संज्ञानात्मक विकास
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रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning)**—जिसे उस सर्वोच्च और अंतिम संज्ञानात्मक अधिगम स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी केवल पूर्व नियमों, सिद्धांतों या तथ्यों का स्मरण नहीं करता, बल्कि नए और जटिल संदर्भात्मक नियमों का उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक संज्ञानात्मक रणनीतियों (Cognitive Strategies) और तार्किक चिंतन के माध्यम से पूरी तरह से नवीन और अपरिचित समस्याओं का सफल समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय बौद्धिक विकास, विश्लेषणात्मक क्षमता और स्वतंत्र ज्ञान-अर्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) ने अपने 'अधिगम की सोपानिकी' (Hierarchy of Learning) सिद्धांत में अधिगम को आठ पदानुक्रमित स्तरों में विभाजित किया है, जिसमें 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning) सबसे अंतिम और सर्वोच्च (Highest) स्तर है। यह स्तर इस बात पर बल देता है कि जब कोई शिक्षार्थी पूर्व में सीखे गए नियमों और सिद्धांतों का उपयोग करके किसी नवीन और जटिल परिस्थिति का सामना करता है, तो वह अपनी संज्ञानात्मक रणनीतियों का प्रयोग करते हुए सार्थक और तार्किक समाधान तक पहुँचता है। यह प्रक्रिया पिछले सभी छोटे और सरल अधिगम स्तरों के संचयन (Cumulative Learning) पर निर्भर करती है। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे अधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है।
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