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General Science
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और प्रकाशीय परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब एक बिंदु स्रोत से निकलने वाली प्रकाश की किरणें किसी समतल दर्पण पर आपतित होती हैं, तो दर्पण द्वारा निर्मित आभासी प्रतिबिंब का आकार हमेशा वस्तु के आकार के बराबर होता है, और यदि दर्पण को वस्तु की ओर $x$ दूरी से खिसकाया जाए, तो प्रतिबिंब $2x$ दूरी से विस्थापित प्रतीत होता है।
- 2. प्राथमिक इंद्रधनुष (Primary rainbow) के निर्माण में जल की बूंदों के भीतर प्रकाश का दो बार अपवर्तन (Refraction) और एक बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है, जिसके परिणामस्वरूप लाल रंग बाहर की ओर और बैंगनी रंग अंदर की ओर दिखाई देता है।
- 3. वायुमंडल में प्रकाश के अपवर्तन के कारण तारों का टिमटिमाते हुए प्रतीत होना (Scintillation) इस बात को दर्शाता है कि वायुमंडलीय परतों के घनत्व और अपवर्तनांक में निरंतर और यादृच्छिक उतार-चढ़ाव होता रहता है।
- 4. एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी नीले प्रकाश के लिए न्यूनतम और लाल प्रकाश के लिए अधिकतम होती है, क्योंकि कांच का अपवर्तनांक तरंग दैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होता है (कोशी का समीकरण), जिसके कारण वर्ण विपथन (Chromatic aberration) उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। समतल दर्पण में वस्तु और प्रतिबिंब की दूरियां समान होती हैं और दर्पण को खिसकाने पर प्रतिबिंब दोगुनी गति से विस्थापित होता है। प्राथमिक इंद्रधनुष में एक बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन और दो बार अपवर्तन होता है (विकिपीडिया संदर्भ)। तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन का परिणाम है, और कांच के अपवर्तनांक की तरंग दैर्ध्य पर निर्भरता के कारण लेंसों में वर्ण विपथन उत्पन्न होता है जिसमें नीले प्रकाश की फोकस दूरी लाल प्रकाश की तुलना में कम होती है।
Related Questions
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होने पर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, और इस परिघटना के लिए आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण के बराबर या उससे अधिक होना तथा प्रकाश का सघन से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य शर्तें हैं।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति समाप्त हो जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु वास्तविक है और अवतल दर्पण द्वारा उसका वास्तविक प्रतिबिंब बनता है, तो रैखिक आवर्धन ($m$) का मान हमेशा धनात्मक होता है, जबकि आभासी प्रतिबिंब बनने की स्थिति में आवर्धन ऋणात्मक हो जाता है।
4. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical telescope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्य लेंस (Objective lens) का व्यास (Aperture) और फोकस दूरी दोनों बहुत अधिक होने चाहिए, जिससे दूर स्थित तारों से अधिक प्रकाश एकत्र हो सके और विभेदन क्षमता बेहतर हो।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता की परिघटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) केवल पृथ्वी के द्रव्यमान और उसकी कक्षा की त्रिज्या पर निर्भर करती है, तथा यह उपग्रह के अपने द्रव्यमान से पूर्णतः स्वतंत्र होती है।
2. यदि कोई उपग्रह पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट चक्कर लगा रहा है, तो उसका परिक्रमण काल लगभग 84.6 मिनट होता है, और उसकी कक्षीय चाल लगभग $7.9\text{ km/s}$ होती है।
3. जब कोई उपग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, तो केप्लर के द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) के अनुसार, उपग्रह की चाल पृथ्वी के सबसे पास (उपसौर या उपभू) होने पर अधिकतम और सबसे दूर (अपसौर या अपभू) होने पर न्यूनतम होती है।
4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को 'भारहीनता' का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य नहीं कर रहा होता है, जिसके कारण अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह दोनों शून्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों—विशेषकर श्वसन और तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण व समन्वय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव में श्वसन लय का मुख्य नियंत्रण केंद्र मस्तिष्क के मेडुला ओब्लोंगेटा (Medulla oblongata) में स्थित होता है, जो रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड ($ ext{CO}_2$) और हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता में वृद्धि होने पर अत्यधिक संवेदनशील रूप से सक्रिय होता है।
2. पोंस (Pons) क्षेत्र में स्थित 'न्यूटैक्सिक केंद्र' (Pneumotaxic center) श्वसन लय केंद्र के कार्यों को नियंत्रित कर सकता है, और यह अंतःश्वसन की अवधि को बढ़ाकर श्वसन दर को धीमा कर देता है।
3. परिधीय रासायनसंवेदी (Peripheral chemoreceptors), जो महाधमनी चाप (Aortic arch) और कैरोटिड धमनी से जुड़े होते हैं, रक्त में ऑक्सीजन ($ ext{O}_2$) के स्तर में कमी आने पर मेडुला केंद्र को संकेत भेजकर श्वसन दर को बढ़ाने में सहायता करते हैं।
4. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) के अंतर्गत, अनुकंपी तंत्रिका तंत्र (Sympathetic nervous system) श्वासनली (Bronchi) के प्रसार को प्रेरित करता है, जबकि परानुकंपी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system) श्वासनली को संकुचित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और उनके रासायनिक गुणों तथा ईंधन की गुणवत्ता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्काइन्स (Alkynes) में कार्बन-कार्बन त्रि-बंध (Triple bond) उपस्थित होने के कारण ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं, और इनका कार्बन परमाणु $sp$ संकरित (Hybridized) होता है, जिसके कारण इनका प्रचुर मात्रा में हाइड्रोजन आयन ($H^+$) त्यागने का गुण इन्हें एल्केन्स और एल्कीन्स की तुलना में अधिक अम्लीय बनाता है।
2. एलपीजी (LPG) का मुख्य घटक ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण है, और इसके रिसाव का आसानी से पता लगाने के लिए इसमें तीक्ष्ण गंध वाला कार्बन यौगिक 'इथाइल मर्कैप्टन' ($CH_3CH_2SH$) मिलाया जाता है, जो एक सल्फर यौगिक है।
3. डीजल इंजन की दहन गुणवत्ता और 'अपस्फोटन' (Knocking) को मापने के लिए 'सीटेन संख्या' (Cetane number) का उपयोग किया जाता है, जिसमें उच्च सीटेन संख्या कम प्रज्वलन विलंब (Ignition delay) और बेहतर ईंधन गुणवत्ता को दर्शाती है, तथा इसके मानक के रूप में 'ऐल्फा-मिथाइलनेफ्थलीन' को 100 तथा 'n-हेप्टाडेकेन' को शून्य अंक दिया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मीथेन का सूत्र?
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