नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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'बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र' के अंतर्गत 'लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, कोहलबर्ग द्वारा प्रतिपादित नैतिक विकास के तीन प्रमुख स्तरों के अंतर्गत आने वाली छह अवस्थाओं में से 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाली पाँचवीं और छठी अवस्था—अर्थात 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की तार्किक, मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level) नैतिक विकास का सबसे उच्च चरण है। इसमें व्यक्ति बाहरी सामाजिक दबावों या कानूनों से परे जाकर अपने स्वयं के नैतिक मूल्य विकसित करता है। इस स्तर की पाँचवीं अवस्था ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार') में व्यक्ति यह समझता है कि कानून समाज के कल्याण के लिए बनाए गए हैं और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज की भलाई के विरुद्ध है, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बदला जा सकता है। वहीं, छठी अवस्था ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास') में व्यक्ति बाह्य कानूनों से परे अपने अंतःकरण (Conscience) के आधार पर सार्वभौमिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के स्व-चयनित सिद्धांतों का पालन करता है, भले ही इसके लिए उसे कानून या समाज के विरुद्ध क्यों न जाना पड़े। अतः विकल्प (c) पूर्णतः सत्य एवं सटीक है, जबकि अन्य विकल्प कोहलबर्ग के अन्य स्तरों (पूर्व-रूढ़िगत और रूढ़िगत) से संबंधित हैं।
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'बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र' के अंतर्गत 'लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, कोहलबर्ग द्वारा प्रतिपादित नैतिक विकास के तीन मुख्य स्तरों (प्रत्येक में दो अवस्थाएँ) में से 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाली दोनों अवस्थाओं—अर्थात 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles)—के मनोवैज्ञानिक, तार्किक, दार्शनिक आधार तथा उनके शैक्षिक एवं व्यावहारिक निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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