BPSC TRE 4.0
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, हड़प्पा सभ्यता के नगरीय नियोजन और वैदिक काल की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हड़प्पा सभ्यता के स्थलों में 'धोलावीरा' एकमात्र ऐसा स्थल है जो तीन भागों (किला, मध्य नगर और निचला नगर) में विभाजित था, तथा यहाँ से विशाल जलकुण्ड (Reservoir) और 'साइनेज बोर्ड' के रूप में लकड़ी के फ्रेम पर जड़े दस बड़े आकार के अक्षरों वाला एक अनोखा शिलालेख मिला है।
- 2. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द गाय का दूध दुहने वाली स्त्री के अर्थ में प्रयुक्त होता था, तथा इस काल में संपत्ति का मुख्य आधार भूमि न होकर मवेशी (गाय और घोड़े) थे, जिसके कारण गाय को 'अधन्या' (न मारे जाने योग्य) माना गया था।
- 3. उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज (लगभग 1000 ईसा पूर्व) के बाद कृषि अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आया, जिसके कारण इस काल के ग्रंथों (जैसे शतपथ ब्राह्मण) में कृषि से जुड़ी चारों क्रियाओं — जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
- 4. जैन धर्म के त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) और बौद्ध धर्म के अष्टमार्क मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) दोनों ही वेदों की सर्वोच्चता और यज्ञीय कर्मकांडों को अनिवार्य मानते हैं, तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत को पूरी तरह से नकारते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख स्थल है जो तीन भागों में विभाजित था और जल प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध था। ऋग्वैदिक काल में गाय को 'अधन्या' कहा जाता था और अर्थव्यवस्था पशुपालन पर आधारित थी। उत्तर वैदिक काल में लोहे के आगमन से कृषि मुख्य पेशा बन गई और शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं का उल्लेख मिलता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि जैन और बौद्ध दोनों ही धर्म वेदों की प्रामाणिकता को नहीं मानते हैं और पुनर्जन्म के सिद्धांत में दृढ़ विश्वास रखते हैं। प्राचीन इतिहास और अन्य विषयों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार के भूगर्भिक इतिहास और चट्टानी तंत्र (Rock Systems) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. धारवाड़ शैलतंत्र (Dharwar Rock System) बिहार के दक्षिण-पूर्वी भाग (विशेषकर मुंगेर, जमुई, नवादा और राजगीर की पहाड़ियों) में पाया जाता है, जो अत्यधिक प्राचीन और रूपांतरित चट्टानों से निर्मित है तथा इसमें क्वार्ट्जाइट, शिस्ट और स्लेट चट्टानें प्रमुख हैं।
2. विंध्यन शैलतंत्र (Vindhyan Rock System) कैमूर और रोहतास जिलों में सोन नदी के उत्तर में विस्तृत है, जो प्राचीन अवसादी (Sedimentary) चट्टानों का भाग है और यहाँ चूना पत्थर (Limestone), बलुआ पत्थर (Sandstone) तथा सीमेंट ग्रेड के डोलोमाइट के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।
3. टर्शरी शैलतंत्र (Tertiary Rock System) बिहार के उत्तर-पश्चिमी भाग में हिमालय के उत्थान के परिणामस्वरूप शिवालिक श्रेणी के तटीय क्षेत्रों (विशेषकर पश्चिम चंपारण के सोमेश्वर और दून घाटी क्षेत्र) में विकसित हुआ है।
4. क्वाटरनरी शैलतंत्र (Quaternary Rock System) अत्यंत प्राचीन आग्नेय चट्टानों से बना है जो दक्षिण बिहार के पठारी इलाकों में लावा के शीतलन से निर्मित हुआ है और इसमें किसी भी प्रकार के जलोढ़ निक्षेप नहीं पाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में भारत आने वाली विभिन्न यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों और उनके द्वारा स्थापित व्यापारिक बस्तियों (फैक्ट्रियों) के प्रारंभिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा 31 दिसंबर 1600 को राजपत्र (Charter) प्रदान किया गया था, तथा कैप्टन विलियम हॉकिन्स 1608 में हेक्टर जहाज लेकर सूरत पहुँचे थे और उन्होंने जहाँगीर के दरबार में शाही फरमान प्राप्त करने का सफल प्रयास किया था।
2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में अपनी पहली व्यापारिक कोठी स्थापित की थी, और उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप से मसालों के व्यापार के स्थान पर सूती वस्त्रों के निर्यात को अत्यधिक बढ़ावा दिया था।
3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, तथा फ्रांसिस कैरो ने 1668 में सूरत में फ्रांसीसियों की पहली फैक्ट्री स्थापित की थी, जबकि उनकी दूसरी फैक्ट्री मसूलीपट्टम में स्थापित हुई थी।
4. डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी (डैनिश) ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री 1620 में तंजावुर जिले के ट्रैंकुबार (Tranquebar) में स्थापित की थी, और वे भारत में अपने धार्मिक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे, लेकिन अंततः उन्होंने अपने सभी भारतीय क्षेत्रों को 1845 में अंग्रेजों को बेच दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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जयप्रकाश नारायण (जेपी) और 1974 के छात्र आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 में बिहार के छात्रों द्वारा शुरू किए गए 'छात्र आंदोलन' का मुख्य कारण बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न की कमी और शैक्षणिक संस्थानों में भ्रष्टाचार था, जिसका नेतृत्व बाद में जयप्रकाश नारायण ने 'सम्पूर्ण क्रांति' के आह्वान के साथ स्वीकार किया था।
2. जयप्रकाश नारायण ने 5 जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का नारा दिया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और नैतिक परिवर्तन शामिल थे।
3. जेपी आंदोलन के दौरान ही पटना में 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' का गठन किया गया था, जिसके माध्यम से राज्य भर के छात्रों ने लोकतांत्रिक रूप से तानाशाही प्रवृत्तियों और विधानसभा भंग करने की मांग को लेकर आंदोलन का संचालन किया था।
4. आपातकाल (1975) की घोषणा के तुरंत बाद जयप्रकाश नारायण सहित देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, और जेपी को स्वास्थ्य कारणों से कभी भी नजरबंद या जेल में नहीं रखा गया था, बल्कि वे पूरी अवधि के दौरान खुलेआम घूमते रहे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के विभिन्न स्रोतों, महत्वपूर्ण अनुच्छेदों, अनुसूचियों तथा नगरीय स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान में 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) और 'व्यापार, वाणिज्य एवं समागम की स्वतंत्रता' के प्रावधान ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिए गए हैं, जबकि आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के स्थगन का प्रावधान जर्मनी के वीमर संविधान से लिया गया है।
2. संविधान की 11वीं और 12वीं अनुसूची को क्रमशः 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से जोड़ा गया था, जहाँ 11वीं अनुसूची में पंचायतों के लिए 29 कार्यात्मक विषयों का उल्लेख है, वहीं 12वीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के लिए 18 कार्यात्मक विषयों का प्रावधान किया गया है।
3. अनुच्छेद 243-ZJ के अंतर्गत सहकारिता समितियों के निदेशकों के बोर्ड में अधिकतम सदस्यों की संख्या 21 निर्धारित की गई है, तथा इसमें अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए एक सीट और महिलाओं के लिए दो सीटें आरक्षित करना अनिवार्य किया गया है।
4. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में नगर पंचायत (ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए), नगर परिषद (छोटे नगरीय क्षेत्रों के लिए) और नगर निगम (बड़े नगरीय क्षेत्रों के लिए) का गठन किया जाना अनिवार्य है, बशर्ते राज्यपाल द्वारा किसी औद्योगिक नगरी को इसके दायरे से मुक्त न किया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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