बच्चों का पोषण एवं स्वास्थ्य
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मानव शरीर में विभिन्न विटामिनों, उनके रासायनिक नामों तथा उनकी कमी से होने वाले विकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विटामिन ए (रेटिनॉल) की कमी से 'क्सेरॉफ्थैल्मिया' (शूष्काक्ष्पाक) और 'रतौंधी' (Night Blindness) जैसी बीमारियाँ होती हैं, और यह वसा में घुलनशील विटामिन है जो यकृत (Liver) में संचित रहता है।
- 2. विटामिन बी-1 (थायमिन) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जिसमें तंत्रिका तंत्र और हृदय की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, तथा चावल को अत्यधिक पॉलिश करने से यह विटामिन नष्ट हो जाता है।
- 3. विटामिन सी (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) जल में घुलनशील विटामिन है, जिसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आना और घावों का देरी से भरना मुख्य लक्षण है, और यह मानव शरीर में प्रचुर मात्रा में स्वयं संश्लेषित होता है।
- 4. विटामिन डी (कैल्सीफेरॉल) एक हॉर्मोन की तरह भी कार्य करता है, जिसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' (सूखा रोग) और वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेशिया' नामक अस्थि रोग हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। विटामिन ए (रेटिनॉल) वसा में घुलनशील है जिसकी कमी से रतौंधी होती है; विटामिन बी-1 (थायमिन) की कमी से बेरी-बेरी होता है और पॉलिश किए चावल से इसका ह्रास होता है; विटामिन डी (कैल्सीफेरॉल) की कमी से बच्चों में रिकेट्स होता है। किंतु कथन 3 असत्य है क्योंकि विटामिन सी (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) मानव शरीर में संश्लेषित नहीं होता है, इसे बाहरी आहार (खट्टे फलों आदि) से प्राप्त करना अनिवार्य होता है। ऐसे ही और महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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मानव शरीर में संतुलित आहार और पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका के संदर्भ…
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मानव शरीर में विटामिन और उनके रासायनिक नामों के संदर्भ में…
Related Questions
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विटामिनों और उनके रासायनिक नामों तथा उनके अभाव से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जिसमें तंत्रिका तंत्र की कमजोरी और मांसपेशियों का पक्षाघात जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तथा यह जल में घुलनशील विटामिन है।
2. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक एंटीऑक्सीडेंट विटामिन है, जिसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आना और घाव भरने में देरी होना मुख्य लक्षण हैं, और यह शरीर में संचित रहता है।
3. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा द्वारा किया जाता है, और इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' तथा वयס्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' रोग हो जाता है।
4. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) का रासायनिक नाम है, जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है, और इसकी कमी से 'परनिशियस एनीमिया' (घातक अरक्तता) नामक रोग होता है, क्योंकि यह लाल रक्त कोशिकाओं के परिपक्वता के लिए आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर में संतुलित आहार और विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कार्बोहाइड्रेट और वसा शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक तत्व हैं, जहाँ 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, जो कि समान मात्रा में कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की तुलना में लगभग दोगुनी से भी अधिक है।
2. प्रोटीन को 'बॉडी बिल्डिंग फूड' (शरीर निर्माता भोजन) कहा जाता है, जिसका मुख्य कार्य ऊतकों की मरम्मत और नई कोशिकाओं का निर्माण करना है, तथा इसकी कमी से बच्चों में क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) और मैरासमस (Marasmus) जैसे गंभीर रोग उत्पन्न होते हैं।
3. विटामिन 'ए' (रेटिनॉल) एक जल-विघुलनशील (Water-soluble) विटामिन है, जिसकी कमी से रतौंधी (Night blindness) और जीरोफथैल्मिया (Xerophthalmia) नामक नेत्र रोग हो जाता है, जबकि विटामिन 'सी' और 'बी' कॉम्प्लेक्स वसा-विघुलनशील होते हैं।
4. खनिज लवणों में आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है जिसे घेंघा (Goitre) रोग कहते हैं, और लौह तत्व (Iron) की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन के संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होती है जिससे रक्ताल्पता (Anemia) नामक विकार उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) तथा संस्थागत संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, और यह संस्था आपदा प्रबंधन के प्रति 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) दृष्टिकोण के स्थान पर 'निवारक एवं पूर्ववर्ती' (Proactive and Prevention-oriented) दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।
2. 'सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' (2015-2030) के वैश्विक लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक वैश्विक मानव मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान और आर्थिक क्षति में भारी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा आपदा जोखिम को कम करने के लिए ग्रामीण स्तर पर 'आपदा मित्र' और 'आपदा सखी' जैसी सामुदायिक प्रशिक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बाढ़ और वज्रपात जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना है।
4. भारत में किसी भी आपदा के पश्चात राहत कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का शत-प्रतिशत वित्त पोषण केवल राज्य सरकारों द्वारा अपने आंतरिक संसाधनों से किया जाता है, तथा इसमें केंद्र सरकार की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) तथा संस्थागत संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) के पदेन अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, और यह संस्था आपदा प्रबंधन के प्रति 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) दृष्टिकोण के स्थान पर 'निवारक, पूर्ववर्ती एवं जोखिम-सूचित' (Proactive and Prevention-oriented) दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।
2. 'सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' (2015-2030) के वैश्विक लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक वैश्विक मानव मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान और आर्थिक क्षति में भारी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा आपदा जोखिम को कम करने के लिए ग्रामीण स्तर पर 'आपदा मित्र' और 'आपदा सखी' जैसी सामुदायिक प्रशिक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बाढ़ और वज्रपात जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना है।
4. भारत में किसी भी आपदा के पश्चात राहत कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का शत-प्रतिशत वित्त पोषण पूरी तरह से राज्य सरकारों द्वारा अपने आंतरिक कर राजस्व से किया जाता है, तथा इसमें केंद्र सरकार की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बालक के विकास में 'प्रकृति बनाम पोषण' (Nature vs. Nurture) विवाद किससे संबंधित है?
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मानव शरीर में हॉर्मोन्स, विटामिन और विभिन्न जैविक अणुओं (Biomolecules) के कार्य तथा उनकी कमी से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इंसुलिन (Insulin) एक पेप्टाइड हॉर्मोन है जो अग्नाशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है, और यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करते हुए ग्लाइकोजेनेसिस की प्रक्रिया को प्रेरित करता है।
2. विटामिन D, जिसे 'कैल्सीफेरोल' भी कहा जाता है, एक वसा-में-घुलनशील विटामिन है जो शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है, तथा इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' (Rickets) और वयס्कों में 'ऑस्टियोमलेशिया' (Osteomalacia) नामक रोग हो जाता है।
3. 'थायरोक्सिन' (Thyroxine) हॉर्मोन के संश्लेषण के लिए आयोडीन अनिवार्य होता है, जिसकी कमी से गॉइटर (घेंघा) रोग होता है, जबकि वयस्क अवस्था में इस हॉर्मोन की अत्यधिक कमी से 'मिक्सोएडिमा' (Myxedema) नामक स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
4. रुधिर में हीमोग्लोबिन एक लोहे युक्त प्रोटीन है जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है, तथा इसकी कमी से होने वाला एनीमिया (रक्तल्पता) हमेशा केवल विटामिन B12 की कमी के कारण ही होता है, इसमें आयरन या फोलिक एसिड की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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