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General Science — Free MCQ Questions & Mock Test
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राउल्ट के नियम (Raoult's Law) के अनुसार, किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का अपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलयन में उपस्थित विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, जो कि एक अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative property) है। 2. उत्प्रेषित अभिक्रियाओं में, 'समांगी उत्प्रेरण' (Homogeneous Catalysis) वह प्रक्रिया है जिसमें अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (सामान्यतः प्रावस्था) में होते हैं, जबकि 'विषमांगी उत्प्रेरण' में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में और अभिकारक गैस या द्रव अवस्था में होते हैं। 3. एंज़ाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और उच्च दक्षता वाले होते हैं, और मिचेलिस-मेंटेन समीकरण (Michaelis-Menten equation) एंज़ाइम-उत्प्रेरित अभिक्रियाओं की गति और सब्सट्रेट सांद्रता के बीच के मात्रात्मक संबंध को स्पष्ट करता है। 4. जब किसी तनु विलयन में अवाष्पशील विलेय घोला जाता है, तो उसके क्वथनांक में उन्नयन ($ΔT_b$) और हिमांक में अवनमन ($ΔT_f$) दोनों ही विलेय की मोललता के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/विलयन" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी और प्रकाशीय उपकरणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब एक द्वيفोकल (Bifocal) लेंस का उपयोग किया जाता है, तो निकट दृष्टि दोष (Myopia) के निवारण के लिए ऊपरी भाग में अवतल लेंस होता है और दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia) के लिए निचले भाग में उत्तल लेंस होता है। 2. सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple microscope) द्वारा बनने वाला अंतिम प्रतिबिंब सामान्यतः आभासी, सीधा और आवर्धित होता है, जब वस्तु को लेंस के प्रकाशित केंद्र और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है। 3. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical telescope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) की फोकस दूरी बड़ी और नेत्रिका (Eyepiece) की फोकस दूरी छोटी होनी चाहिए। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के आधार पर कार्य करने वाले प्रकाशीय तंतु (Optical fibers) में संकेत का संचरण प्रकाश की किरणों के बहु-परावर्तन के सिद्धांत पर आधारित होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/प्रकाशिकी" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की प्रोफेज़-I की 'पैचाइटीन' (Pachytene) अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सह-भ्रातृ क्रोमैटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक पदार्थों के आदान-प्रदान के रूप में होती है। 2. यह प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है और यह गुणसूत्रों पर स्थित जीनों की लिंकेज को तोड़कर नए आनुवंशिक संयोजनों (Recombinants) का निर्माण करती है, जो जैविक विकास (Organic Evolution) में विभिन्नता का एक प्रमुख स्रोत है। 3. क्रॉसिंग ओवर के ठीक बाद की अवस्था यानी 'डाइप्लोटीन' (Diplotene) में समजात गुणसूत्र एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो जाते हैं और कहीं भी जुड़े नहीं रहते, जिससे 'काइअस्माटा' (Chiasmata) का निर्माण समाप्त हो जाता है। 4. जीन विनिमय की आवृत्ति (Frequency of crossing over) दो जीनों के बीच की दूरी के सीधे समानुपातिक होती है, अर्थात जितने अधिक दूर जीन होंगे, क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/जीन_विनिमय" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जिसके कारण परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके पूर्ण भरे कक्षकों के कारण उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की तुलना में अधिक होती है। 2. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से उपस्थित 2p कक्षकीय इलेक्ट्रॉनों के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण (Inter-electronic repulsion) कम हो जाता है। 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्व) की प्रथम संक्रमण श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु त्रिज्याओं में होने वाला संकुचन बहुत कम होता है, जिसका मुख्य कारण 3d कक्षकों का आवरण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल होना है। 4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में नीचे जाने पर घटती है, तथा पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सभी तत्वों में सर्वाधिक होती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/आवर्त_सारणी" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय की गैस्ट्रिक ग्रंथियों द्वारा स्रावित 'पेप्सिनोजेन' एक निष्क्रिय एंजाइम है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय 'पेप्सिन' में बदल जाता है और यह प्रोटीन को प्रोटीज तथा पेप्टोन में जलअपघटित करता है। 2. श्वसन के दौरान ऑक्सीजन का परिवहन मुख्य रूप से हीमोग्लोबिन के साथ बंधकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में होता है, और ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन वक्र (Oxygen-hemoglobin dissociation curve) बोहर प्रभाव के कारण उच्च $P_{CO_2}$, कम pH और उच्च तापमान की स्थिति में दाईं ओर विस्थापित हो जाता है। 