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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, व्यापार और नगर योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस सभ्यता की लिपि 'भावचित्रात्मक' (Pictographic) थी, जो आमतौर पर दाईं से बाईं ओर (Boustrophedon शैली में पहली पंक्ति दाईं से बाईं और दूसरी बाईं से दाईं) लिखी जाती थी, और इसमें सर्वाधिक संख्या में यू-आकार (U-shaped) तथा मछली के चिह्न पाए गए हैं। 2. लोथल और चान्हूड़ो दोनों ही स्थल सिंधु सभ्यता के प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे, जहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) मिले हैं, किंतु चान्हूड़ो एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार के दुर्ग (Citadel) का अवशेष प्राप्त नहीं हुआ है। 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'पशुपतिनाथ' (प्रोटो-शिव) की मुहर पर कुल चार पशुओं - बाघ, हाथी, गेंडा और भैंसा का अंकन मिलता है, तथा इस मुहर के आसन के नीचे दो हिरण भी बैठे हुए चित्रित किए गए हैं। 4. सिंधु सभ्यता के लोग विदेशी व्यापार के माध्यम से मेसोपोटामिया, ओमान (मगन) और बहरीन (दिलमुन) के साथ संपर्क में थे, जिसकी पुष्टि मेसोपोटामिया के अभिलेखों में प्रयुक्त 'मेलूहा' (Meluhha) शब्द से होती है, जिसे इतिहासकारों ने सिंधु क्षेत्र के लिए ही संदर्भित माना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी का विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासकों और अभिजात वर्ग में यह गहरी असुरक्षा फैल गई कि ब्रिटिश साम्राज्य किसी भी रियासत को कभी भी समाप्त कर सकता है। 2. वर्ष 1852 का 'इनाम आयोग' (Inam Commission) मुख्य रूप से उन जागीरों और कर-मुक्त भूमि की जाँच के लिए स्थापित किया गया था जिनके पास वैध शीर्षक विलेख (Title Deeds) नहीं थे, जिसके परिणामस्वरूप हजारों जागीरों को जब्त कर लिया गया और ग्रामीण अभिजात वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजों का कट्टर विरोधी बन गया। 3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिसके चलते कारीगरों और दस्तकारों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ पड़ा, किंतु कृषि क्षेत्र पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर बनी रही। 4. लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act of 1856) के तहत नए सैनिकों के लिए समुद्र पार करके अंग्रेजों के लिए विदेशों में युद्ध लड़ने जाना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसने भारतीय सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं और रूढ़ियों को गहरी ठेस पहुँचाई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध में विद्रोह का नेतृत्व करती हुई बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिष कादिर को नवाब घोषित कर दिया था और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का संचालन करते हुए अंततः नेपाल की तराई में शरण ली थी। 2. 'फैजाबाद के मौлк' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को परास्त किया था, तथा अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः पुवायाँ के राजा के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा घेरकर मार दिया गया था। 4. सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा लखनऊ पर पुनः अधिकार कर लिए जाने के बाद, बेगम हजरत महल ने रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर दिल्ली पर आक्रमण करने की योजना बनाई थी, जिसमें उन्हें पूर्ण सफलता मिली थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में ब्रिटिश सत्ता के पुनरुद्धार और विद्रोही गतिविधियों के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था, जिन्हें अंततः पुवायाँ के राजा के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा घेरकर मार दिया गया था। 2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करने वाले खान बहादुर खान ने एक स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी, किंतु सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा बरेली पर पुनः अधिकार कर लिए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और कोतवाली के सामने सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। 3. इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की बागडोर संभाली थी और सरकारी खजाने पर अधिकार कर लिया था, किंतु कर्नल नील (Colonel James Neill) ने अत्यंत क्रूरता के साथ वहाँ के विद्रोह को कुचल दिया, जिसके बाद लियाकत अली गिरफ्तार कर लिए गए और उन्हें आजीवन अंडमान निष्कासित कर दिया गया था। 4. इन तीनों ही महत्वपूर्ण केंद्रों में विद्रोह के दमन के उपरांत ब्रिटिश सेनापतियों ने अवध और रोहिलखंड क्षेत्र के विद्रोही नवाबों और जमींदारों के प्रति उदारता की नीति अपनाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि व्यवस्था और प्रशासनिक शब्दावली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में 'भूमि अनुदान' (Land Grants) की प्रथा का विस्तार बड़े पैमाने पर हुआ, जिसके तहत ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि को 'अग्रहार' कहा जाता था, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों को नगद वेतन के स्थान पर राजस्व अधिकारों से युक्त भूमि दी जाती थी। 2. इस काल में कृषि भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'क्षेत्र' (कृषि योग्य भूमि), 'वापस' या 'वाप्र' (बंजर भूमि), 'अपराधहत' (बिना जोती गई जंगली भूमि) तथा 'गोपथ' (चारागाह भूमि) जैसे विभिन्न प्रकारों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। 3. गुप्तकालीन राजस्व व्यवस्था में 'उद्रङ्ग' एक प्रकार का स्थायी भू-कर था जो किसानों से लिया जाता था, जबकि 'उपरिकर' एक अस्थायी कृषकों या बटाईदारों पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर था। 