विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)
Asked 2 months ago · Viewed 16 times
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. UDL एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए शिक्षण विधियों, सामग्रियों और मूल्यांकन के तरीकों में शुरुआत से ही लचीलापन और बहुविकल्प प्रदान करता है।
- 2. UDL के तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-वैज्ञानिक आधार हैं: सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)।
- 3. यह दृष्टिकोण केवल दिव्यांग या बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ही अनुकूलित है, और सामान्य अथवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए इसका उपयोग करने से उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (UDL) एक ऐसा दृष्टिकोण है जो सभी प्रकार के शिक्षार्थियों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षण सामग्री, विधियों और मूल्यांकन में लचीलापन और बहुविकल्पीय उपागम प्रदान करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि UDL रूपरेखा मुख्य रूप से तीन सिद्धांतों पर आधारित है: सहभागिता (क्यों सीखें), प्रस्तुति (क्या सीखें - ज्ञान का प्रतिनिधित्व), और अभिव्यक्ति (कैसे सीखें - प्रदर्शन के साधन)। कथन 3 गलत है क्योंकि UDL किसी एक विशिष्ट समूह (जैसे केवल दिव्यांग) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामान्य, प्रतिभाशाली और विशेष आवश्यकता वाले सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से अत्यधिक प्रभावी और लाभकारी होता है।
अगला प्रश्न →
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा प्रणाली के संदर्भ…
← पिछला प्रश्न
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में…
Related Questions
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs) के शिक्षण में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) और 'राष्ट्रीय विकलांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act, 2016) के वैधानिक तथा शैक्षणिक प्रावधानों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय दृश्य, श्रवण, और बौद्धिक रूप से बाधित बालकों को मुख्यधारा की कक्षाओं में समान अवसर प्रदान करने के लिए पाठ्यचर्या, मूल्यांकन विधियों और भौतिक परिवेश में आवश्यक अनुकूलन (Accommodations and Modifications) करता है, तो इस प्रक्रिया के वैज्ञानिक और विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य सामान्य और विशेष आवश्यकता वाले बालकों की विविध अधिगम शैलियों को समायोजित करना है। इस संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सी कक्षा-कक्षीय रणनीति 'विभेदीकृत अनुदेशन' के मूल सिद्धांतों के सबसे अधिक अनुकूल है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों' (Children with Special Needs) के प्रभावी शिक्षण हेतु 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का गहन विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा उपागम इस शिक्षण पद्धति के वास्तविक तात्विक और व्यावहारिक स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से रेखांकित करता है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक रूप से डिज़ाइन किया गया अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) का सिद्धांत कक्षा-कक्ष में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित में से किस मुख्य दृष्टिकोण पर बल देता है?
→
बिहार समसामयिक एवं प्रशासनिक परिदृश्य के अंतर्गत, हाल ही में बिहार सरकार द्वारा राज्य के युवाओं और महिलाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने तथा रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 4% साधारण ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर्स के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% है।
2. इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 'बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम' (BSUIDC) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
→
बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में चलाई जा रही प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक की डिग्री प्राप्त करने तक कुल विभिन्न चरणों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने पर अविवाहित लड़कियों को ₹25,000 और स्नातक उत्तीर्ण करने पर सभी लड़कियों को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
2. 'मुख्यमंत्री बाल बालिका साइकिल योजना' और 'पोशाक योजना' के माध्यम से विद्यालयों में छात्राओं के नामांकन और ठहराव (Retention) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसे बाद में लड़कों के लिए भी विस्तारित कर दिया गया।
3. राज्य के सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए 'जननी सुरक्षा योजना' के साथ-साथ 'मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना' को एकीकृत रूप से प्रभावी बनाया गया है, जिसके तहत प्रसव के पश्चात तत्काल नकद प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट योजना' के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को ₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण 4% साधारण ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजन और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिजाइन' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों और उसके अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL) एक ऐसा पाठ्यक्रम ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को कम करने और सभी विद्यार्थियों को समान रूप से सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए तीन मुख्य सिद्धांतों—अभिप्रेरणा के बहुविध साधन, प्रस्तुति के बहुविध साधन, और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन—पर आधारित है।
2. UDL का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल शारीरिक रूप से अक्षम बालकों को ही विशेष शिक्षण सामग्रियाँ मिल सकें, जबकि सामान्य बालकों के लिए पारंपरिक पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण प्रणाली ही सर्वोत्तम और एकमात्र विकल्प बनी रहे।
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और निःशक्तजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act, 2016) दोनों ही इस बात पर बल देते हैं कि कक्षा का भौतिक और शैक्षणिक वातावरण ऐसा होना चाहिए जो बिना किसी अनुकूलन के केवल प्रतिभाशाली बालकों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम (RCI Act, 1992) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भारतीय पुनर्वास परिषद' (RCI) की स्थापना एक सांविधिक निकाय के रूप में दिव्यांगजन (PwD) के शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास कार्यक्रमों के मानकीकरण और विनियमन के लिए की गई थी।
2. NCF 2005 इस बात की वकालत करता है कि समावेशी शिक्षा कोई अलग पाठ्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सामान्य विद्यालयों की उस प्रणाली का विस्तार है जो सभी बच्चों, चाहे वे शारीरिक रूप से अक्षम हों या सामाजिक रूप से वंचित, को एक साथ सीखने का अवसर प्रदान करती है।
3. NCF 2005 के अनुसार, विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CwSN) के लिए 'विशेष विद्यालयों' की स्थापना करना ही एकमात्र आदर्श विकल्प है, और सामान्य कक्षाओं में उनका समावेशन उनके अधिगम स्तर को गिरा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.