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General Science
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किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर क्या होती है?

Detailed Explanation

परमाणु त्रिज्या घटने और नाभिकीय आकर्षण बढ़ने से विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है।
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रासायनिक बंधन, समन्वय यौगिकों और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फजान के नियमों (Fajans' rules) के अनुसार, आयनिक यौगिक में सहसंयोजक लक्षण तब अधिक होते हैं जब धनायन का आकार छोटा हो, ऋणायन का आकार बड़ा हो और धनायन पर आवेश का घनत्व उच्च हो। 2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल (Hard acids) सामान्यतः छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश और कम ध्रुवणनीयता वाले धनायन होते हैं जो कठोर क्षारों के साथ मजबूत और स्थिर संकुल बनाते हैं। 3. लुईस अम्ल संकल्पना के अंतर्गत, वे सभी स्पीशीज लुईस अम्ल के रूप में कार्य करती हैं जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की प्रवृत्ति रखती हैं, जैसे अमोनिया ($NH_3$) और जल ($H_2O।$) 4. समइलेक्ट्रॉनिक (Isoelectronic) स्पीशीज के बीच, नाभिकीय आवेश ($Z$) में वृद्धि होने पर ऋणायनों के आकार में कमी आती है जबकि धनायनों का आकार बढ़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या में लगातार वृद्धि होती है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) की वांडर वॉल त्रिज्या उनके सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में बहुत अधिक होती है, जिससे उनका आकार अपने आवर्त के अन्य तत्वों की तुलना में सबसे बड़ा प्रतीत होता है। 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी के किसी भी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर इसका ऋणात्मक मान लगातार बढ़ता जाता है (अर्थात इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक सुगम हो जाती है)। 3. पोलिंग के विद्युतऋणात्मकता पैमाने के अनुसार, आवर्त सारणी में फ्लोरीन की विद्युतऋणात्मकता सबसे अधिक होती है, जबकि ऑक्सीजन की विद्युतऋणात्मकता नाइट्रोजन से कम होती है। 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के प्रभावस्वरूप 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफनियम, Hf) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) की लगभग समान हो जाती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रונים को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित करती है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन (Fluorine) की इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron affinity) अपने समूह के अन्य सभी तत्वों जैसे क्लोरीन की तुलना में सबसे अधिक ऋणात्मक होती है। 3. आयनन विभव (Ionization Potential) का मान किसी परमाणु की गैसीय अवस्था से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को दर्शाता है, और यह सामान्यतः क्षारीय मृदा धातुओं (Group 2) में समान आवर्त की क्षार धातुओं (Group 1) की तुलना में अधिक होता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? परमाणु भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'बीटा-क्षय' (Beta decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन में रूपांतरण होता है, जिसके फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन और एक 'एंटीन्यूट्रिनो' (Antineutrino) का उत्सर्जन होता है, जिससे द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है किंतु परमाणु क्रमांक एक से बढ़ जाता है। 2. 'समभारिक' (Isobars) वे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic number) भिन्न होते हैं, और इनके नाभिकीय गुणों में भारी अंतर पाया जाता है। 3. 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear fusion) की प्रक्रिया केवल अत्यधिक उच्च तापमान और उच्च दाब पर ही संभव है क्योंकि दो हल्के नाभिकों को एक-दूसरे के निकट लाने पर उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तीव्र प्रतिकर्षक ऊर्जा अवरोध उत्पन्न होता है जिसे पार करना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत गोलीय लेंसों, अपवर्तन और वर्ण विक्षपण (Dispersion) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लेंस मेकर सूत्र (Lens Maker's Formula) के अनुसार, यदि किसी पतले उत्तल लेंस के दोनों ओर के माध्यमों के अपवर्तनांक भिन्न-भिन्न हों, तो लेंस की फोकस दूरी दोनों माध्यमों के सापेक्षिक अपवर्तनांक और लेंस के दोनों वक्र पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करती है। 2. जब श्वेत प्रकाश की किरण किसी प्रिज्म से गुजरती है, तो बैंगनी रंग का प्रकाश लाल रंग के प्रकाश की तुलना में सबसे अधिक विचलित (Deviate) होता है, क्योंकि कांच का अपवर्तनांक बैंगनी रंग के लिए सबसे अधिक और लाल रंग के लिए सबसे कम होता है। 3. किसी लेंस की क्षमता (Power) उसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और जब एक उत्तल लेंस (क्षमता $+2D$) और एक अवतल लेंस (क्षमता $-1.5D$) को संपर्क में रखा जाता है, तो इस संयोजन की कुल प्रभावी क्षमता $+0.5D$ होती है और यह एक अभिसारी लेंस की तरह व्यवहार करता है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के आधार पर कार्य करने वाले प्रकाशीय तंतु (Optical Fibres) में प्रकाश का संचरण क्रोड (Core) से आच्छद (Cladding) की ओर होता है, जहाँ क्रोड का अपवर्तनांक आच्छद के अपवर्तनांक की तुलना में कम होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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