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History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के अंतर्संबंधों तथा उस कालखंड की राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब देश के शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया, तब भूमिगत प्रतिरोध का नेतृत्व करने वाले समाजवादी नेताओं (जैसे राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन और जयप्रकाश नारायण) ने 'भूमिगत कांग्रेस रेडियो' के माध्यम से सुभाष चंद्र बोस की गुप्त रूप से प्रसारित होने वाली राष्ट्रवादी उद्बोधनों को देशवासियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  2. 2. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आजाद हिंद फौज' के पुनर्गठन के समय सुभाष चंद्र बोस ने जब बागडोर संभाली, तब उन्होंने जापान के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा था।
  3. 3. आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजीमेंट, जो पूरी तरह महिलाओं की एक लड़ाकू इकाई थी, का गठन मुख्य रूप से जापान की शाही सेना के दबाव में किया गया था ताकि युद्धबंदियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके, और इस रेजीमेंट ने इंफाल अभियान के दौरान प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश सेना के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया था।
  4. 4. भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 'पीपुल्स वॉर' (जनता के युद्ध) के वैचारिक सिद्धांत के आधार पर ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का समर्थन किया था, जिसके कारण उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष और भारत छोड़ो आंदोलन—दोनों का कड़ा विरोध किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भूमिगत नेताओं ने उषा मेहता के भूमिगत रेडियो के साथ-साथ सुभाष चंद्र बोस की बर्लिन और टोक्यो से प्रसारित होने वाली राष्ट्रवादी आवाजों और संदेशों का प्रचार किया था। कथन 2 सही है; सुभाष चंद्र बोस ने दिसंबर 1943 में अंडमान और निकोबार द्वीपों की यात्रा की और उनका नाम 'शहीद' और 'स्वराज' रखा। कथन 3 गलत है क्योंकि 'रानी झांसी रेजीमेंट' पूरी तरह महिलाओं की एक सक्रिय लड़ाकू इकाई थी, जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल (कैप्टन लक्ष्मी) ने किया था और इस यूनिट ने युद्ध के दौरान मोर्चे पर सैन्य गतिविधियाँ भी संभाली थीं। कथन 4 सही है, क्योंकि सोवियत संघ के द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल होने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 'पीपुल्स वॉर' की नीति अपनाई थी और कांग्रेस के 1942 के आंदोलन तथा बोस के सशस्त्र प्रयासों का विरोध किया था। इस ऐतिहासिक कालखंड के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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