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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 136 Mock Tests Khelein
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सोडियम और पोटेशियम जैसी अत्यंत क्रियाशील धातुएं पानी के साथ तीव्र अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है, जबकि मैग्नीशियम ठंडे पानी के साथ अभिक्रिया नहीं करता बल्कि केवल उबलते हुए पानी के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। 2. एल्युमिनियम और जिंक जैसी धातुएं उभयधर्मी (Amphoteric) प्रकृति प्रदर्शित करती हैं, जिसका अर्थ है कि वे अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस का निर्माण करती हैं, जैसे एल्युमिनियम सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एल्यूमिनेट बनाता है। 3. मिश्रधातु 'अमलगम' (Amalgam) में एक अनिवार्य धातु हमेशा पारा (Mercury) होती है, और लोहे की अत्यधिक सक्रियता के कारण लोहा पारे के साथ अमलगम का निर्माण आसानी से कर लेता है, यही कारण है कि लोहे के बर्तनों में पारे को संग्रहित किया जाता है। 4. उत्कृष्ट गैसों के अतिरिक्त, कुछ अधातुएं जैसे सल्फर और फॉस्फोरस अपनी बहुपरमाणुक (Polyatomic) प्रकृति दर्शाते हैं, जिसमें सल्फर $S_8$ वलय संरचना के रूप में और श्वेत फॉस्फोरस $P_4$ चतुष्फलकीय संरचना के रूप में पाया जाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/धातु" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रोगों, उनके संचरण के माध्यमों, रोगजनकों (Pathogens) और उनके नैदानिक परीक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'ट्यूबरकुलोसिस' (तपेदिक) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, और इसके निदान के लिए किया जाने वाला 'माउंटॉक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण है जो सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी पर आधारित होता है। 2. 'एड्स' (AIDS) उत्पन्न करने वाला एचआईवी (HIV) एक रेट्रोवायरस है जिसमें आनुवंशिक पदार्थ के रूप में द्वि-रज्जुक आरएनए (Double-stranded RNA) पाया जाता है, जो संक्रमण के पश्चात होस्ट कोशिकाओं के रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम का उपयोग करके डीएनए का संश्लेषण करता है। 3. 'मलेरिया' प्लासमोडियम प्रजाति के परजीवी के कारण होता है, जिसमें प्लासमोडियम फाल्ciparum सबसे गंभीर प्रकार का मलेरिया उत्पन्न करता है और यह मस्तिष्क को प्रभावित करके 'सेरेब्रल मलेरिया' का कारण बन सकता है, जिसका वाहक मादा एनाफिलिस मच्छर होता है। 4. 'टाइफाइड' साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु जनित रोग है, जिसकी पुष्टि के लिए 'विडाल परीक्षण' (Widal test) किया जाता है, जो रोगी के सीरम में मौजूद एंटीबॉडी और जीवाणु के एंटीजन के बीच प्रति-अवक्षेपण या संकोचलन (Agglutination) प्रतिक्रिया पर आधारित होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/मानव_रोग" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक और मात्रात्मक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लुईस अम्ल (Lewis Acids) वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोष में अष्टक अपूर्ण रखने वाले यौगिक (जैसे $BF_3$) लुईस अम्ल की श्रेणी में आते हैं। 2. जब एक दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) को उसके प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ उदासीनीकरण कराया जाता है, तो बनने वाले लवण का जल-अपघटन (Hydrolysis) होने के कारण तुल्यांकी बिंदु पर विलयन का pH मान 7 से कम (अम्लीय) होता है। 3. ब्रॉन्स्टेड-लाउरी अवधारणा के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यंत दुर्बल होता है, जबकि जल की उभयधर्मी (Amphoteric) प्रकृति के कारण यह एक ही समय में ब्रॉन्स्टेड अम्ल और ब्रॉन्स्टेड क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकता है। 4. बफर विलयन (Buffer solution) वे विलयन होते हैं जो अपने अंदर थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH मान में परिवर्तन का विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर विलयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण दुर्बल अम्ल और उसके प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय मिश्रण है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/अम्ल_और_क्षार" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सोडियम और पोटेशियम जैसी अत्यंत क्रियाशील धातुएं ठंडे पानी के साथ तीव्र अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, जबकि कैल्शियम पानी के साथ कम तीव्र गति से अभिक्रिया करता है और उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस के बुलबुले धातु की सतह से चिपक जाते हैं जिससे कैल्शियम तैरने लगता है। 2. ऐलुमिनियम, जिंक और टिन जैसी धातुएं उभयधर्मी (Amphoteric) ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करती हैं, जिसका अर्थ है कि वे अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाती हैं। 3. मिश्रधातु 'अमलगम' (Amalgam) में एक अनिवार्य धातु हमेशा पारा (Mercury) होती है, और लोहे की अनभिक्रियाशीलता (Unreactivity) के कारण लोहा पारे के साथ आसानी से अमलगम बना लेता है, यही कारण है कि पारे के भंडारण के लिए लोहे के पात्रों का उपयोग किया जाता है। 4. उत्कृष्ट गैसों के अतिरिक्त, कुछ अधातुएं जैसे सल्फर और फॉस्फोरस अपनी बहुपरमाणुकता दर्शाती हैं, जिसमें सल्फर $S_8$ के रूप में वलय संरचना और श्वेत फॉस्फोरस $P_4$ के रूप में चतुष्फलकीय संरचना बनाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/धातु" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोन की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अग्नाशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में पाई जाने वाली अल्फा (α) कोशिकाएं 'ग्लूकागोन' हार्मोन का स्रावण करती हैं, जो एक हाइपरग्लिसेमिक हार्मोन है और यकृत में ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) तथा ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है। 2. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' (Calcitonin) हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करने का कार्य करता है, क्योंकि यह अस्थियों से कैल्शियम के अवशोषण को रोकता है और अस्थि-निर्माण (Bone formation) को बढ़ावा देता है। 3. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का मज्जा (Medulla) भाग कैटेकोलामाइन (एड्रेनालाईन और नॉरएड्रेनालाईन) हार्मोन का स्रावण करता है, जिन्हें 'आपातकालीन हार्मोन' या 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) हार्मोन कहा जाता है, जो हृदय की धड़कन, श्वसन दर और पुतली के फैलाव को बढ़ाते हैं। 4. अग्र पिट्यूटरी (Adenohypophysis) ग्रंथि द्वारा स्रावित 'प्रोलैक्टिन' हार्मोन दुग्ध के निष्कासन (Milk ejection) के लिए सीधे उत्तरदायी होता है, जबकि दुग्ध के संश्लेषण (Milk synthesis) का कार्य ऑक्सीटोसिन हार्मोन द्वारा किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जिसके कारण परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके पूर्ण भरे कक्षकों के कारण उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की तुलना में अधिक होती है। 2. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से उपस्थित 2p कक्षकीय इलेक्ट्रॉनों के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण (Inter-electronic repulsion) कम हो जाता है। 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्व) की प्रथम संक्रमण श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु त्रिज्याओं में होने वाला संकुचन बहुत कम होता है, जिसका मुख्य कारण 3d कक्षकों का आवरण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल होना है। 4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में नीचे जाने पर घटती है, तथा पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सभी तत्वों में सर्वाधिक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे परमाणु त्रिज्या घटती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की सहसंयोजक त्रिज्या उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी होती है क्योंकि उनकी वांडरवाल्स त्रिज्या को मापा जाता है। 2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है। 3. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान आवर्त सारणी के वर्गों में नीचे जाने पर सामान्यतः कम (कम ऋणात्मक) होता है, किंतु ऑक्सीजन परिवार (वर्ग 16) और हैलोजन परिवार (वर्ग 17) के द्वितीय आवर्त के तत्व (क्रमशः ऑक्सीजन और फ्लोरीन) के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान उनके ठीक नीचे आने वाले तीसरे आवर्त के तत्वों (सल्फर और क्लोरीन) की तुलना में अधिक होता है। 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका कारण 4f कक्षकों का आवरण प्रभाव अत्यंत दुर्बल होना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हार्मोनल नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) मस्तिष्क के पृष्ठीय भाग में स्थित होती है और यह 'मेलटोनिन' (Melatonin) हार्मोन का स्रावण करती है, जो शरीर की दैनिक लय (Circadian rhythm) और निद्रा-जागरण चक्र के नियमन में मुख्य भूमिका निभाता है। 2. थाइमस ग्रंथि एक अंतःस्रावी ग्रंथि के साथ-साथ प्रतिरक्षा तंत्र का भी मुख्य अंग है, जो 'थायमोसिन' (Thymosins) हार्मोन का स्रावण करती है, जो कोशिका-मध्यस्थता वाली प्रतिरक्षा के लिए उत्तरदायी 'टी-लम्फोसाइट्स' (T-lymphocytes) के विभेदन और परिपक्वता को प्रेरित करता है। 3. वृषण की लीडिंग कोशिकाएं (Leydig cells) या अंतराल कोशिकाएं एंड्रोजन (मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन) हार्मोन का संश्लेषण और स्रावण करती हैं, जो नर सहायक लिंग अंगों के विकास और शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) को नियंत्रित करते हैं। 4. प्लेसेंटा एक अस्थायी अंतःस्रावी ऊतक के रूप में कार्य करता है जो केवल एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्रावण करता है, तथा गर्भावस्था के दौरान ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG) और रिलैक्सिन जैसे हार्मोन का उत्पादन केवल गर्भाशय की पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों, मात्रकों और मापन (Units and Measurement) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पारसेक (Parsec) खगोलीय दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है, जो उस चाप की दूरी को निरूपित करती है जो किसी वृत्त के केंद्र पर 1 आर्कसेकंड (1 arcsecond) का कोण अंतरित करता है जब चाप की लंबाई 1 खगोलीय इकाई (AU) होती है। 2. स्टीरेडियन (Steradian) एक व्युत्पन्न मात्रक है जो समतल कोण (Plane angle) को मापने के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि रेडियन एक पूरक मात्रक (Supplementary unit) है जिसका उपयोग ठोस कोण (Solid angle) को मापने के लिए किया जाता है। 3. प्लांक नियतांक ($h$) का विमीय सूत्र वही होता है जो कोणीय संवेग (Angular momentum) का होता है, और दोनों का SI मात्रक जूल-सेकंड ($J\cdot s$) है। 4. प्रकाश वर्ष (Light-year) समय का नहीं बल्कि दूरी का मात्रक है, और 1 प्रकाश वर्ष लगभग $9.46 \times 10^{15}$ मीटर के बराबर होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/मात्रक" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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