बाल-केंद्रित एवं सक्रिय शिक्षण
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम आयोजकों' (Advance Organizers), 'अवरोही और आनुक्रमिक अंतरण' (Progressive Differentiation and Integrative Reconciliation) की अवधारणाओं, तथा 'रटंत अधिगम' (Rote Learning) बनाम 'सार्थक अधिगम' के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में संज्ञानात्मक संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड औसुबेल (David Ausubel) के सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत (Meaningful Verbal Learning Theory) के अनुसार, शिक्षक द्वारा शिक्षण शुरू करने से पहले 'अग्रिम आयोजक' (Advance Organizers) प्रस्तुत किए जाते हैं। ये उच्च-स्तरीय और समावेशी अवधारणाएं होती हैं जो नई जानकारी को शिक्षार्थी की मौजूदा संज्ञानात्मक संरचना (Cognitive Structure) से जोड़ने के लिए एक वैचारिक पुल का काम करती हैं। इससे 'सार्थक अधिगम' (Meaningful Learning) सुगम होता है, जबकि 'रटंत अधिगम' (Rote Learning) कम होता है। अतः विकल्प (A) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पांच चरणों तथा कक्षा-कक्ष में 'समस्या समाधान' (Problem Solving) पद्धति के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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