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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 367 Mock Tests Khelein
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मई 1857 के मध्य में मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के दिल्ली पहुँचने के बाद वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने इस नेतृत्व को तुरंत स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया था और वे शुरू से ही इस विद्रोह के राजनीतिक और सैन्य संचालन के लिए पूरी तरह तत्पर थे। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य कमान और प्रशासनिक नियंत्रण जनरल बख्त खान के हाथों में था, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने प्रशासनिक मामलों के संचालन के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया था। 3. ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना ने कड़ा संघर्ष किया, जिसके दौरान निकलसन गंभीर रूप से घायल हुए और मारे गए, जबकि जफर को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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जून 1947 में प्रस्तुत माउंटबेटन योजना (3 जून योजना) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को अपने-अपने प्रांतों के विभाजन के प्रश्न पर मतदान करने का अधिकार दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप दोनों प्रांतों की विधानसभाओं ने अपने विभाजन के पक्ष में स्पष्ट बहुमत से मतदान किया। 2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने के निर्णय के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें NWFP के खान अब्दुल गफ्फार खान और उनके 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने बहिष्कार के बावजूद जनमत संग्रह में सक्रिय रूप से भाग लिया था। 3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 में यह प्रावधान किया गया था कि 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत का दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजन कर दिया जाएगा, और दोनों नए डोमिनियंस के लिए गवर्नर-जनरल के पद पर केवल अलग-अलग व्यक्तियों की नियुक्ति करना अनिवार्य था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेष रूप से पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई क्रांतिकारी गतिविधियों और उनके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता और क्रांतिकारी पीर अली खान ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके सीधे आरा की ओर कूच किया था, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक मजबूत संयुक्त मोर्चा बनाया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में भी विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष देखा गया, जहाँ मुजफ्फरपुर में यूरोपीय अधिकारियों पर हमले हुए, जबकि छपरा में ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी भवनों को निशाना बनाया गया। 4. कमिश्नर विलियम टेलर ने बिहार में बढ़ते विद्रोही तेवरों को दबाने के लिए अत्यंत क्रूर दमनकारी नीतियां अपनाई थीं, जिसके तहत उसने पटना के मौलवी अहमदुल्लाह, वारिस अली और पीर अली खान को गिरफ्तार कर तुरंत फांसी पर लटका दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था (Land Grants) और कर प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, बौद्ध विहारों और मंदिरों को दिए जाने वाले भूमि अनुदानों की प्रथा (अग्रहार व्यवस्था) में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों का विकेंद्रीकरण शुरू हो गया तथा अनुदान प्राप्तकर्ताओं को कई मामलों में 'कर-मुक्ति' (Aghara) प्रदान की गई। 2. गुप्त शिलालेखों और अभिलेखों में विभिन्न प्रकार के करों का उल्लेख मिलता है, जिनमें 'विष्टि' (बेगार या जबरन श्रम) एक प्रमुख कर था, जिसे किसानों से नियमित नगद मुद्रा के रूप में वसूला जाता था और राज्य के राजस्व का मुख्य आधार यही था। 3. गुप्त सम्राटों ने कुषाणों की तुलना में अत्यधिक मात्रा में स्वर्ण मुद्राएँ (दीनार) जारी की थीं, जो आर्थिक समृद्धि का प्रतीक थीं, किंतु स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद के गुप्त सिक्कों में सोने की शुद्धता में भारी कमी और मिलावट देखने को मिलती है, जो विदेशी व्यापार के ह्रास और मौद्रिक संकुचन का संकेत देती है। 