स्मृति एवं विस्मृति
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बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत (Structure of Intellect Model) का प्रतिपादन करते हुए जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) ने बुद्धि को तीन स्वतंत्र आयामों—संक्रियाओं (Operations), अंतर्वस्तुओं (Contents) और उत्पादों (Products)—के रूप में वर्गीकृत किया था। इस मॉडल के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति किसी दी गई समस्या के समाधान के लिए अपनी स्मृति और संज्ञान का उपयोग करते हुए विभिन्न दिशाओं में स्वतंत्र रूप से अनेक मौलिक एवं भिन्न विचार उत्पन्न करता है, तो गिलफोर्ड के बुद्धि के घन (Intellect Cube) में यह विशिष्ट मानसिक प्रक्रिया किस श्रेणी के अंतर्गत आएगी?
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Detailed Explanation
जे.पी. गिलफोर्ड के बुद्धि के त्रिआयामी मॉडल (Structure of Intellect) के अनुसार, बुद्धि को तीन आयामों—संक्रिया (Operations), अंतर्वस्तु (Contents) और उत्पाद (Products) में विभाजित किया गया है। संक्रिया आयाम के अंतर्गत पाँच प्रकार की मानसिक प्रक्रियाएँ आती हैं: संज्ञान, स्मरण, अभिसारी चिंतन, अपसारी चिंतन और मूल्यांकन। जब कोई व्यक्ति किसी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न संभावित दिशाओं में नए, मौलिक और बहुविध विचार उत्पन्न करता है, तो उसे 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) कहा जाता है, जो सृजनात्मकता का एक प्रमुख आधार है। इस मनोवैज्ञानिक और सैद्धांतिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ का अध्ययन कर सकते हैं।
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बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रस्तुत बौद्धिक संरचना के वर्गीकरण में, जब किसी मानसिक संक्रिया के अंतर्गत उपलब्ध सूचनाओं से नए और मौलिक निष्कर्ष निकाले जाते हैं या किसी समस्या के एक से अधिक संभावित और विविध समाधान खोजे जाते हैं, तो गिलफोर्ड के इस त्रि-आयामी मॉडल (3D Model) के अंतर्गत यह विशिष्ट बौद्धिक प्रक्रिया किस आयाम के अंतर्गत आती है?
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गिल्फर्ड (J.P. Guilford) के त्रि-आयामी बुद्धि मॉडल (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में, बौद्धिक योग्यताओं के वर्गीकरण के अंतर्गत 'संक्रियाओं' (Operations) की श्रेणी में निम्नलिखित में से किसे सम्मिलित किया जाता है?
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बुद्धि के त्रि-आयामी (Structure of Intellect) सिद्धांत के प्रणेता जे.पी. गिलफोर्ड द्वारा प्रतिपादित बुद्धि के मॉडल में 'संक्रियाएँ' (Operations), 'विषय-वस्तु' (Contents) और 'उत्पाद' (Products) के त्रि-आयामी वर्गीकरण का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, यदि कोई विचारक 'स्मृति प्रसंग' (Memory Recording) को इस मॉडल के किस विशिष्ट आयाम के अंतर्गत रखेगा, तो निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इस वैज्ञानिक वर्गीकरण की वास्तविक प्रकृति को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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बुद्धि की संरचना और उसके पदानुक्रमित तथा त्रि-आयामी मॉडलों—विशेष रूप से चार्ल्स स्पीयरमैन के द्व-कारक सिद्धांत (Two-Factor Theory), लुईस थर्स्टर्न के प्राथमिक मानसिक योग्यताओं के सिद्धांत, तथा जे.पी. गिलफोर्ड के 'बुद्धि की संरचना' (Structure of Intellect - SI) मॉडल—का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, यदि कोई मनोवैज्ञानिक यह स्थापित करना चाहता है कि मानवीय बौद्धिक क्षमताएँ न केवल एक सामान्य मानसिक ऊर्जा (g-factor) और विशिष्ट क्षमताओं (s-factor) तक सीमित हैं, बल्कि वे संक्रियाओं (Operations), विषय-वस्तुओं (Contents) और उत्पादों (Products) के 150 (या 180) स्वतंत्र उप-घटकों के त्रि-आयामी मैट्रिक्स के रूप में व्यवस्थित हैं, तो गिलफोर्ड के इस बहुआयामी और वर्गीकरणवादी मॉडल के तात्विक एवं मनोवैज्ञानिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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मूक और बधिक शिक्षा तथा संज्ञानात्मक मनोविज्ञान के अंतर्गत जॉर्ज मिलर (George Miller) द्वारा प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'कार्यकारी स्मृति की क्षमता और जादुई संख्या 7±2' (Working Memory Capacity and The Magical Number Seven, Plus or Minus Two)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत मानव मस्तिष्क की अल्पकालिक या कार्यकारी स्मृति (Working Memory) में एक समय में बिना किसी पुनरावृत्ति (Rehearsal) के लगभग 5 से 9 सूचना के टुकड़ों (Chunks) को ही सक्रिय रूप से बनाए रखने और संसाधित करने की सीमित क्षमता होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक भार (Cognitive Load), पाठ्यचर्या के संगठन और सूचना प्रसंस्करण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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रिचर्ड एटकिंसन (Richard Atkinson) और रिचर्ड शिफरिन (Richard Shiffrin) के 'सूचना प्रसंस्करण मॉडल' (Information Processing Model) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संवेदी स्मृति या सेंसरी मेमोरी' (Sensory Memory)**—जिसे उस प्रारंभिक और अति-अल्पकालिक मानसिक भंडार के रूप में परिभाषित किया जाता है जो पर्यावरण से प्राप्त होने वाली समस्त दृश्य, श्रव्य और अन्य संवेदी सूचनाओं को बिना किसी दीर्घकालिक प्रसंस्करण के अत्यंत सूक्ष्म समय (मिलीसेकंड से लेकर कुछ सेकंड तक) के लिए यथार्थ रूप में ग्रहण और सुरक्षित रखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के ध्यान (Attention), धारणा और चयनात्मक प्रसंस्करण (Selective Processing) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठनकर्ता या एडवांस ऑर्गेनाइजर' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक शैक्षणिक शिक्षण सामग्री या परिचयात्मक विषयवस्तु के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे शिक्षक द्वारा किसी नए, जटिल और विस्तृत पाठ या संप्रत्यय को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह उनके संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और पूर्व ज्ञान के बीच एक वैचारिक सेतु का कार्य कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए ज्ञान के सार्थक आत्मसातकरण (Meaningful Assimilation) और दीर्घकालिक स्मृति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठन या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक शिक्षण सामग्री या वैचारिक ढांचे के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे मुख्य विषयवस्तु या नई जानकारी को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह नए ज्ञान और शिक्षार्थी के मस्तिष्क में पहले से मौजूद पूर्व ज्ञान (Prior Knowledge) के बीच एक मजबूत संज्ञानात्मक पुल का निर्माण कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अर्थपूर्ण समझ (Meaningful Learning), दीर्घकालिक स्मरण और स्कीमा (Schema) एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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