BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
12 views

विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है तथा विलेय के संघुणन या वियोजन से प्रभावित नहीं होता है।
  2. 2. 'वांट-हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के वियोजन की स्थिति में एक से अधिक ($i > 1$) होता है, जबकि संगुणन की स्थिति में इसका मान एक से कम ($i < 1$) होता है, जो परासरण दाब और हिमांक अवनमन जैसे अणुसंख्यक गुणधर्मों के सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक मान के अंतर को स्पष्ट करता है।
  3. 3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, जिसमें उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषक (Adsorption) और सक्रिय संकुल का निर्माण मुख्य चरण होता है, जिसका एक उत्कृष्ट उदाहरण हेबर विधि द्वारा अमोनिया उत्पादन में सूक्ष्म विभाजित लोहे का उपयोग है।
  4. 4. 'एंजाइम उत्प्रेरण' की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) का मान अनप्रेरित अभिक्रिया की तुलना में बहुत अधिक होता है, जिसके कारण एंजाइम अभिक्रिया की दर को अत्यंत मंद कर देते हैं और यह अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करता है; यदि विलेय पानी में वियोजित (Dissociate) या संगुणित (Associate) होता है, तो इसके मान में परिवर्तन होता है और वांट-हॉफ गुणांक का उपयोग करना पड़ता है। कथन 2 बिल्कुल सही है, क्योंकि वांट-हॉफ गुणांक ($i$) वैद्युत अपघट्यों के वियोजन (যেমন NaCl $ ightarrow$ Na+ + Cl-) पर $i > 1$ और संगुणन (Association) पर $i < 1$ होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, अणुसंख्यक गुणधर्म विलेय कणों की संख्या पर आश्रित होते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि हेबर प्रक्रम में लोहे का चूर्ण (Solid) गैसीय अभिकारकों ($N_2$ और $H_2$) के साथ विषमांगी उत्प्रेरण का सर्वोत्तम उदाहरण है। कथन 4 गलत है क्योंकि एंजाइम उत्प्रेरक अभिक्रिया की 'सक्रियण ऊर्जा' को बहुत कम कर देते हैं, जिससे अभिक्रिया की दर कई गुना बढ़ जाती है, न कि मंद होती है।
Share:

Related Questions

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) और रेडियोएक्टिव क्षيय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब एक धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी यूरेनियम-235 ($^{235}U$) पर की जाती है, तो यह एक अस्थाई समस्थानिक $^{236}U$ बनाता है जो तुरंत दो छोटे नाभिकों में विखंडित हो जाता है और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा के साथ-साथ औसतन 2 से 3 तेज न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं। 2. परमाणु रिएक्टर में विखंडन की दर को नियंत्रित करने के लिए 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जो न्यूट्रॉनों का तीव्र विसर्जन करके उन्हें मंदित करती हैं। 3. द्रव्यमान क्षति (Mass defect) वह अंतर है जो किसी नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के कुल द्रव्यमान के बीच होता है, और यही द्रव्यमान क्षति अल्बर्ट आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार नाभिकीय बंधन ऊर्जा में परिवर्तित होती है। 4. अल्फा ($α$) क्षय के दौरान जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 इकाई से घट जाता है और द्रव्यमान संख्या 4 इकाई से कम हो जाती है, क्योंकि एक अल्फा कण वस्तुतः हीलियम नाभिक ($_2^4He^{2+}$) के समान होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और विटामिनों के उपापचय तथा जैव-रासायनिक कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राइबोफ्लेविन (विटामिन $B_2$) सह-एंजाइम FMN (फ्लैविन मोनोन्यूक्लियोटाइड) और FAD (फ्लैविन एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड) का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो कोशकीय श्वसन के दौरान इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। 2. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन C) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन प्रोटीन के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए आवश्यक सह-एंजाइम है, और इसकी कमी से 'बेरी-बेरी' रोग उत्पन्न होता है। 3. 'विटामिन D' (कैल्सीफेरॉल) वास्तव में एक हॉर्मोन की तरह कार्य करता है, जो आंत से कैल्सियम और फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है, और इसकी कमी से वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेशिया' नामक रोग हो जाता है। 4. पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े अमीनो अम्ल प्रोटीन की प्राथमिक संरचना बनाते हैं, जबकि प्रोटीन की द्वितीयक संरचना में पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं 'अल्फा-हेलिक्स' या 'बीटा-प्लीटेड शीट' का निर्माण हाइड्रोजन बंधों के माध्यम से करती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? परमाणु संरचना और पदार्थ की अवस्थाओं (Atomic Structure and States of Matter) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नील्स बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं विशिष्ट वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग (Angular momentum) प्लांक स्थिरांक ($h$) और $2\pi$ के अनुपात का पूर्ण गुणज होता है, अर्थात $mvr = \frac{nh}{2\pi}$। 2. जब किसी ठोस पदार्थ को उच्च दाब और परम शून्य तापमान के अत्यंत करीब लाया जाता है, तो बोस-आइ condensates (BEC) अवस्था प्राप्त होती है, जिसमें पदार्थ के सभी कण एक ही क्वांटम अवस्था में संगृहीत हो जाते हैं। 3. पाउली के अपवर्जन नियम के अनुसार, किसी परमाणु में एक ही मुख्य ऊर्जा स्तर में उपस्थित सभी इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सदैव समान हो सकता है, बशर्ते उनका चक्रण (Spin) एक ही दिशा में हो। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की आनुवंशिक एवं जैव रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ABO रक्त समूह प्रणाली लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर उपस्थित ग्लाइकोप्रोटीन या एंटीजन (A और B) की उपस्थिति पर आधारित होती है, जिनका संश्लेषण 'I' जीन द्वारा नियंत्रित होता है, जिसके तीन एलील ($I^A$, $I^B$, और $i$) होते हैं और यह सह-प्रभाविता (Codominance) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। 2. 'आरएच कारक' (Rh factor) एक अन्य एंटीजन है जिसकी खोज रhesus बंदर में की गई थी; यदि किसी व्यक्ति के रक्त में Rh एंटीजन अनुपस्थित है, तो वह Rh-धनात्मक कहलाता है और गर्भाक्ता रक्ताकोरकता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पिता Rh-धनात्मक और माता Rh-ऋणात्मक होती है। 3. सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal Recipient) वह रक्त समूह AB होता है जिसकी प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) अनुपस्थित होते हैं, जिससे यह किसी भी समूह के रक्त को प्राप्त कर सकता है बिना किसी गंभीर प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया के। 4. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की कैस्केड प्रक्रिया में, थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन, सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदल जाता है, जो आगे फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में परिवर्तित कर देता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सबसे लंबी हड्डी?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.