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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

🎯 367 Mock Tests Khelein

वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के अंतर्संबंधों तथा उस कालखंड की राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब देश के शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया, तब भूमिगत प्रतिरोध का नेतृत्व करने वाले समाजवादी नेताओं (जैसे राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन और जयप्रकाश नारायण) ने 'भूमिगत कांग्रेस रेडियो' के माध्यम से सुभाष चंद्र बोस की गुप्त रूप से प्रसारित होने वाली राष्ट्रवादी उद्बोधनों को देशवासियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आजाद हिंद फौज' के पुनर्गठन के समय सुभाष चंद्र बोस ने जब बागडोर संभाली, तब उन्होंने जापान के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा था। 3. आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजीमेंट, जो पूरी तरह महिलाओं की एक लड़ाकू इकाई थी, का गठन मुख्य रूप से जापान की शाही सेना के दबाव में किया गया था ताकि युद्धबंदियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके, और इस रेजीमेंट ने इंफाल अभियान के दौरान प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश सेना के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया था। 4. भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 'पीपुल्स वॉर' (जनता के युद्ध) के वैचारिक सिद्धांत के आधार पर ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का समर्थन किया था, जिसके कारण उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष और भारत छोड़ो आंदोलन—दोनों का कड़ा विरोध किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके संगठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार तीर्थंकर मल्लिनाथ एक पुरुष थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुसार वे एक स्त्री थीं। 2. बौद्ध धर्म में 'प्रतीतसमुत्पाद' (प्रतीत्यसमुत्पाद) का सिद्धांत कार्य-कारण संबंध को स्पष्ट करता है, जिसके अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु किसी कारण से उत्पन्न होती है और उसी पर निर्भर करती है। 3. जैन धर्म में आत्मा के अस्तित्व को पूर्णतः अस्वीकार किया गया है, जबकि बौद्ध धर्म में 'अनात्मवाद' के सिद्धांत के साथ-साथ पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांत को भी स्वीकार किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरत विभाजन (1907) और उसके पश्चात उत्पन्न राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूरत अधिवेशन में गरम दल के नेता लोकमान्य तिलक को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जबकि नरम दल के नेता रास बिहारी घोष को इस पद पर आसीन करने के पक्ष में थे। 2. सूरत विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने उग्रवादी राष्ट्रवादी नेतृत्व के विरुद्ध अत्यंत दमनकारी नीतियां अपनाईं, जिसके तहत वर्ष 1908 में लोकमान्य तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए मांडले (बर्मा) भेज दिया गया। 3. कांग्रेस के सूरत विभाजन के तुरंत बाद वर्ष 1908 के मद्रास अधिवेशन में नरमपंथियों ने कांग्रेस के संविधान में एक नया संशोधन किया, जिसके तहत कांग्रेस की सदस्यता के लिए ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति निष्ठा की शपथ को अनिवार्य बना दिया गया, ताकि उग्रवादियों के प्रवेश को पूरी तरह रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा पुनर्गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के मध्य वैचारिक एवं रणनीतिक संपर्कों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जेल में बंद था, तब उषा मेहता द्वारा संचालित 'भूमिगत कांग्रेस रेडियो' पर सुभाष चंद्र बोस की गुप्त रूप से प्रसारित होने वाली ओजस्वी आवाज को नियमित रूप से प्रसारित किया जाता था, जिससे देशवासियों में प्रतिरोध की भावना प्रबल हुई। 2. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से जापान पहुँचने के पश्चात् 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की विचारधारा को त्याग दिया और आजाद हिंद फौज की कमान संभालते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा। 3. आजाद हिंद फौज के अंतर्गत गठित 'रानी झांसी रेजीमेंट' पूरी तरह महिलाओं की एक लड़ाकू इकाई थी, जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था और इस रेजीमेंट ने इम्फाल अभियान के दौरान ब्रिटिश सेना के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय सैन्य सहभागिता की थी। 4. भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष और कांग्रेस के भारत छोड़ो आंदोलन—दोनों का पूर्ण समर्थन किया क्योंकि वे इसे साम्राज्यवादी युद्ध के विरुद्ध अंतिम मुक्ति संघर्ष मानते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के आर्थिक प्रभावों और उनकी प्रशासनिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के अंतर्गत भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, जिससे ब्रिटिश सरकार को तो वित्तीय स्थिरता प्राप्त हुई, किंतु जमींदारों द्वारा अत्यधिक उत्पीड़न और 'सूर्यास्त कानून' के कारण पारंपरिक कृषक वर्ग भूमिहीन श्रमिकों में बदल गया। 2. थॉमस मुनरो द्वारा दक्षिणी और पश्चिमी भारत में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में सरकार और कृषक (रयत) के मध्य सीधा संबंध स्थापित हुआ, जिसमें भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया, परंतु अत्यधिक राजस्व माँग और सूखा या अकाल के समय भी कर में कोई छूट न मिलने के कारण किसान महाजनों के ऋण जाल में फंस गए। 3. महालवारी व्यवस्था, जिसे उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू किया गया था, के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसान को इकाई न मानकर पूरे ग्राम या ग्राम समूह (महाल) को इकाई माना गया तथा राजस्व भुगतान की सामूहिक जिम्मेदारी पूरे ग्राम समुदाय पर डाली गई। