भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) तथा संस्थागत संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, और यह संस्था आपदा प्रबंधन के प्रति 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) दृष्टिकोण के स्थान पर 'निवारक एवं पूर्ववर्ती' (Proactive and Prevention-oriented) दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।
- 2. 'सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' (2015-2030) के वैश्विक लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक वैश्विक मानव मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान और आर्थिक क्षति में भारी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- 3. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा आपदा जोखिम को कम करने के लिए ग्रामीण स्तर पर 'आपदा मित्र' और 'आपदा सखी' जैसी सामुदायिक प्रशिक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बाढ़ और वज्रपात जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना है।
- 4. भारत में किसी भी आपदा के पश्चात राहत कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का शत-प्रतिशत वित्त पोषण केवल राज्य सरकारों द्वारा अपने आंतरिक संसाधनों से किया जाता है, तथा इसमें केंद्र सरकार की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत NDMA का गठन किया गया है जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और यह पूर्ववर्ती दृष्टिकोण पर कार्य करती है। सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए वैश्विक समझौता है। बिहार में BSDDMA द्वारा 'आपदा मित्र' जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्त पोषण का निश्चित अनुपात (सामान्य राज्यों के लिए 75:25 और पूर्वोत्तर तथा पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10) होता है, न कि शत-प्रतिशत राज्य का वित्त पोषण। इस प्रकार की उच्च स्तरीय परीक्षा की तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।