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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult Process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसके विद्युत चालन को बढ़ाने का कार्य करता है।
- 2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को सांद्र सोडियम हाइड्रोक्साइड ($NaOH$) विलयन के साथ अक्रिय वातावरण (जैसे $CO_2$) में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट ($NaH_2PO_2$) का निर्माण करता है।
- 3. संक्रमण धातुओं के यौगिकों में 'रंग' और 'चुंबकीय आघूर्ण' की उत्पत्ति मुख्य रूप से धातु आयन के 'd-d संक्रमण' और अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होती है, और स्कैंडियम ($Sc^{3+}$) तथा जिंक ($Zn^{2+}$) आयन जलीय माध्यम में पूर्ण रूप से रंगहीन और प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) होते हैं।
- 4. भूपर्पटी (Earth's crust) में प्रचुरता के आधार पर धातुओं का सही अवरोही क्रम एल्युमिनियम > लोहा > कैल्शियम > सोडियम है, जबकि अधातुओं में ऑक्सीजन और सिलिकॉन के बाद हाइड्रोजन सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। हॉल-हरोल्ट प्रक्रम में क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर का उपयोग एलुमिना के उच्च गलनांक को कम करने और विलायक की विद्युत चालकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। सफेद फॉस्फोरस की $NaOH$ के साथ अभिक्रिया एक असमानुपातन अभिक्रिया है जिससे फॉस्फीन बनती है। संक्रमण धातुओं में रंग और चुंबकत्व 'd-d संक्रमण' तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करता है; $Sc^{3+}$ ($3d^0$) और $Zn^{2+}$ ($3d^{10}$) में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन न होने के कारण ये रंगहीन और प्रतिचुंबकीय होते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि भूपर्पटी में प्रचुरता के मामले में अधातुओं में ऑक्सीजन और सिलिकॉन के बाद हाइड्रोजन नहीं बल्कि सिलिकॉन और एल्युमिनियम के बाद अन्य तत्व प्रमुख हैं तथा हाइड्रोजन का स्थान बहुत नीचे है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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शुक्र ग्रह?
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तरंग का वेग माध्यम?
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प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photoelectric effect) और क्वांटम सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आइंस्टीन के प्रकाश वैद्युत समीकरण के अनुसार, उत्सर्जित होने वाले प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर रेखीय रूप से निर्भर करती है, किंतु यह आपतित प्रकाश की तीव्रता (Intensity) से स्वतंत्र होती है।
2. 'देहली आवृत्ति' (Threshold frequency) आपतित प्रकाश की वह न्यूनतम आवृत्ति है जिसके नीचे किसी भी धातु की सतह से प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन संभव नहीं होता है, भले ही प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो।
3. कॉम्पटन प्रभाव (Compton effect) यह प्रमाणित करता है कि एक्स-किरणें जब इलेक्ट्रॉनों से प्रकीर्णित होती हैं, तो उनकी तरंगदैर्ध्य बढ़ जाती है, जिससे यह सिद्ध होता है कि फोटॉन में केवल ऊर्जा होती है किंतु संवेग (Momentum) नहीं होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारसेक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है और यह एक पार्सल सेक्युरेंट कोण पर आधारित है।
2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) का विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ होता है, और SI प्रणाली में इसका मात्रक पास्कल-सेकंड (Pa·s) या प्वाइज़ेन होता है।
3. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का मात्रक न्यूटन प्रति मीटर ($N/m$) है और इसकी विमा $[ML^0T^{-2}]$ होती है।
4. एक 'एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट' (AU) सूर्य और पृथ्वी के बीच की माध्य दूरी है, जिसका मान लगभग $1.496 imes 10^{11}$ मीटर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार का प्रतिरोध ($R$) उसकी लंबाई ($l$) के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता ($
ho$) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, उसके आयामों पर नहीं।
2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (लूप नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग लागू किए गए कुल विद्युत वाहक बल (EMF) के बराबर होता है।
4. श्रेणीक्रम (Series combination) में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है, और इस संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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