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जीन पियाजे
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बच्चों के संज्ञानात्मक विकास और भाषा अर्जन के संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) और लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सिद्धांतों के तुलनात्मक अध्ययन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जीन पियाजे का मानना था कि बच्चों में विचार (Thought) का विकास भाषा से पहले होता है और भाषा उनके संज्ञानात्मक विकास का ही एक उत्पाद है, जबकि लेव वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा और विचार शुरुआत में स्वतंत्र होते हैं, लेकिन लगभग दो वर्ष की आयु के बाद वे आपस में मिल जाते हैं।
  2. 2. पियाजे ने बच्चों को 'सक्रिय अन्वेषक' (Active Explorers) माना है जो अपने भौतिक पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया करके स्वयं ज्ञान का निर्माण करते हैं, जबकि वाइगोत्स्की ने बच्चे के संज्ञानात्मक विकास में सामाजिक-सांस्कृतिक अंतःक्रिया, भाषा और 'मोर नॉलेजेबल अदर' (MKO) की भूमिका को सर्वोपरि माना है।
  3. 3. पियाजे के अनुसार 'अहंकेन्द्रित वाक्' (Egocentric Speech) बच्चों की अपरिपक्वता को दर्शाता है जो किसी अन्य के दृष्टिकोण को समझने में असमर्थ होते हैं, जबकि वाइगोत्स्की इसे 'व्यक्तिगत वाक्' (Private Speech) कहते हैं जो बच्चों को अपने व्यवहार को विनियमित (Self-regulation) करने में सहायता प्रदान करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्ण रूप से सत्य हैं। 1. जीन पियाजे के अनुसार 'विचार पहले आता है और भाषा बाद में', जबकि वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा और विचार शुरुआती जीवन में अलग-अलग मार्ग अपनाते हैं और बाद में आपस में मिल जाते हैं। 2. पियाजे ने बच्चों को नन्हा वैज्ञानिक (Active Builder) कहा है जो भौतिक दुनिया से सीखते हैं, वहीं वाइगोत्स्की ने सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश और MKO (More Knowledgeable Other) को मुख्य आधार माना है। 3. पियाजे जिसे 'Egocentric Speech' कहते हैं (जो आत्म-केंद्रित चिंतन का प्रतीक है), वाइगोत्स्की उसी को 'Private Speech' (व्यक्तिगत वाक्) मानते हैं जो बच्चे को अपने कार्यों की योजना बनाने और उसे नियंत्रित करने में मदद करता है।
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