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General Science
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परमाणु भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'बीटा-क्षय' (Beta decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन में रूपांतरण होता है, जिसके फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन और एक 'एंटीन्यूट्रिनो' (Antineutrino) का उत्सर्जन होता है, जिससे द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है किंतु परमाणु क्रमांक एक से बढ़ जाता है।
- 2. 'समभारिक' (Isobars) वे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic number) भिन्न होते हैं, और इनके नाभिकीय गुणों में भारी अंतर पाया जाता है।
- 3. 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear fusion) की प्रक्रिया केवल अत्यधिक उच्च तापमान और उच्च दाब पर ही संभव है क्योंकि दो हल्के नाभिकों को एक-दूसरे के निकट लाने पर उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तीव्र प्रतिकर्षक ऊर्जा अवरोध उत्पन्न होता है जिसे पार करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बीटा-क्षय (Beta decay) में, विशेष रूप से $\beta^-$ क्षय के दौरान, नाभिक के अंदर एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन (बीटा कण) और एक एंटीन्यूट्रिनो में बदल जाता है। इस प्रक्रिया में द्रव्यमान संख्या समान रहती है लेकिन परमाणु क्रमांक एक बढ़ जाता है। कथन 2 सही है: समभारिक (Isobars) ऐसे परमाणु होते हैं जिनके नाभिक में न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की कुल संख्या (द्रव्यमान संख्या, A) समान होती है, परंतु उनके परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होते हैं (जैसे $_{18}^{40}\text{Ar}$ और $_{20}^{40}\text{Ca}$)। कथन 3 गलत है क्योंकि दो हल्के नाभिकों के संलयन के समय उनके बीच लगने वाला बल **गुरुत्वाकर्षण बल** नहीं बल्कि उनके धन आवेशों के कारण लगने वाला **स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षक बल (Electrostatic repulsive force)** होता है, जिसे पार करने के लिए अत्यधिक उच्च ताप और दाब की आवश्यकता होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) के भीतर उच्च चुम्बकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) वाली नरम लोहे की कोर को रखा जाता है, तो परिनालिका के भीतर का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर हो जाता है क्योंकि नरम लोहा बाह्य चुंबकीय क्षेत्र को प्रतिकर्षित करता है।
4. स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से गुजरने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक हेनरी (Henry) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी संरक्षी बल (Conservative Force) द्वारा किए गए कार्य का मान प्रयुक्त पथ पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस प्रकार के बल के अंतर्गत एक पूर्ण बंद चक्र में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है।
2. 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी पिंड पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही वैध है, असंरक्षी बलों (जैसे घर्षण बल) के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है।
3. जब कोई पिंड किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में ऊर्ध्वाधर तल पर चक्कर लगाता है, तो डोरी के न्यूनतम बिंदु (सबसे नीचे के बिंदु) पर डोरी में तनाव का मान सर्वोच्च बिंदु (सबसे ऊपर के बिंदु) पर तनाव के मान से हमेशा उसके भार के छह गुने ($6mg$) के अंतर के बराबर होता है।
4. अप्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic Collision) के दौरान संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum) हमेशा लागू होता है, किंतु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है, और ऊर्जा का एक हिस्सा ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण (deformation) के रूप में हास हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण और रक्त समूहों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-नेगेटिव (Rh-) माँ और Rh-पॉजिटिव (Rh+) पिता की संतान होती है, जिससे पहली Rh+ संतान के जन्म के समय माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं और यह दूसरी Rh+ गर्भावस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
2. 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H' एंटीजन अनुपस्थित होता है, जिसके कारण वे केवल 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं और सामान्य 'O' रक्त समूह का रक्त भी उनके लिए घातक हो सकता है।
3. एबीओ (ABO) रक्त समूह प्रणाली में लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित एंटीजन ग्लाइकोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जबकि प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीबॉडी (इम्यूनोग्लोबुलिन) मुख्य रूप से IgM प्रकार के होते हैं।
4. रक्त स्कंदन (Blood coagulation) के दौरान, आंतरिक मार्ग (Intrinsic pathway) की शुरुआत 'हागेमान फैक्टर' (कार फैक्टर XII) के सक्रियण से होती है, जिसके लिए ऊतक थ्रॉम्बोप्लास्टिन (टिश्यू फैक्टर) का होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाश वर्ष किसकी इकाई है?
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