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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक संस्थाओं और 'इक़्ता प्रणाली' (Iqta System) के विकास से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इक़्ता प्रणाली वास्तव में सल्तनत काल से पहले प्राचीन भारत में भी मौजूद थी, किंतु दिल्ली सल्तनत के दौरान इल्तुतमिश ने इसे व्यवस्थित रूप से संगठित किया और सैन्य तथा प्रशासनिक अधिकारियों (जिन्हें 'मुक्ती' या 'वालियों' कहा जाता था) को वेतन के बदले भूमि राजस्व के आवंटن के रूप में इसे संस्थागत रूप प्रदान किया।
  2. 2. अलाउद्दीन खिलजी ने इक़्ता प्रणाली में कड़े सुधार करते हुए मुक्ती और इक़्तादारों के अधिकारों को सीमित कर दिया, तथा उनके प्रशासनिक क्षेत्रों से केंद्रीय नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'ख्वाजा' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की, जो उनके द्वारा एकत्र किए जाने वाले राजस्व और सेना के रख-रखाव का हिसाब रखते थे।
  3. 3. फिरोजशाह तुगलक ने इक़्ता प्रणाली को और अधिक उदार बनाते हुए इसे पूरी तरह से वंशानुगत (Hereditary) बना दिया, जिसके तहत यदि किसी इक़्तादार की मृत्यु हो जाती थी, तो उसका इक़्ता स्वतः उसके पुत्र या दामाद को प्राप्त हो जाता था, और इस नियम के कारण भविष्य में सल्तनत के प्रशासनिक विघटन में सहायता मिली।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: इक़्ता प्रणाली सल्तनत काल में दिल्ली सल्तनत का एक केंद्रीय अंग थी। हालाँकि इसके कुछ प्राक्-सल्तनत या इस्लामिक दुनिया (जैसे अब्बासी खलीफा के काल) में पूर्व-रूप मिलते हैं, भारत में इसे व्यावहारिक रूप से इल्तुतमिश द्वारा बड़े पैमाने पर संगठित किया गया था। इक़्तादारों (जिन्हें मुक्ती या वली कहा जाता था) को उनकी सेवाओं के बदले राजस्व का अधिकार दिया जाता था। कथन 2 सही है: अलाउद्दीन खिलजी ने इक़्तादारों और मुक्ती की शक्तियों पर नकेल कसने के लिए कई कड़े कदम उठाए। उसने यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे स्वतंत्र न हो जाएं, उनके कार्यालयों में 'ख्वाजा' (लेखाकार) नियुक्त किए, जो उनके राजस्व संग्रह और सैनिकों के व्यय पर कड़ी नजर रखते थे। कथन 3 सही है: फिरोजशाह तुगलक की प्रशासनिक नीतियां काफी हद तक सामंती व्यवस्था की ओर झुकी थीं। उसने इक़्ता प्रणाली को वंशानुगत बना दिया। उसने घोषणा की कि यदि किसी इक़्तादार की मृत्यु हो जाती है, तो उसका पद और इक़्ता उसके पुत्र, और पुत्र के न होने पर उसके दामाद या गुलाम को मिलना चाहिए। इस नीति ने प्रशासनिक दक्षता को कमजोर किया और बाद में साम्राज्य के पतन का मार्ग प्रशस्त किया। अतः तीनों कथन सही हैं।
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