विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)
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बिहार समसामयिक एवं प्रशासनिक परिदृश्य के अंतर्गत, हाल ही में बिहार सरकार द्वारा राज्य के युवाओं और महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने तथा रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस योजना के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 4% साधारण ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर्स के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% है।
- 2. इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 'बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम' (BSUIDC) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक का ऋण 4% साधारण ब्याज पर और महिलाओं, दिव्यांगों तथा ट्रांसजेंडर्स के लिए मात्र 1% ब्याज दर पर प्रदान किया जाता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि इस योजना का क्रियान्वयन 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के नियमों के तहत 'बिहार शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड' (Bihar State Education Finance Corporation Ltd.) द्वारा किया जाता है, न कि BSUIDC द्वारा। अधिक अभ्यास और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र…
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और बाल-केन्द्रित…
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में चलाई जा रही प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने तक कुल 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता विभिन्न चरणों में प्रदान की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है।
2. 'सात निश्चय पार्ट-2' (2020-2025) के अंतर्गत 'युवक सशक्तिकरण' और 'महिला सशक्तिकरण' को प्राथमिकता देते हुए 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण 4% साधारण ब्याज पर, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% है।
3. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 'मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना' के तहत सभी सरकारी अस्पतालों को डिजिटाइज्ड करने और मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने का प्रावधान किया गया है।
4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के अंतर्गत मिलने वाले ऋण का पुनर्भुगतान नौकरी मिलने के तुरंत बाद अनिवार्य रूप से शुरू हो जाता है, भले ही छात्र की मासिक आय निर्धारित सीमा से कम क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में क्रियान्वित की जाने वाली प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक (Graduation) की डिग्री प्राप्त करने तक विभिन्न चरणों में कुल 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देना और बाल विवाह पर रोक लगाना है।
2. 'सात निश्चय पार्ट-2' (2020-2025) के अंतर्गत संचालित 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए युवाओं को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए साधारण ब्याज दर 4% तथा महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% निर्धारित की गई है।
3. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक सुलभ स्वास्थ्य पहुँच के लिए 'मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना' के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने और उन्हें पूरी तरह से पेपरलेस बनाने की पहल की जा रही है।
4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के प्रावधानों के अनुसार, ऋण का पुनर्भुगतान पाठ्यक्रम पूरा होने या नौकरी मिलने के बाद अनिवार्य रूप से उसी समय शुरू हो जाता है, भले ही लाभार्थी की मासिक आय निर्धारित न्यूनतम सीमा से कम क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. UDL एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए शिक्षण विधियों, सामग्रियों और मूल्यांकन के तरीकों में शुरुआत से ही लचीलापन और बहुविकल्प प्रदान करता है।
2. UDL के तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-वैज्ञानिक आधार हैं: सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)।
3. यह दृष्टिकोण केवल दिव्यांग या बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ही अनुकूलित है, और सामान्य अथवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए इसका उपयोग करने से उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विभेदित अनुदेशन एक ऐसा अध्यागम दृष्टिकोण है जहाँ शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (जैसे उनकी अधिगम शैली, तत्परता स्तर और रुचियों) को ध्यान में रखते हुए शिक्षण सामग्री, प्रक्रियाओं और उत्पादों में लचीलापन अपनाता है।
2. यह दृष्टिकोण केवल विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए अनुकूलित है और सामान्य कक्षाओं में प्रतिभाशाली या औसत बालकों के शिक्षण परिणामों पर इसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. विभेदित अनुदेशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक छात्र को उसकी क्षमता के अनुरूप अधिकतम प्रगति करने के अवसर प्रदान करना और सहयोगात्मक अधिगम वातावरण का निर्माण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और 'अधिकार अधिनियम (RPwD Act 2016)' के प्रावधानों तथा 'सार्वभौमिक डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (UDL) के सिद्धांतों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय संवेदी, शारीरिक, बौद्धिक या बहु-विकलांगता (Multiple Disabilities) से ग्रस्त बच्चों को सामान्य बालकों के साथ मुख्यधारा की शिक्षा में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यचर्या में लचीलापन, सुगम्यता (Accessibility) और सहायक तकनीकी (Assistive Technology) का उपयोग करता है, तो समावेशी शिक्षाशास्त्र के इन तात्विक एवं वैधानिक मानदंडों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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एक शिक्षिका अपनी कक्षा में 'दृष्टिबाधित' छात्रों की आवश्यकताओं को कैसे पूरा कर सकती है?
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