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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के जैव रासायनिक चक्रों और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर अनिवार्य रूप से निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर अगुणित (Gametophyte) होता है जिस पर बीजाणुकोद्भिद (Sporophyte) आश्रित रहता है।
- 2. सी-4 (C4) पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान केल्विन चक्र से पहले कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में 'PEP कार्बोक्सिलेस' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे एक 4-कार्बन यौगिक (ऑक्सालोएसेटिक एसिड) बनता है, जो इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में उच्च प्रकाश तीव्रता और कम जल उपलब्धता के प्रति अत्यधिक अनुकूल बनाता है।
- 3. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) एक वृद्धि-प्रोत्साहक पादप हॉर्मोन है जो मुख्य रूप से तने की लंबाई में तीव्र वृद्धि, कोशिका दीर्घीकरण (Cell elongation) और बीजों के अंकुरण को प्रेरित करने के लिए उत्तरदायी होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ब्रायोफाइट्स को पादप जगत के उभयचर (Amphibians) कहा जाता है; इन्हें निषेचन के लिए जल की आवश्यकता होती है और इनका मुख्य स्वतंत्र पादप शरीर युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है। कथन 2 सही है क्योंकि C4 पौधों में मेसोफिल कोशिकाओं में PEP कार्बोक्सिलेस द्वारा $CO_2$ का स्थिरीकरण होता है, जो फोटोरेस्पिरेशन को कम करता है और शुष्क परिस्थितियों में अनुकूलन प्रदान करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि एब्सिसिक एसिड (ABA) एक वृद्धि-संरोधी (Growth inhibitor) पादप हॉर्मोन है जो तनाव सहनशीलता, स्टोमेटा को बंद करने और प्रसुप्ति (Dormancy) को प्रेरित करता है, जबकि वृद्धि-प्रोत्साहक कार्य ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकिनिन करते हैं। पादप जगत के वर्गीकरण की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आयनिक त्रिज्या और संक्रमण धातुओं की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी समइलेक्ट्रॉनिक प्रजाति (Isoelectronic species) के समूह में, जैसे $O^{2-}, F^-, Na^+, Mg^{2+}$ और $Al^{3+}$, नाभिकीय आवेश (Nuclear charge) बढ़ने के साथ आयनिक त्रिज्या लगातार घटती जाती है।
2. d-ब्लॉक के तत्वों की 'द्वितीय संक्रमण श्रेणी' (4d श्रेणी) के तत्वों की परमाणु त्रिज्या अपने से ठीक ऊपर स्थित 'प्रथम संक्रमण श्रेणी' (3d श्रेणी) के तत्वों की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक होती है, क्योंकि नीचे जाने पर मुख्य क्वांटम संख्या (Principal quantum number) में वृद्धि होती है।
3. संक्रमण धातुएँ और उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय (Paramagnetic) प्रकृति के होते हैं, जिसका मुख्य कारण उनके d-कक्षकों में अयुग्मित (Unpaired) इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके समवयस्कता (Isomerism) तथा ईंधनों के दहन और ऑक्टेन संख्या के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) के शाखित श्रृंखला (Branched-chain) वाले समवयस्क, सीधी श्रृंखला (Straight-chain) वाले समवयस्क की तुलना में अधिक ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि शाखित संरचनाओं में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता अधिक होती है।
2. 'फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया' (Fischer-Tropsch process) एक ऐसी उत्प्रेरकीय विधि है जिसके माध्यम से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के गैसीय मिश्रण (वाटर गैस) को उच्च तापमान और दाब पर गैसोलीन (तरल हाइड्रोकार्बन) जैसे सिंथेटिक ईंधनों में परिवर्तित किया जाता है।
3. द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) के मुख्य घटक प्रोपेन और ब्यूटेन हैं, और घरेलू उपयोग के दौरान गैस रिसाव का तुरंत पता लगाने के लिए इसमें 'एथिल मर्कैप्टेन' ($C_2H_5SH$) नामक गंधयुक्त यौगिक मिलाया जाता है, जिसका रासायनिक सूत्र सल्फर-युक्त होने के कारण तीव्र दुर्गंध उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में केंद्रक और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था के दौरान गुणसूत्र अपनी अधिकतम संघनन अवस्था में पहुँच जाते हैं, जिससे उनकी आकृति का अध्ययन सबसे स्पष्ट रूप से किया जा सकता है, और इस चरण में सभी गुणसूत्र कोशिका के मध्य रेखा पर 'मेटाफेज प्लेट' पर व्यवस्थित हो जाते हैं।
2. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की 'पैकाइटीन' (Pachytene) उप-अवस्था में समझात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing over) कहा जाता है, और यह प्रक्रिया 'रेकॉम्बीनेज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
3. केंद्रिका (Nucleolus) एक झिल्ली-रहित संरचना है जो केंद्रक द्रव्य में स्थित होती है और यह राइबोसोमी आरएनए (rRNA) के संश्लेषण तथा उनके प्राथमिक असेंबली का प्रमुख केंद्र होने के कारण प्रोटीन संश्लेषण में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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परमाणु भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बीटा-क्षय' (Beta decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन में रूपांतरण होता है, जिसके फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन और एक 'एंटीन्यूट्रिनो' (Antineutrino) का उत्सर्जन होता है, जिससे द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है किंतु परमाणु क्रमांक एक से बढ़ जाता है।
2. 'समभारिक' (Isobars) वे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic number) भिन्न होते हैं, और इनके नाभिकीय गुणों में भारी अंतर पाया जाता है।
3. 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear fusion) की प्रक्रिया केवल अत्यधिक उच्च तापमान और उच्च दाब पर ही संभव है क्योंकि दो हल्के नाभिकों को एक-दूसरे के निकट लाने पर उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तीव्र प्रतिकर्षक ऊर्जा अवरोध उत्पन्न होता है जिसे पार करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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