनाए रखने के लिए समन्वय से कार्य करते हैं।
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