शिक्षा का अधिकार (RTE Act 2009)
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निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 21 के अंतर्गत गठित 'विद्यालय प्रबंध समिति' (School Management Committee - SMC) की संरचना और उसकी शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन विधिनुकूल और सही है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) की धारा 21 के अनुसार, प्रत्येक राजकीय, स्थानीय और अनुदान प्राप्त विद्यालय में एक विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) का गठन किया जाना अनिवार्य है। इस समिति की संरचना का एक मुख्य प्रावधान यह है कि इसके तीन-चौथाई (75%) सदस्य बालकों के माता-पिता या संरक्षकों में से होने चाहिए। इसके अतिरिक्त, कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के माता-पिता का प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात में सुनिश्चित किया जाना चाहिए, और समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन भी इन्हीं माता-पिता/संरक्षकों में से किया जाता है। इस विधिक प्रावधान के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय संविधान…
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के…
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'समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Inclusive Education and Children with Special Needs)' के संदर्भ में, निकोलस हॉब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय सिद्धांत (Ecological Systems Theory) का विशेष शिक्षा में अनुप्रयोग' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्カス' (Superior Temporal Sulcus - STS) के बीच सामाजिक संज्ञान, पर्यावरणीय अनुकूलन और न्यूरोडाइवर्सिटी (Neurodiversity) प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) द्वारा प्रतिपादित 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) का न्यूरो-कोग्निटिव माइंडब्लाइंडनेस मॉडल (Mindblindness Model - Theory of Mind)' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL: Universal Design for Learning) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, सामाजिक सहभागिता व सर्वांगीण समावेशन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार प्राथमिक स्तर पर गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में 'गणितीयकरण' (Mathematization) की क्षमता का विकास करना है। इस संदर्भ में RTE Act 2009 की धारा 29 के प्रावधानों के साथ मिलकर निम्नलिखित में से कौन सी शिक्षण पद्धति इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक है?
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) किस आयु वर्ग के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है?
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के संस्तुतियों और निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) की धारा 29(2) के प्रावधानों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र को बढ़ावा देते हुए बच्चों के ज्ञान को उनके बाहरी जीवन से जोड़ता है, परीक्षा प्रणाली को लचीला बनाता है और संरागात्मक एवं संज्ञानात्मक विकास हेतु 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) को अनिवार्य रूप से लागू करता है, तो इन दोनों वैधानिक एवं शैक्षणिक दस्तावेजों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत दी गई विभिन्न सूचियों (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) और शिक्षा से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल रूप से 'शिक्षा' भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'राज्य सूची' (State List) का विषय थी, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा समवर्ती सूची (Concurrent List) में स्थानांतरित कर दिया गया।
2. वर्तमान में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A (जो 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया) के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है।
3. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के अंतर्गत अनुच्छेद 45 में यह प्रावधान किया गया था कि राज्य, इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर, सभी बालकों के लिए जब तक वे चौदह वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेते, तब तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए उपबंध करने का प्रयास करेगा।
4. समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, परंतु यदि दोनों के कानूनों में टकराव होता है, तो राज्य का कानून ही सर्वोपरि माना जाता है और केंद्रीय कानून अमान्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार, राज्य के नीतिनिदेशक तत्वों (DPSP) और मूल कर्तव्यों के अंतर्संबंधों तथा उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केशवानंद भारती मामले (1973) के पश्चात न्यायपालिका ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि मौलिक अधिकार और नीतिनिदेशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, तथापि किसी भी स्थिति में संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करके नीतिनिदेशक तत्वों को लागू करने के लिए भाग III (मूल अधिकारों) के प्रावधानों को पूर्णतः निष्प्रभावी या समाप्त नहीं कर सकती यदि वह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन करता हो।
2. स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 31-C के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित नीतिनिदेशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है।
3. वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़े गए 11वें मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(k)) के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य बनाया गया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें, तथा इसी संशोधन द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़कर शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया।
4. मूल कर्तव्य, जो कि मुख्य रूप से आयरिश संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान के भाग IV-A में शामिल किए गए हैं, प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात उनके उल्लंघन की स्थिति में देश के उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट (Writ) जारी करके इन्हें प्रवर्तित कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व' (DPSP) तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये मुख्य रूप से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जो वादयोग्य (Justiciable) होने के कारण न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
2. आयरलैंड के संविधान से लिए गए राज्य के नीतिनिदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं, तथा अनुच्छेद 37 के अनुसार ये देश के शासन में मौलिक होने के साथ-साथ किसी भी न्यायालय द्वारा अनिवार्य रूप से प्रवर्तनीय (Justiciable) हैं।
3. मूल कर्त्तव्य (अनुच्छेद 51A) को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्त्तव्य हैं जिन्हें रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के संविधान से लिया गया है।
4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'शिक्षा का अधिकार' मूल अधिकार है, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था; इसी संशोधन के तहत अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को बदला गया तथा भाग-IVक में एक नया 11वां मूल कर्त्तव्य जोड़ा गया जो 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षण की जिम्मेदारी तय करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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