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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लॉर्ड डलहौजी द्वारा अपनाई गई 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, जैतपुर, संबलपुर, उदयपुर, झांसी और नागपुर जैसी रियासतों का विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासकों में यह गहरी आशंका उत्पन्न हो गई कि ब्रिटिश साम्राज्य किसी भी रियासत को कभी भी समाप्त कर सकता है। 2. वर्ष 1852 में स्थापित 'इनाम आयोग' (Inam Commission) का मुख्य उद्देश्य जागीरों और कर-मुक्त भूमि के शीर्षकों (Title deeds) की जाँच करना था, जिसके परिणामस्वरूप हज़ारों जागीरों को जब्त कर लिया गया और ग्रामीण अभिजात वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजों का कट्टर विरोधी बन गया। 3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का तीव्र पतन हुआ, जिससे कारीगरों और दस्तकारों पर भारी आर्थिक संकट आया, किंतु ब्रिटिश लगान व्यवस्था के कारण कृषि क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। 4. लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act of 1856) के तहत नए सैनिकों के लिए समुद्र पार करके विदेशों में युद्ध लड़ने जाना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसने भारतीय सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं और रूढ़ियों को गहरी ठेस पहुँचाई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के बदले कर-मुक्त व्यापार करने का अधिकार मिला था, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार (दस्तक) पर भी अवैध रूप से लागू कर दिया था। 2. अलीवर्दी खान के उत्तराधिकारी सिराजुद्दौला ने कलकत्ता (आलिनगढ़) पर आक्रमण कर मार्च 1756 में उस पर अधिकार कर लिया था और इस संघर्ष के दौरान प्रसिद्ध 'कालकोठरी की त्रासदी' (Black Hole Tragedy) की घटना घटी थी, जिसका समकालीन फारसी वृत्तांत जे.जे. हॉलवेल द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 3. प्लासी के युद्ध (23 जून 1757) में सिराजुद्दौला की सेना का एक बड़ा हिस्सा मीर जाफर के नेतृत्व में अंग्रेजों से मिल जाने के कारण युद्ध मैदान से अलग रहा, जिसके परिणामस्वरूप रॉबर्ट क्लाइव ने इस युद्ध को आसानी से जीत लिया और मीर जाफर को बंगाल का अगला नवाब बनाया गया। 4. बक्सर के युद्ध (1764) के उपरांत रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय और अवध के नवाब शुजाउद्दोला के साथ इलाहाबाद की संधियाँ कीं, जिसके तहत कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की वास्तविक दीवानी अधिकार प्राप्त हो गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजूमदार ने अपनी पुस्तक 'द सिपोय म्यूटनी एंड द रिवोल्ट ऑफ 1857' में यह स्पष्ट मत व्यक्त किया था कि 1857 का यह महान विद्रोह "न तो पहला, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम था"। 2. वी.डी. सावरकर ने अपनी कृति 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित तरीके से लड़ा गया भारत का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया था। 3. सर जॉन लॉरेन्स और सी.ई.आर. सीले जैसे ब्रिटिश इतिहासकारों के अनुसार 1857 का विद्रोह मूल रूप से एक सुनियोजित राष्ट्रीय राजनीतिक षड्यंत्र था जिसका मुख्य उद्देश्य विदेशी ब्रिटिश सत्ता को समाप्त करना था। 4. बंकिनचंद्र चटर्जी के समकालीन विचारों और ब्रिटिश अधिकारी टी.आर. होम्स के मत के अनुसार यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता' के बीच का एक निर्णायक संघर्ष था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन, बंगाल और पंजाब विधानसभाओं के प्रांतीय विभाजन तथा उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) एवं सिलहट में जनमत संग्रह कराने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था। 2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन की स्थापना का प्रावधान किया गया, तथा दोनों देशों के लिए सीमा निर्धारण हेतु सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन किया गया था। 3. माउंटबेटन योजना के तहत यह भी तय किया गया था कि भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद ब्रिटिश क्राउन का भारतीय रियासतों पर सर्वोच्च अधिकार (Paramountcy) समाप्त हो जाएगा, और रियासतों को यह छूट होगी कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों अथवा अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बनाए रखें। 4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं को निर्धारित करने वाले रेडक्लिफ पुरस्कार (Radcliffe Award) की घोषणा 15 अगस्त 1947 से पहले ही सार्वजनिक कर दी गई थी, जिससे स्वतंत्रता के दिन दोनों नवजात राष्ट्रों में किसी भी प्रकार की हिंसा या असमंजस की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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महात्मा गांधी के भारत के शुरुआती सत्याग्रहों—विशेष रूप से चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—तथा असहयोग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल संघर्ष किया गया। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भू-राजस्व वसूले जाने के विरोध में किसानों का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल पहली बार गांधीजी के संपर्क में आए तथा उनके एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरे। 