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BPSC TRE 4.0
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सत्रहवीं शताब्दी में भारत आने वाली विभिन्न यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों और उनके द्वारा स्थापित व्यापारिक बस्तियों (फैक्ट्रियों) के प्रारंभिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा 31 दिसंबर 1600 को राजपत्र (Charter) प्रदान किया गया था, तथा कैप्टन विलियम हॉकिन्स 1608 में हेक्टर जहाज लेकर सूरत पहुँचे थे और उन्होंने जहाँगीर के दरबार में शाही फरमान प्राप्त करने का सफल प्रयास किया था।
  2. 2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में अपनी पहली व्यापारिक कोठी स्थापित की थी, और उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप से मसालों के व्यापार के स्थान पर सूती वस्त्रों के निर्यात को अत्यधिक बढ़ावा दिया था।
  3. 3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, तथा फ्रांसिस कैरो ने 1668 में सूरत में फ्रांसीसियों की पहली फैक्ट्री स्थापित की थी, जबकि उनकी दूसरी फैक्ट्री मसूलीपट्टम में स्थापित हुई थी।
  4. 4. डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी (डैनिश) ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री 1620 में तंजावुर जिले के ट्रैंकुबार (Tranquebar) में स्थापित की थी, और वे भारत में अपने धार्मिक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे, लेकिन अंततः उन्होंने अपने सभी भारतीय क्षेत्रों को 1845 में अंग्रेजों को बेच दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। सत्रहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों के बाद डच, ब्रिटिश, डेनिश और फ्रांसीसी कंपनियों का भारत में आगमन हुआ। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को 1600 में चार्टर मिला और हॉकिन्स 1608 में सूरत पहुँचे। डचों ने 1605 में मसूलीपट्टम में पहली फैक्ट्री स्थापित की और वस्त्र निर्यात को प्राथमिकता दी। फ्रांसीसियों ने 1664 में कोल्बर्ट के प्रयासों से कंपनी बनाई और 1668 में सूरत तथा 1669 में मसूलीपट्टम में फैक्ट्रियां स्थापित कीं। डेनिश कंपनी ने 1620 में ट्रैंकुबार में अपनी पहली फैक्ट्री खोली थी। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए यूरोपीय कंपनियों के आगमन के इस ऐतिहासिक क्रम और उनकी नीतियों का गहन अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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→ भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व' (DPSP) तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये मुख्य रूप से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जो वादयोग्य (Justiciable) होने के कारण न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं। 2. आयरलैंड के संविधान से लिए गए राज्य के नीतिनिदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं, तथा अनुच्छेद 37 के अनुसार ये देश के शासन में मौलिक होने के साथ-साथ किसी भी न्यायालय द्वारा अनिवार्य रूप से प्रवर्तनीय (Justiciable) हैं। 3. मूल कर्त्तव्य (अनुच्छेद 51A) को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्त्तव्य हैं जिन्हें रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के संविधान से लिया गया है। 4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'शिक्षा का अधिकार' मूल अधिकार है, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था; इसी संशोधन के तहत अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को बदला गया तथा भाग-IVक में एक नया 11वां मूल कर्त्तव्य जोड़ा गया जो 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षण की जिम्मेदारी तय करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह प्रक्षेपण तकनीक और नैनो-प्रौद्योगिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के प्रक्षेपण वाहनों में उपयोग होने वाले क्रायोजेनिक इंजन (Cryogenic Engine) में तरल हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में तथा तरल ऑक्सीजन को ऑक्सीकारक के रूप में अत्यधिक निम्न तापमान पर प्रयोग किया जाता है, जो केवल उच्च थ्रस्ट प्रदान करने वाले उप-कक्षाीय (Sub-orbital) मिशनों के लिए ही अनिवार्य है। 2. 'स्टार्टअप ब्लूप्रिंट' के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित 'स्माल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल' (SSLV) को कम लागत में 500 किलोग्राम तक के उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए अभिकल्पित किया गया है, तथा इसमें तीव्र टर्नअराउंड समय की खूबी है। 3. नैनो-प्रौद्योगिकी के अंतर्गत कार्बन नैनोट्यूब (Carbon Nanotubes) अपनी उच्च तन्य शक्ति, विद्युत और उष्मीय चालकता के कारण अंतरिक्ष लिफ्ट (Space Elevator) के निर्माण तथा उन्नत कंपोजिट सामग्रियों में अत्यधिक उपयोगी माने जाते हैं। 4. ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) के विपरीत, भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली 'नाविक' (NavIC) में भू-स्थिर (GEO) और भू-तुल्यकालिक (GSO) कक्षाओं में स्थापित उपग्रहों का संयोजन उपयोग किया जाता है, जो भारतीय मुख्य भूमि और उसके आसपास 1,500 किलोमीटर के दायरे में सटीक स्थिति निर्धारण सेवा प्रदान करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia), घर्षण बल और सरल आवर्त गति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी दृढ़ पिंड का जड़त्व आघूर्ण केवल पिंड के कुल द्रव्यमान और घूर्णन अक्ष से कणों की लंबवत दूरियों पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि घूर्णन अक्ष की स्थिति अंतरिक्ष में कहाँ और किस दिशा में है। 2. गतिमान वस्तु पर कार्य करने वाला गतिक घर्षण बल (Kinetic Friction) हमेशा संपर्क तलों के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, तथा अभिलंब प्रतिक्रिया का मान बढ़ने पर गतिक घर्षण बल का मान घट जाता है। 3. जब कोई पिंड किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में ऊर्ध्वाधर तल के अंतर्गत गति करता है, तो वृत्त के उच्चतम बिंदु पर डोरी या ट्रैक में तनाव का न्यूनतम मान शून्य हो सकता है, बशर्ते वस्तु की चाल उस बिंदु पर न्यूनतम आवश्यक क्रांतिक चाल (Critical Velocity) के बराबर हो। 4. किसी सरल लोलक (Simple Pendulum) का आवर्तकाल उसके गोलक (Bob) के द्रव्यमान और आयाम पर निर्भर करता है, तथा यदि लोलक को पृथ्वी के केंद्र पर ले जाया जाए, तो प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण शून्य होने के कारण उसका आवर्तकाल अनंत हो जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, हड़प्पा सभ्यता के नगरीय नियोजन और वैदिक काल की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हड़प्पा सभ्यता के स्थलों में 'धोलावीरा' एकमात्र ऐसा स्थल है जो तीन भागों (किला, मध्य नगर और निचला नगर) में विभाजित था, तथा यहाँ से विशाल जलकुण्ड (Reservoir) और 'साइनेज बोर्ड' के रूप में लकड़ी के फ्रेम पर जड़े दस बड़े आकार के अक्षरों वाला एक अनोखा शिलालेख मिला है। 2. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द गाय का दूध दुहने वाली स्त्री के अर्थ में प्रयुक्त होता था, तथा इस काल में संपत्ति का मुख्य आधार भूमि न होकर मवेशी (गाय और घोड़े) थे, जिसके कारण गाय को 'अधन्या' (न मारे जाने योग्य) माना गया था। 3. उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज (लगभग 1000 ईसा पूर्व) के बाद कृषि अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आया, जिसके कारण इस काल के ग्रंथों (जैसे शतपथ ब्राह्मण) में कृषि से जुड़ी चारों क्रियाओं — जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई का विस्तृत उल्लेख मिलता है। 4. जैन धर्म के त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) और बौद्ध धर्म के अष्टमार्क मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) दोनों ही वेदों की सर्वोच्चता और यज्ञीय कर्मकांडों को अनिवार्य मानते हैं, तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत को पूरी तरह से नकारते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है? → सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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