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General Science
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कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता की परिघटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) केवल पृथ्वी के द्रव्यमान और उसकी कक्षा की त्रिज्या पर निर्भर करती है, तथा यह उपग्रह के अपने द्रव्यमान से पूर्णतः स्वतंत्र होती है।
- 2. यदि कोई उपग्रह पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट चक्कर लगा रहा है, तो उसका परिक्रमण काल लगभग 84.6 मिनट होता है, और उसकी कक्षीय चाल लगभग $7.9\text{ km/s}$ होती है।
- 3. जब कोई उपग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, तो केप्लर के द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) के अनुसार, उपग्रह की चाल पृथ्वी के सबसे पास (उपसौर या उपभू) होने पर अधिकतम और सबसे दूर (अपसौर या अपभू) होने पर न्यूनतम होती है।
- 4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को 'भारहीनता' का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य नहीं कर रहा होता है, जिसके कारण अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह दोनों शून्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। किसी उपग्रह की कक्षीय चाल का सूत्र $v_o = \sqrt{\frac{GM}{r}}$ होता है, जिससे स्पष्ट है कि यह उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती है। पृथ्वी के अत्यंत निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग $7.9\text{ km/s}$ होती है जिसे प्रथम ब्रह्मांड वेग भी कहते हैं, और इसका परिक्रमण काल लगभग 84.6 मिनट होता है। केप्लर के क्षेत्रीय चाल के नियम के अनुसार, केन्द्रीय बल के अंतर्गत गतिशील पिंड की चाल निकट स्थिति में सर्वाधिक होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि उपग्रह के भीतर अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता का अनुभव गुरुत्वाकर्षण बल के न होने के कारण नहीं, बल्कि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों के समान त्वरण (जो कि अभिकेंद्र त्वरण के बराबर होता है) के कारण 'मुक्त पतन' (Free fall) की स्थिति में होने के कारण होता है, जबकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल वहाँ पूरी तरह प्रभावी रहता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव शरीर में 'ऑक्सीटोसिन' (Oxytocin) हार्मोन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक प्रकार का पेप्टाइड हार्मोन है जिसका संश्लेषण हाइपोथैलेमस में होता है और यह पश्च पिट्यूटरी (Posterior Pituitary) ग्रंथि से स्रावित होता है।
2. यह प्रसव के दौरान गर्भाशय की चिकनी मांसपेशियों (Uterine smooth muscles) में संकुचन को प्रेरित करता है तथा स्तन ग्रंथियों से दुग्ध निष्कासन (Milk ejection reflex) में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत गोलीय लेंसों, अपवर्तन और वर्ण विक्षपण (Dispersion) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लेंस मेकर सूत्र (Lens Maker's Formula) के अनुसार, यदि किसी पतले उत्तल लेंस के दोनों ओर के माध्यमों के अपवर्तनांक भिन्न-भिन्न हों, तो लेंस की फोकस दूरी दोनों माध्यमों के सापेक्षिक अपवर्तनांक और लेंस के दोनों वक्र पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करती है।
2. जब श्वेत प्रकाश की किरण किसी प्रिज्म से गुजरती है, तो बैंगनी रंग का प्रकाश लाल रंग के प्रकाश की तुलना में सबसे अधिक विचलित (Deviate) होता है, क्योंकि कांच का अपवर्तनांक बैंगनी रंग के लिए सबसे अधिक और लाल रंग के लिए सबसे कम होता है।
3. किसी लेंस की क्षमता (Power) उसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और जब एक उत्तल लेंस (क्षमता $+2D$) और एक अवतल लेंस (क्षमता $-1.5D$) को संपर्क में रखा जाता है, तो इस संयोजन की कुल प्रभावी क्षमता $+0.5D$ होती है और यह एक अभिसारी लेंस की तरह व्यवहार करता है।
4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के आधार पर कार्य करने वाले प्रकाशीय तंतु (Optical Fibres) में प्रकाश का संचरण क्रोड (Core) से आच्छद (Cladding) की ओर होता है, जहाँ क्रोड का अपवर्तनांक आच्छद के अपवर्तनांक की तुलना में कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने यह सिद्ध किया कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और उसका धनात्मक आवेश उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में केंद्रित होता है, जिसे 'नाभिक' (Nucleus) कहा जाता है।
2. नील्स बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं विशिष्ट वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, अर्थात् $L = \frac{nh}{2\pi}$।
3. डी ब्रोग्ली की परिकल्पना के अनुसार, गतिमान इलेक्ट्रॉनों सहित सभी द्रव्य कण तरंग-कण द्वैतता (Wave-particle duality) प्रदर्शित करते हैं, और उनकी तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{mv}$ द्वारा दी जाती है।
4. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, एक ही समय में किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का यथार्थ निर्धारण किया जा सकता है, बशर्ते माप के उपकरण पूर्ण रूप से शून्य त्रुटि वाले हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वेनबर्ग साम्य (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संकरण करने वाले जनसंख्या में एलील आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर और निरंतर बनी रहती हैं, बशर्ते कि उस पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवासन और आनुवंशिक विचलन जैसे विकासवादी बल प्रभावी न हों।
2. लैमार्कवाद (Lamarckism) के 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of acquired characters) के सिद्धांत का खंडन वीजमैन (August Weismann) द्वारा अपने चूहों की पूंछ काटने के प्रयोग के माध्यम से किया गया था, जिसमें उन्होंने यह सिद्ध किया कि कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) में होने वाले परिवर्तन अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होते हैं।
3. 'जेनेटिक ड्रिफ्ट' (Genetic drift) या आनुवंशिक विचलन मुख्य रूप से बड़े आकारों वाली जनसंख्या में अत्यधिक प्रभावी होता है, और यह अनुकूلی चयन के परिणामस्वरूप एलील आवृत्तियों में एक नियत दिशा में क्रमिक परिवर्तन उत्पन्न करता है।
4. समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और भ्रूणय विकास समान होते हैं लेकिन उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, जो अपसारी विकास (Divergent evolution) का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों (Circuits) के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों (Metallic conductors) का तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) और विद्युत अपघट्यों (Electrolytes) का तापमान बढ़ने पर उनका प्रतिरोध घट जाता है।
2. जब प्रतिरोधकों के एक समूह को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध समूह के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम होता है, और प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर का मान भिन्न-भिन्न होता है।
3. किरचॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
4. एक आदर्श वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत माना जाता है, यही कारण है कि इसे परिपथ में हमेशा उस घटक के साथ समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है जिसके सिरों का विभवांतर मापना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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