त्वरित लिंक्स
General Science
10 views
आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या में लगातार वृद्धि होती है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) की वांडर वॉल त्रिज्या उनके सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में बहुत अधिक होती है, जिससे उनका आकार अपने आवर्त के अन्य तत्वों की तुलना में सबसे बड़ा प्रतीत होता है।
- 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी के किसी भी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर इसका ऋणात्मक मान लगातार बढ़ता जाता है (अर्थात इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक सुगम हो जाती है)।
- 3. पोलिंग के विद्युतऋणात्मकता पैमाने के अनुसार, आवर्त सारणी में फ्लोरीन की विद्युतऋणात्मकता सबसे अधिक होती है, जबकि ऑक्सीजन की विद्युतऋणात्मकता नाइट्रोजन से कम होती है।
- 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के प्रभावस्वरूप 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफनियम, Hf) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) की लगभग समान हो जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ने के कारण परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, और उत्कृष्ट गैसों में सहसंयोजक बंध न होने के कारण उनकी वांडर वॉल त्रिज्या मापी जाती है जो काफी बड़ी होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि कुछ तत्वों (जैसे बेरिलियम, नाइट्रोजन और उत्कृष्ट गैसों) के लिए इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान धनात्मक या शून्य के करीब होता है, तथा वर्ग में नीचे जाने पर इसका ऋणात्मक मान सामान्यतः घटता है। कथन 3 गलत है क्योंकि नाइट्रोजन की विद्युतऋणात्मकता ऑक्सीजन से कम होती है (ऑक्सीजन की अधिक होती है)। कथन 4 बिल्कुल सही है, लैंथेनाइड संकुचन के कारण 4d और 5d श्रेणी के तत्वों के आकार लगभग समान हो जाते हैं। आवर्त सारणी के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार वे होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
2. 'ब्रॉन्स्टेड-लोरी' (Bronsted-Lowry) अवधारणा के अनुसार, एक अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($H^+$) का त्याग कर सकता है, और इसके द्वारा प्रोटॉन त्यागने के बाद बनने वाली स्पीशीज को उसका 'संयुग्मी क्षार' (Conjugate base) कहा जाता है, न कि संयुग्मी अम्ल।
3. जल की उपस्थिति में दुर्बल अम्ल आंशिक रूप से वियोजित होते हैं और उनके वियोजन स्थिरांक ($K_a$) का मान जितना अधिक होता है, वह अम्ल उतना ही अधिक प्रबल होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और प्लाज्मा प्रोटीन की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त प्लाज्मा में उपस्थित 'फाइब्रिनोजेन' (Fibrinogen) और 'प्रोथ्रोम्बिन' (Prothrombin) यकृत द्वारा संश्लेषित होने वाले प्रमुख प्लाज्मा प्रोटीन हैं, जो रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में निष्क्रिय अवस्था में भाग लेते हैं।
2. 'एल्ब्यूमिन' (Albumin) रक्त प्लाज्मा का सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो मुख्य रूप से रक्त के परासरण दाब (Colloid osmotic pressure) को बनाए रखने का कार्य करता है ताकि ऊतकों में द्रव का अत्यधिक रिसाव न हो।
3. 'सीरम' (Serum) और प्लाज्मा दोनों संरचनात्मक रूप से पूर्णतः समान होते हैं, अंतर केवल इतना होता है कि सीरम में थक्का जमाने वाले सभी प्रोटीन (जैसे फाइब्रिनोजेन) पूरी तरह से उपस्थित होते हैं जबकि प्लाज्मा से इन्हें निकाला जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार सिद्धांत (Acids and Bases) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार वे होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) अवधारणा के अनुसार, एक अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($H^+$) का त्याग कर सकता है, और इसके द्वारा प्रोटॉन त्यागने के बाद बनने वाली स्पीशीज को उसका 'संयुग्मी अम्ल' (Conjugate acid) कहा जाता है।
3. आयनिक बंधन (Ionic bond) के निर्माण के दौरान जालक ऊर्जा (Lattice energy) जितनी अधिक ऋणात्मक होती है, बनने वाले आयनिक यौगिक का स्थायित्व उतना ही अधिक होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता की परिघटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) केवल पृथ्वी के द्रव्यमान और उसकी कक्षा की त्रिज्या पर निर्भर करती है, तथा यह उपग्रह के अपने द्रव्यमान से पूर्णतः स्वतंत्र होती है।
2. यदि कोई उपग्रह पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट चक्कर लगा रहा है, तो उसका परिक्रमण काल लगभग 84.6 मिनट होता है, और उसकी कक्षीय चाल लगभग $7.9\text{ km/s}$ होती है।
3. जब कोई उपग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, तो केप्लर के द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) के अनुसार, उपग्रह की चाल पृथ्वी के सबसे पास (उपसौर या उपभू) होने पर अधिकतम और सबसे दूर (अपसौर या अपभू) होने पर न्यूनतम होती है।
4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को 'भारहीनता' का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य नहीं कर रहा होता है, जिसके कारण अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह दोनों शून्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है तथा विलेय के संघुणन या वियोजन से प्रभावित नहीं होता है।
2. 'वांट-हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के वियोजन की स्थिति में एक से अधिक ($i > 1$) होता है, जबकि संगुणन की स्थिति में इसका मान एक से कम ($i < 1$) होता है, जो परासरण दाब और हिमांक अवनमन जैसे अणुसंख्यक गुणधर्मों के सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक मान के अंतर को स्पष्ट करता है।
3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, जिसमें उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषक (Adsorption) और सक्रिय संकुल का निर्माण मुख्य चरण होता है, जिसका एक उत्कृष्ट उदाहरण हेबर विधि द्वारा अमोनिया उत्पादन में सूक्ष्म विभाजित लोहे का उपयोग है।
4. 'एंजाइम उत्प्रेरण' की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) का मान अनप्रेरित अभिक्रिया की तुलना में बहुत अधिक होता है, जिसके कारण एंजाइम अभिक्रिया की दर को अत्यंत मंद कर देते हैं और यह अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.