4. गुप्त काल के दौरान भूमि की पैमाइश और वर्गीकरण के लिए 'क्षेत्र' (कृषि योग्य भूमि), 'वापस' (निवास योग्य भूमि), 'अपहत' (जंगली या बिना जोती गई भूमि) और 'अप्राहत' जैसी शब्दावलियों का प्रयोग किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध में विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1857 को चिन्हाट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने के बाद हुई, जहाँ बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर सत्ता संभाली और हेनरी लॉरेंस के विरुद्ध सैन्य अभियानों का कुशल नेतृत्व किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जिहाद का आह्वान किया और रोहिलखंड तथा अवध के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेनाओं को कड़ी चुनौती देते हुए छापामार युद्ध का सफल संचालन किया। 3. लखनऊ की अंतिम घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट और नेपियर की सहायता से शहर पर पुनः अधिकार प्राप्त किया, जिसके उपरांत बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें पेंशन के साथ कलकत्ता में रहने की अनुमति दे दी गई। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों द्वारा पचास हजार रुपये का भारी इनाम रखा गया था, और अंततः पुवांयां के राजा जगन्नाथ सिंह के साथ विश्वासघातपूर्ण धोखे के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य एवं राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में ब्रिटिश पेंशन और उपाधि से वंचित किए जाने के अपने दावे को आधार बनाकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का शंखनाद किया। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के अत्यंत विश्वासपात्र सलाहकार और मुख्य रणनीतिकार थे, ने विद्रोह की कूटनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा लंदन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी भी की थी। 3. कानपुर की घेराबंदी के दौरान नाना साहब की सेना ने जनरल सर ह्यू व्हीलर की सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, जिसके उपरांत हुई 'सती चौरा घाट घटना' के बाद ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कानपुर पर पुनः पूर्ण अधिकार प्राप्त कर लिया था। 4. तात्या टोपे ने कानपुर में शुरुआती सैन्य संचालन के पश्चात ग्वालियर और कालपी के विद्रोही सैनिकों का कुशल नेतृत्व किया तथा अंग्रेजों के खिलाफ एक अत्यंत प्रभावी छापामार युद्ध का संचालन किया, जिन्हें अंततः उनके एक जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण पकड़ा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सिपाहियों के प्रवेश और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के दिल्ली पहुँचने पर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने तुरंत स्वेच्छा से और उत्साहपूर्वक इस विद्रोह के सर्वोच्च राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व को स्वीकार कर लिया था। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक प्रशासनिक और सैन्य कमान जनरल बख्त खान के नेतृत्व में गठित एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) के हाथों में थी, जिसने राजा और सैनिकों के बीच समन्वय स्थापित किया था। 3. दिल्ली की पुनर्प्राप्ति के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जॉन निकलसन कश्मीरी गेट पर हुए संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अंततः उनकी मृत्यु हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक एवं संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध संघों में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि जैन संघों में महिलाओं के प्रवेश पर महावीर स्वामी ने शुरुआत से ही पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा था। 2. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए 'सल्लेखना' (संथारा) पद्धति द्वारा प्राण त्यागने के विधान को मान्यता दी गई है, जबकि बौद्ध धर्म में अतिवादी कायाक्लेश या उपवास द्वारा शरीर को कष्ट देने की निंदा की गई है। 3. बौद्ध धर्म के द्वितीय बौद्ध संगीति के दौरान संघ 'स्थविरवादी' और 'महासांगिक' नामक दो प्रमुख संप्रदायों में विभाजित हो गया था, जिसका मुख्य कारण विनय पिटक के नियमों में लचीलापन लाना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीय सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने पाश्चात्य शिक्षा और आधुनिक विज्ञान का पूर्ण बहिष्कार करते हुए केवल प्राचीन वैदिक ज्ञान को ही एकमात्र सत्य माना और वेदों की अचूकता का प्रतिपादन किया। 2. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना था। 3. मद्रास प्रेसीडेंसी में समाज सुधार के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए वीरेशलिंगम पंतुलु ने विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और बाल विवाह के उन्मूलन के लिए अथक प्रयास किए तथा तेलुगु भाषी क्षेत्र में ब्रह्म समाज के विचारों का प्रचार-प्रसार किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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