3. फरवरी 1922 में घटित 'चौरी-चौरा' की हिंसक घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने नागपुर में आयोजित कांग्रेस की बैठक में एकतरफा रूप से <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/असहयोग_आंदोलन" target="_blank" rel="noopener">असहयोग आंदोलन</a> को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी थी, जिससे उस समय के अधिकांश युवा राष्ट्रवादी नेता अत्यधिक संतुष्ट और प्रसन्न थे। 4. असहयोग आंदोलन के दौरान ही पहली बार भारतीय राजनीति में व्यापक स्तर पर ग्रामीण किसानों, महिलाओं और मध्यम वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हुई, जिसने ब्रिटिश शासन को पहली बार एक राष्ट्रव्यापी चुनौती दी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों (नरम दल काल) तथा बाद में उत्पन्न हुए वैचारिक मतभेदों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बनर्जी) की कार्यपद्धति '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/याचिका" target="_blank" rel="noopener">याचिका</a> (Petition) और प्रोटेस्ट (Protest) पर आधारित थी, तथा उनका मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के प्रस्ताव को बंगाल तक ही सीमित रखने का निर्णय लिया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक असंतुष्ट हुए। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के बीच हुए तीव्र वैचारिक संघर्ष के कारण कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया। 4. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में ए.वी. ह्यूम के विशेष प्रयासों से कांग्रेस के दोनों धड़ों और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता संपन्न हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर रहकर क्रमिक सुधार और स्वशासन प्राप्त करना था, जिसके लिए उन्होंने मुख्य रूप से '3P' (Prayer, Petition और Protest) की पद्धति पर भरोसा किया। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरुप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें अंग, मगध, वज्जी और मल्ल जैसे महाजनपद शामिल थे, और इनमें से वज्जी तथा मल्ल संघों में राजतांत्रिक शासन प्रणाली के स्थान पर गणतंत्रात्मक (Sangha/Gana) व्यवस्था प्रचलित थी। 2. मगध महाजनपद के शुरुआती उत्कर्ष में उसकी आरंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) की सामरिक और भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था, क्योंकि यह पाँच पहाड़ियों—वैभवगिरि, गृध्रकूट, ऋतगिरि, वियुपुल और सोनागिरि—से घिरी हुई एक प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित राजधानी थी। 3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और साम्राज्यवादी विजयों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने कौशल, मल्ल और वज्जी राजवंशों में विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की तथा अंग महाजनपद को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था। 4. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक (ककवर्ण) के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में बौद्ध धर्म की द्वितीय संगीति (Council) का आयोजन किया गया था, और इसी वंश के शासनकाल के दौरान मगध ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी अवंती महाजनपद को पूरी तरह पराजित कर अपने अधीन कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दोहती थी, तथा इस काल में कबीले के मुखिया को 'राजनीन्' या 'गोपा' कहा जाता था। 2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति नामक लोकतांत्रिक संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा, और शतपथ ब्राह्मण में समिति को प्रजापति की दो पुत्रियों के रूप में वर्णित किया गया है। 3. वैदिककालीन दर्शनों में 'सांख्य दर्शन' के प्रवर्तक महर्षि कपिल माने जाते हैं, जो सभी आस्तिक दर्शनों में सबसे प्राचीन है और इसके अनुसार सृष्टि का निर्माण प्रकृति और पुरुष के मेल से हुआ है। 4. वैदिक साहित्य में प्रयुक्त 'निष्म' और 'शतमान' शब्द शुरुआती दौर में विनिमय के साधन या आभूषण के रूप में प्रयुक्त होने वाली मूल्यवान धातु की मुद्राएँ थीं, जिनका उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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बिहार के अन्य क्षेत्रों—विशेष रूप से पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में 1857 के विद्रोह के घटनाक्रम और उसके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष में अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था, किंतु ब्रिटिश अधिकारियों ने शीघ्र ही इस विद्रोह को कुचलकर पीर अली खां को फाँसी दे दी थी। 2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके आरा की ओर कूच किया था, जहाँ उन्होंने कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में भी 1857 के विद्रोह की सुगबुगाहट तेज हो गई थी, जहाँ मुजफ्फरपुर में यूरोपीय अधिकारियों और प्रिंगल महोदय के खिलाफ असंतोष फूटा था, जबकि छपरा में विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय जमींदारों ने ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी भवनों को निशाना बनाया था। 4. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने बिहार में बढ़ते विद्रोही तेवरों को दबाने के लिए अत्यधिक दमनकारी और क्रूर नीतियां अपनाई थीं, जिसके तहत उसने पटना के मौलवी अहमदुल्लाह, वारिस अली और मोहम्मद हुसैन जैसे प्रमुख संदिग्ध मुस्लिम विद्वानों को षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार कर मृत्युदंड दे दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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