4. गुप्त सम्राटों ने इतिहास में सबसे बड़ी मात्रा में शुद्ध स्वर्ण मुद्राएं जारी की थीं, जिन्हें अभिलेखों में 'दीनार' कहा गया है, तथा इन स्वर्ण मुद्राओं में मिलावट का स्तर कुषाण काल की तुलना में अत्यंत न्यूनतम और उत्कृष्ट था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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गुप्तकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, प्रांतीय विभाजन और न्यायिक संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त प्रशासन में साम्राज्य का सबसे बड़ा प्रांतीय विभाजन 'देश' या 'भुक्ति' कहलाता था, जिसका प्रमुख 'उपर्युक्त' या 'गोप्त्र' नामक अधिकारी होता था, और भुक्तियों के अधीन 'विषय' (जिला) होते थे जिनका प्रशासन 'विषयापति' संभालता था। 2. गुप्तकालीन न्याय व्यवस्था में राजा सर्वोच्च न्यायाधीश होता था, किंतु स्थानीय स्तर पर श्रेणी (गिल्ड), पूग और कुल जैसी न्यायिक संस्थाएँ भी विवादों का निपटारा करती थीं, और इस काल में सिविल और क्रिमिनल मामलों (दीवानी और फौजदारी) का पूरी तरह से पृथक्करण कर दिया गया था। 3. गुप्त साम्राज्य की नगर प्रशासन व्यवस्था में 'अधिष्ठान' या नगर का प्रमुख अधिकारी 'पुरपाल' कहलाता था, तथा नगर के संचालन में 'नगरश्रेष्ठी', 'सार्थवाह', 'प्रथम कुलिक' और 'प्रथम कायस्थ' जैसे प्रमुख व्यापारी एवं प्रशासनिक प्रतिनिधि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। 4. गुप्त शासकों ने अपनी प्रशासनिक भाषा के रूप में प्राकृत का परित्याग कर पूरी तरह से 'संस्कृत' को अपनाया था, जिसके कारण इस काल के अधिकांश राजकीय अभिलेख, ताम्रपत्र और मुद्राएँ संस्कृत भाषा में ही उत्कीर्ण हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस मस्कट के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield rifle) को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सिपाहियों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था। 2. बैरकपुर छावनी की 34वीं नेटिव इन्फैंट्री (34th Native Infantry) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए अपने अंग्रेज अधिकारियों सार्जेंट ह्यू बास्टर्ड और लेफ्टिनेंट बाथू पर हमला कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी। 3. मंगल पांडे की शहादत के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के सभी सैनिकों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक साथ खुला विद्रोह कर दिया था और उसी दिन दिल्ली की ओर मार्च करना शुरू कर दिया था। 4. चर्बी वाले कारतूसों की घटना ने भारतीय सिपाहियों के मन में यह गहरी शंका उत्पन्न कर दी थी कि ब्रिटिश सरकार उनकी धार्मिक आस्था और जाति को नष्ट कर जबरन ईसाई बनाना चाहती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और उनके प्रारंभिक राजनीतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें केवल राजतांत्रिक प्रणालियों का ही उल्लेख है और किसी भी प्रकार की गणतंत्रात्मक व्यवस्था का अस्तित्व नहीं था। 2. मगध महाजनपद के उत्कर्ष में उसकी आरंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) की सामरिक स्थिति का बड़ा योगदान था, क्योंकि यह पाँच पहाड़ियों से घिरी हुई एक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित राजधानी थी। 3. वज्जी महाजनपद आठ कुलों (कुलों का संघ) का एक प्रसिद्ध संघ था, जिसमें लिच्छवि और विदेह सबसे शक्तिशाली कुल थे, तथा इसकी राजधानी वैशाली थी। 4. वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी, जो यमुना नदी के तट पर स्थित होने के कारण उत्तर भारत के प्रमुख व्यापारिक मार्गों के नियंत्रण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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गदर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना के प्रयासों से 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की गई थी, जिसे बाद में इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' के नाम से 'गदर पार्टी' के रूप में जाना गया। 2. गदर पार्टी द्वारा प्रकाशित 'गदर' अखबार प्रारंभिक रूप से मुख्य रूप से गुरुमुखी और उर्दू में प्रकाशित होता था, और इसके पहले अंक के मुखपृष्ठ पर 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक से ब्रिटिश शोषण की नीतियों का पर्दाफाश किया गया था। 3. प्रथम विश्व युद्ध के छिड़ते ही गदर पार्टी के नेताओं ने भारत में सशस्त्र विद्रोह भड़काने के उद्देश्य से 'युगांतर आश्रम' से हज़ारों प्रवासियों को भारत लौटने के लिए प्रेरित किया, जिसे 'कामागाटामारू प्रकरण' के साथ ही गदर आंदोलन की एक प्रमुख पूर्ववर्ती घटना माना जाता है। 4. रास बिहारी बोस और सचिन सान्याल के नेतृत्व में उत्तर भारत में गुप्त क्रांतिकारी संगठनों ने गदर पार्टी के असफ़ल 1915 के विद्रोह की योजनाओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया था, जिसका प्रमुख केंद्र लाहौर और बनारस था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 'नरम दल' और 'गरम दल' के वैचारिक संघर्ष तथा उनके राजनीतिक कार्यक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए, जहाँ गरम दल के नेताओं ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को पूरे देश में फैलाने की मांग की, जबकि गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में नरमपंथियों ने इसे केवल बंगाल तक सीमित रखने और ब्रिटिश सरकार के प्रति संयमित विरोध का रुख अपनाने का समर्थन किया। 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस का विभाजन टल गया, क्योंकि उनके अध्यक्षीय भाषण में पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) को कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य घोषित किया गया था। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के दोनों धड़ों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर हिंसक झड़पें हुईं, जिसके परिणामस्वरूप रास बिहारी बोस की अध्यक्षता में गरम दल के नेताओं को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया और यह विभाजन लखनऊ पैक्ट (1916) तक बना रहा। 4. गरम दल के प्रमुख नेताओं—बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल (जिन्हें 'लाल-बाल-पाल' कहा जाता है)—ने जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के लिए पहली बार आधुनिक पश्चिमी भाषण कला के स्थान पर पारंपरिक गणेशोत्सव और शिवाजी महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों का बड़े पैमाने पर सहारा लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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