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर वाणिज्यीकरण (Commercialization) हुआ, जिसके कारण किसानों ने स्वेच्छा से अपनी खाद्यान्न फसलों को छोड़कर कपास, नील और जूट जैसी नकदी फसलों का उत्पादन शुरू किया और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था अत्यधिक समृद्ध हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गायों का दुग्ध दोहन करती थी, और इस काल में सभा एवं समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता होती थी। 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म पर आधारित हो गया तथा कृषि अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण तांबे (लोहित अयस) के साथ-साथ लोहे (कृष्ण अयस) का व्यापक प्रयोग प्रारंभ हुआ, जिससे समाज में क्षेत्रीय राज्यों (जनपदों) का उदय हुआ। 3. शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में गंधार, केकय और पांचाल राज्यों के साथ-साथ कृषि की चारों अवस्थाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, जबकि इसमें विदेघ माधव की कथा का भी उल्लेख है जिसके अनुसार अग्नि ने सरस्वती नदी तक के क्षेत्र को जलाया था। 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'अरण्यक' ग्रंथों को 'रहस्य पुस्तकें' भी कहा जाता है, जिनकी रचना वनों में एकांत में की गई थी और ये मुख्य रूप से यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर दार्शनिक चिंतन तथा आत्मविद्या पर बल देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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जून 1947 की माउंटबेटन योजना तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को अपने-अपने प्रांतों के विभाजन के प्रश्न पर मतदान करने का अधिकार दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप दोनों प्रांतों के मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों ने पश्चिम पंजाब और पूर्वी बंगाल को भारत से अलग करने के पक्ष में मतदान किया। 2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में किस ओर शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व वाले 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने सक्रिय रूप से भाग लेकर पाकिस्तान में शामिल होने का समर्थन किया था। 3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 में यह प्रावधान किया गया था कि 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को समाप्त कर दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—की स्थापना की जाएगी, और दोनों डोमिनियंस के लिए गवर्नर-जनरल के पद पर केवल अलग-अलग व्यक्तियों की नियुक्ति करना अनिवार्य किया गया था ताकि दोनों देशों की संप्रभुता सुरक्षित रहे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में पहला पुर्तगाली गवर्नर था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करना और व्यापारिक एकाधिकार सुनिश्चित करना था। 2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया था और पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया था। 3. नुनीकुओ (Nuno da Cunha) के गवर्नर बनने के बाद पुर्तगालियों ने वर्ष 1530 में अपना आधिकारिक मुख्यालय कोचीन से स्थानांतरित कर गोवा बना लिया तथा हुगली और बेसिन के क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव फैलाया। 4. वास्को डी गामा की भारत की दूसरी यात्रा (वर्ष 1502) के दौरान उसने कोचीन में पुर्तगालियों की पहली फैक्ट्री या कारखाने की स्थापना की थी, जबकि पुर्तगालियों द्वारा भारत में निर्मित पहला दुर्ग 'सैन एंजेलो किला' कोचीन में ही बनाया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा भारत के प्रशासन में किए गए महत्वपूर्ण परिवर्तनों और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1858) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के अधीन कर दिया गया तथा 'कम्पनी के शासन' को समाप्त कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त करके उनके समस्त अधिकार भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद के दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा 1 नवंबर 1858 को पढ़ा गया था) के माध्यम से यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों को भविष्य में अधिग्रहित नहीं करेगी तथा देशी राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार (Adoptive Rights) को मान्यता दी गई। 3. इस घोषणा में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति को औपचारिक रूप से त्यागने की घोषणा की गई, धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति का पालन करने का वचन दिया गया तथा बिना किसी भेदभाव के नस्ल, जन्म या धर्म के आधार पर योग्यता के अनुसार सरकारी सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने का आश्वासन दिया गया। 4. विद्रोह के परिणामों के स्वरूप ब्रिटिश सेना के पुनर्गठन के तहत यूरोपीय सैनिकों और भारतीय सैनिकों के अनुपात को जानबूझकर बहुत कम कर दिया गया, ताकि भविष्य में भारतीय सिपाही कभी ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध दोबारा विद्रोह न कर सकें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध में विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1857 को चिन्हाट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने के बाद हुई, जहाँ बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर सत्ता संभाली और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी का नेतृत्व किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जिहाद का आह्वान किया और रोहिलखंड तथा अवध के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेनाओं को कड़ी चुनौती देते हुए छापामार युद्ध का सफल संचालन किया। 3. लखनऊ की अंतिम घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट की सहायता से शहर पर पुनः अधिकार प्राप्त किया, जिसके उपरांत बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें भारत में ही एक सुरक्षित जागीर प्रदान की गई। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों द्वारा पचास हजार रुपये का भारी इनाम रखा गया था, और अंततः पुवांयां के राजा जगन्नाथ सिंह के यहाँ विश्वासघातपूर्ण धोखे के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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