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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) एवं समावेशी शिक्षा' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities जैसे डिस्लेक्सिया, डिसकैल्कुलिया और डिसग्राफिया) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ऑक्सिपिटो-टेम्पोरल जंक्शन' (Occipitotemporal Junction - Visual Word Form Area), 'इंट्रापैरिएटल सर्कस' (Intraparietal Sulcus - Numerosity Processing), और 'मोटर कॉर्टेक्स व सेरिबेलम' के बीच दृश्य-श्रव्य एकीकरण, संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण, और सूक्ष्म मोटर समन्वय की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्कार्स और सैम्युअल किर्क के उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) सिद्धांतों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-समावेशी अनुकूलित शिक्षाशास्त्र' (Neuro-Inclusive Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी रणनीतियों (Multi-sensory Structured Language/Math Approach), अनुकूलित मूल्यांकन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह प्रश्न UPTET के बाल विकास और समावेशी शिक्षा के उन्नत न्यूरो-संज्ञानात्मक पहलुओं पर आधारित है। अधिगम अक्षमताएँ (जैसे डिस्लेक्सिया, डिसकैल्कुलिया आदि) मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे Visual Word Form Area और Intraparietal Sulcus) में कार्यात्मक और संरचनात्मक भिन्नताओं से जुड़ी होती हैं। 'न्यूरोप्लास्टिसिटी' (Neuroplasticity) के सिद्धांत के अनुसार, उचित बहुसंवेदी उपचारात्मक शिक्षण (जैसे ऑर्टन-ग्लिंगहम पद्धति) के माध्यम से इन तंत्रिका मार्गों को पुनर्गठित किया जा सकता है। अतः विकल्प (A) इस संदर्भ में सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के संदर्भ में, गणितीय योग्यताओं से जुड़ी अक्षमता 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia) के विभिन्न उप-प्रकारों में से 'लेक्सिकल डिस्कैल्कुलिया' (Lexical Dyscalculia) की सबसे विशिष्ट एवं वैज्ञानिक पहचान निम्नलिखित में से किस विकासात्मक कठिनाई के रूप में की जाती है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम स्थानांतरण के समकालीन मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों' के संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक और रॉबर्ट वुडवर्थ द्वारा प्रतिपादित 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के अंतर्गत पूर्व-अधिगम और नवीन अधिगम के बीच समान साक्ष्यों, संवेदी-प्रेरक आदतों और विषय-वस्तु के संचरण के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत विभिन्न स्वतंत्र बौद्धिक क्षमताओं (जैसे- स्थानिक, भाषाई, शारीरिक-गतिसंवेदी आदि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक बहु-विषयक कक्षा-कक्ष शिक्षण, संज्ञानात्मक लचीलेपन और विद्यार्थियों में अधिगम अंतरण (Transfer of Learning) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और उपचारात्मक शिक्षण' के संदर्भ में, सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा परिभाषित 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disability) के अंतर्गत 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia) और 'डिस्प्रैक्सिया' (Dyspraxia) के न्यूरोलॉजिकल एवं मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा पॉल ब्रोका (Paul Broca) और कार्ल वर्निक (Carl Wernicke) द्वारा न्यूरोलॉजिकल शोधों के आधार पर प्रतिपादित 'अफेसिया' (Aphasia) एवं 'डिस्फेसिया' (Dysphasia)—जो कि वाक् और भाषा विकारों से संबंधित हैं—के पारस्परिक अंतर्संबंधों और उनके उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) हेतु अपनाई जाने वाली 'बहुसंवेदी उपागम' (Multisensory Approach - VAKT Method) की वैज्ञानिक संरचना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार, जब बालक अपनी मौजूदा मानसिक संरचना (Schema) में बिना किसी बड़े बदलाव के नए अनुभव को व्यवस्थित कर लेता है, तो इस प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality) इस बात पर केंद्रित है कि बालक समाज के नियमों, सामाजिक व्यवस्था और दूसरों की स्वीकृति को बनाए रखने के लिए नैतिक निर्णय लेता है।
2. पियाजे की 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में बालक के भीतर निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) को समझने के लिए एक आवश्यक संज्ञानात्मक आधार प्रदान करती है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की अवस्थाएँ अपरिवर्तनीय और सार्वभौमिक होती हैं, और उनका क्रम हमेशा पूर्व-रूढ़िगत से रूढ़िगत तथा अंततः उत्तर-रूढ़िगत स्तर की ओर ही आगे बढ़ता है, जिसे पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों की तरह पीछे की अवस्था में नहीं लौटाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता' (Creativity) और 'चिंतन प्रक्रिया' के संदर्भ में, ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण'—'तैयारी' (Preparation), 'उद्भावन/प्रभवन' (Incubation), 'प्रदीप्ति/अंतर्दृष्टि' (Illumination), और 'सत्यापन/मूल्यांकन' (Verification)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) के प्रमुख घटकों—'धाराप्रवाह' (Fluency), 'लचीलापन' (Flexibility), 'मौलिकता' (Originality), और 'विस्तार' (Elaboration)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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