3. हृदय के चक्र (Cardiac Cycle) में 'एसए नोड' (SA Node) को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है, जो स्वतः उत्तेजित होकर विद्युत आवेग उत्पन्न करता है, और इस आवेग को निलयों तक पहुँचाने के लिए एवी नोड और हिज के बंडल (Bundle of His) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 4. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) का संचालन करने वाला 'प्रतिवर्ती चाप' (Reflex Arc) न्यूनतम रूप से एक संवेदी न्यूरॉन, एक मध्यस्थ न्यूरॉन (इंटरन्यूरॉन) और एक मोटर न्यूरॉन को शामिल करता है, तथा इसमें सूचना का मार्ग केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के मस्तिष्क तक अनिवार्य रूप से जाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/मानव_शरीर_तंत्र" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव पोषण और जैव अणुओं (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा विटामिन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विटामिन $B_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जिसमें कोबाल्ट धातु आयन उपस्थित होता है, और इसका भंडारण यकृत में कई वर्षों तक हो सकता है, जबकि अन्य अधिकांश जल-विलेय विटामिन शरीर में संचित नहीं होते और मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं। 2. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential amino acids) वे अमीनो अम्ल हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं हो सकता, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है; उदाहरण के लिए, वैलीन, ल्यूसिन और फेनिलएलनिन आवश्यक अमीनो अम्ल की श्रेणी में आते हैं। 3. कार्बोहाइड्रेट के संदर्भ में, 'सेलूलोज' एक शाखित पॉलिसैराइड है जो ग्लूकोज की $\alpha$-डी-इकाइयों ($\alpha$-D-glucose) के ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़ने से बनता है, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने वाले एंजाइम (सेल्युलेज) की अनुपस्थिति के कारण यह ऊर्जा स्रोत के रूप में कार्य नहीं कर पाता। 4. विटामिन डी एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रो-विटामिन के रूप में त्वचा में उपस्थित 7-डिडहाइड्रोकोलेस्टेरॉल पर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से संश्लेषित होता है, तथा सक्रिय हॉर्मोन के रूप में यह आंत से कैल्शियम और फॉस्फेट के अवशोषण को नियंत्रित करता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/विटामिन" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं में कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना और उनके उपापचयी कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सीसोम' ($F_0-F_1$ कण) इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (ETS) के दौरान ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के माध्यम से एटीपी (ATP) के संश्लेषण के मुख्य स्थल होते हैं, और इसकी आंतरिक झिल्ली में 'कार्डियोलिपिन' नामक विशिष्ट फॉस्फोलिपिड प्रचुरता से होता है जो इसे लगभग अपारगम्य बनाता है। 2. खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (RER) की सतह पर राइबोसोम के जुड़ाव को सुनिश्चित करने के लिए 'राइबोफोरिन-I' और 'राइबोफोरिन-II' नामक दो विशिष्ट ग्लाइकोप्रोटीन इंटीग्रल झिल्ली प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 3. लाइसोसोम एकल झिल्ली से घिरे ऐसे कोशिका अंगक हैं जिनमें अम्लीय पीएच (लगभग 4.5 से 5.0) पर सक्रिय होने वाले हाइड्रोलिटिक एंजाइम (जैसे लाइपेज, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेज) पाए जाते हैं, और इस अम्लीय pH को बनाए रखने के लिए लाइसोसोमल झिल्ली पर $V-type$ प्रोटॉन पंप ($H^+$ ATPase) सक्रिय रूप से कार्य करते हैं। 4. गॉल्जी उपकरण के 'सिस' (Cis) या निर्माण मुख परिपक्व भाग होता है जो प्लाज्मा झिल्ली की ओर उन्मुख होता है, जबकि इसका 'प्रान्स' (Trans) मुख केंद्रक के समीप स्थित होता है तथा ग्लाइकोसिलेशन और ग्लाइकोएरीडेशन की प्रक्रिया मुख्य रूप से इसी प्रान्स नेटवर्क में पूर्ण होती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/कोशिका_अंगक" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. जब किसी चालक को किसी चुंबकीय क्षेत्र में गति कराया जाता है, तो उसमें उत्पन्न प्रेरित धारा के कारण एक चुंबकीय क्षेत्र बनता है, जो फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम (Fleming's Left Hand Rule) का पालन करता है। 4. स्वप्रेरणा (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से गुजरने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/विद्युत_चुंबकीय_प्रेरण" target="_blank" rel="noopener">विकिपीडिया संदर्भ</a> में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाशीय परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब किसी उत्तल लेंस (Convex lens) को ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति उलट जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है। 2. पानी के अंदर स्थित वायु का बुलबुला प्रकाश की किरणों को अभिसरित (Converge) करता है, क्योंकि पानी का अपवर्तनांक वायु की तुलना में अधिक होता है, जिससे बुलबुला एक उत्तल लेंस की तरह कार्य करता है। 3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की वास्तविक दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो वास्तविक प्रतिबिंब के लिए रेखीय आवर्धन ($m$) का मान ऋणात्मक होता है, जबकि आभासी प्रतिबिंब के लिए यह धनात्मक होता है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाना अनिवार्य है, तथा आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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