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असहयोग आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Detailed Explanation

इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश प्रशासनिक, शैक्षिक और कानूनी संस्थानों का बहिष्कार करना था।
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक संस्थाओं और 'इक़्ता प्रणाली' (Iqta System) के विकास से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इक़्ता प्रणाली वास्तव में सल्तनत काल से पहले प्राचीन भारत में भी मौजूद थी, किंतु दिल्ली सल्तनत के दौरान इल्तुतमिश ने इसे व्यवस्थित रूप से संगठित किया और सैन्य तथा प्रशासनिक अधिकारियों (जिन्हें 'मुक्ती' या 'वालियों' कहा जाता था) को वेतन के बदले भूमि राजस्व के आवंटن के रूप में इसे संस्थागत रूप प्रदान किया। 2. अलाउद्दीन खिलजी ने इक़्ता प्रणाली में कड़े सुधार करते हुए मुक्ती और इक़्तादारों के अधिकारों को सीमित कर दिया, तथा उनके प्रशासनिक क्षेत्रों से केंद्रीय नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'ख्वाजा' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की, जो उनके द्वारा एकत्र किए जाने वाले राजस्व और सेना के रख-रखाव का हिसाब रखते थे। 3. फिरोजशाह तुगलक ने इक़्ता प्रणाली को और अधिक उदार बनाते हुए इसे पूरी तरह से वंशानुगत (Hereditary) बना दिया, जिसके तहत यदि किसी इक़्तादार की मृत्यु हो जाती थी, तो उसका इक़्ता स्वतः उसके पुत्र या दामाद को प्राप्त हो जाता था, और इस नियम के कारण भविष्य में सल्तनत के प्रशासनिक विघटन में सहायता मिली। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill - Article 110) तथा उसके विधायी प्रक्रियागत पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, किसी विधेयक को धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल और केवल कराधान, भारत की संचित निधि से धन का विनियोजन, या उससे संबंधित सभी या किन्हीं आकस्मिक विषयों के प्रावधान शामिल हों, और यदि किसी विधेयक में धन संबंधी प्रावधानों के साथ-साथ अन्य सामान्य विधायी मामले भी जुड़े हैं, तो उसे किसी भी परिस्थिति में धन विधेयक के रूप में प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। 2. लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) का यह प्रमाण पत्र कि कोई विधेयक एक धन विधेयक है, अंतिम होता है और इस प्रश्न पर किसी भी न्यायालय में, या संसद के किसी भी सदन में (लोकसभा को छोड़कर), अथवा राष्ट्रपति द्वारा आपत्ति नहीं की जा सकती है। 3. राज्यसभा को धन विधेयक के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियाँ प्राप्त हैं; वह न तो इसे अस्वीकार कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, बल्कि उसे केवल अपनी सिफारिशें देनी होती हैं जिन्हें मानने के लिए लोकसभा बाध्य नहीं है, तथा यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, सर्वोच्च न्यायालय के 'मूल क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) तथा इसके अंतर्गत आने वाले मामलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी ऐसे कानूनी विवाद (Legal Dispute) के निपटारे से संबंधित है, जिसमें किसी विधिक अधिकार के अस्तित्व या सीमा का प्रश्न शामिल हो। 2. सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार के अंतर्गत संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य के निर्वाचन से उत्पन्न होने वाले विवाद, वित्त आयोग की सिफ़ारिशों से जुड़े वित्तीय मामले और केंद्र तथा राज्यों के बीच सामान्य वाणिज्यिक संधियों (Commercial Treaties) या समझौतों से उत्पन्न होने वाले विवाद पूरी तरह से शामिल होते हैं। 3. 'संविधान के भाग III द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन' के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पास अनुच्छेद 32 के तहत जो मूल क्षेत्राधिकार है, वह अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आने वाले अंतर-सरकारी विवादों के मूल क्षेत्राधिकार से अलग और विशिष्ट है, क्योंकि अनुच्छेद 32 के तहत केवल व्यक्ति या संस्थाएं ही नहीं बल्कि राज्य भी अपने मौलिक अधिकारों के हनन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, पृथ्वी की आंतरिक संरचना (Interior of the Earth) और भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के संचरण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यमों से ही गमन कर सकती हैं और तरल माध्यम में लुप्त हो जाती हैं। 2. पृथ्वी की क्रोड (Core) और आवरण (Mantle) के बीच की सीमा को गुटेनबर्ग असंबद्धता (Gutenberg Discontinuity) कहा जाता है, तथा इस असंबद्धता के पार जाते ही S-वेव्स का अचानक प्रकट होना यह साबित करता है कि बाहरी क्रोड (Outer Core) अत्यधिक सघन ठोस अवस्था में है। 3. 'छाया क्षेत्र' (Shadow Zone) वह क्षेत्र होता है जहाँ कोई भी भूकंपीय तरंग (न तो P और न ही S तरंगें) दर्ज नहीं की जाती है, और अधिकेंद्र (Epicenter) से 105° और 145° के बीच का क्षेत्र S-वेव्स के लिए छाया क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है जो P-वेव्स के छाया क्षेत्र की तुलना में काफी विस्तृत होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? Food Safety and Standards (Licensing and Registration of Food Businesses) Amendment Regulations, 2026 किस अधिनियम के तहत अधिसूचित किए गए हैं?
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