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शिक्षा का अधिकार (RTE Act 2009)
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व' (DPSP) और 'मूल कर्त्तव्य' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल अधिकार न्यायोचित (Justiciable) हैं और इनका उल्लंघन होने पर अनुच्छेद 32 एवं अनुच्छेद 226 के तहत क्रमशः उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की शरण ली जा सकती है, जबकि नीतिनिदेशक तत्व न्यायोचित नहीं हैं, किंतु देश के शासन में ये मूलभूत हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
  2. 2. स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A जोड़कर मूल कर्तव्यों को शामिल किया गया था, जिनमें प्रारंभ में 10 मूल कर्तव्य थे, और वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा इसमें 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करने से संबंधित 11वां मूल कर्तव्य जोड़ा गया।
  3. 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, किंतु नीतिनिदेशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले 'समान नागरिक संहिता' (UCC - अनुच्छेद 44) को अभी तक देश में पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है क्योंकि यह राज्य की नीति पर निर्भर करता है और इसके गैर-कार्यान्वयन के लिए न्यायालय द्वारा राज्य को बाध्य नहीं किया जा सकता है।
  4. 4. मूल कर्तव्यों का पालन करना प्रत्येक नागरिक के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी है, और यदि कोई नागरिक किसी मूल कर्तव्य का उल्लंघन करता है, तो संसद द्वारा बनाए गए किसी विशेष कानून के तहत उसे सीधे संविधान के अनुच्छेद 51A के अंतर्गत दंडित करने का प्रावधान किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। मूल अधिकार न्यायोचित (Justiciable) हैं, जबकि नीतिनिदेशक तत्व न्यायोचित नहीं हैं, हालांकि देश के शासन में वे मौलिक हैं। 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए थे, और 86वें संशोधन (2002) द्वारा 11वां कर्तव्य जोड़ा गया। 'निजता का अधिकार' अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और अनुच्छेद 44 (UCC) एक नीतिनिदेशक तत्व है। कथन 4 असत्य है क्योंकि मूल कर्तव्य प्रकृति से 'गैर-न्यायोचित' (Non-justiciable) हैं और संविधान में सीधे अनुच्छेद 51A के तहत इनके उल्लंघन पर किसी दंड का प्रावधान नहीं है, जब तक कि इसके लिए संसद द्वारा कोई अलग आपराधिक कानून न बनाया गया हो। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।

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→ समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय संविधान के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और निशक्तजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत 6 से 18 वर्ष तक के सभी दिव्यांग बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वैधानिक प्रावधान किया गया है। 2. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी वर्ग से हों) को एक साथ समान अवसर प्रदान करना है, जिसमें 'विशिष्ट बालकों' के लिए विशेष विद्यालयों का पृथक्करण अनिवार्य रूप से पहले किया जाता है। 3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) बाल-केन्द्रित शिक्षा और लचीले पाठ्यक्रम (Flexible Curriculum) की वकालत करती है ताकि विभिन्न योग्यताओं वाले छात्र बिना किसी बाधा के एक ही कक्षा में सीख सकें। 4. समावेशी कक्षा कक्ष में 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों का पालन करते हुए शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) और मूल्यांकन विधियों में आवश्यक संशोधन किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत दी गई विभिन्न सूचियों (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) और शिक्षा से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल रूप से 'शिक्षा' भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'राज्य सूची' (State List) का विषय थी, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा समवर्ती सूची (Concurrent List) में स्थानांतरित कर दिया गया। 2. वर्तमान में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A (जो 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया) के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है। 3. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के अंतर्गत अनुच्छेद 45 में यह प्रावधान किया गया था कि राज्य, इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर, सभी बालकों के लिए जब तक वे चौदह वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेते, तब तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए उपबंध करने का प्रयास करेगा। 4. समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, परंतु यदि दोनों के कानूनों में टकराव होता है, तो राज्य का कानून ही सर्वोपरि माना जाता है और केंद्रीय कानून अमान्य हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व' (DPSP) तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये मुख्य रूप से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जो वादयोग्य (Justiciable) होने के कारण न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं। 2. आयरलैंड के संविधान से लिए गए राज्य के नीतिनिदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं, तथा अनुच्छेद 37 के अनुसार ये देश के शासन में मौलिक होने के साथ-साथ किसी भी न्यायालय द्वारा अनिवार्य रूप से प्रवर्तनीय (Justiciable) हैं। 3. मूल कर्त्तव्य (अनुच्छेद 51A) को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्त्तव्य हैं जिन्हें रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के संविधान से लिया गया है। 4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'शिक्षा का अधिकार' मूल अधिकार है, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था; इसी संशोधन के तहत अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को बदला गया तथा भाग-IVक में एक नया 11वां मूल कर्त्तव्य जोड़ा गया जो 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षण की जिम्मेदारी तय करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (DPSP)' तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, जबकि राज्य के नीतिनिदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं और गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) होने के बावजूद देश के शासन में मूलभूत हैं। 2. स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में भाग IV-A और अनुच्छेद 51-A जोड़ा गया, जिसके तहत प्रारंभ में 10 मूल कर्तव्य थे, जिन्हें बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा बढ़ाकर 11 कर दिया गया। 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में 'शिक्षा का अधिकार' मूल रूप से शामिल था, जिसे बाद में संसद द्वारा बिना किसी संविधान संशोधन के केवल एक सामान्य अधिनियम पारित करके मौलिक अधिकार बना दिया गया था। 4. नीतिनिदेशक तत्वों में शामिल 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का उल्लेख अनुच्छेद 44 में किया गया है, जो कि एक न्यायोचित प्रावधान है और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारें बाध्य हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) किस आयु वर्ग के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है? → RTE अधिनियम के शीर्षक में ....... शब्द शामिल हैं।
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