General Science
Asked 2 months ago · Viewed 20 times
परमाणु भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'बीटा-क्षय' (Beta decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन में रूपांतरण होता है, जिसके फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन और एक 'एंटीन्यूट्रिनो' (Antineutrino) का उत्सर्जन होता है, जिससे द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है किंतु परमाणु क्रमांक एक से बढ़ जाता है।
- 2. 'समभारिक' (Isobars) वे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic number) भिन्न होते हैं, और इनके नाभिकीय गुणों में भारी अंतर पाया जाता है।
- 3. 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear fusion) की प्रक्रिया केवल अत्यधिक उच्च तापमान और उच्च दाब पर ही संभव है क्योंकि दो हल्के नाभिकों को एक-दूसरे के निकट लाने पर उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण तीव्र प्रतिकर्षक ऊर्जा अवरोध उत्पन्न होता है जिसे पार करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बीटा-क्षय (Beta decay) में, विशेष रूप से $\beta^-$ क्षय के दौरान, नाभिक के अंदर एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन (बीटा कण) और एक एंटीन्यूट्रिनो में बदल जाता है। इस प्रक्रिया में द्रव्यमान संख्या समान रहती है लेकिन परमाणु क्रमांक एक बढ़ जाता है। कथन 2 सही है: समभारिक (Isobars) ऐसे परमाणु होते हैं जिनके नाभिक में न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की कुल संख्या (द्रव्यमान संख्या, A) समान होती है, परंतु उनके परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होते हैं (जैसे $_{18}^{40}\text{Ar}$ और $_{20}^{40}\text{Ca}$)। कथन 3 गलत है क्योंकि दो हल्के नाभिकों के संलयन के समय उनके बीच लगने वाला बल **गुरुत्वाकर्षण बल** नहीं बल्कि उनके धन आवेशों के कारण लगने वाला **स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षक बल (Electrostatic repulsive force)** होता है, जिसे पार करने के लिए अत्यधिक उच्च ताप और दाब की आवश्यकता होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में केंद्रक और कोशिका विभाजन के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
मानव शरीर में पोषण, कार्बोहाइड्रेट उपापचय और विटामिनों की…
Related Questions
→
भौतिक राशियों की विमाओं (Dimensions) और उनके एसआई मात्रकों (SI Units) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सार्वत्रिक गैस स्थिरांक' (Universal Gas Constant, R) की विमा $[ML^2T^{-2}K^{-1}mol^{-1}]$ होती है, और इसका एसआई मात्रक जूल प्रति केल्विन प्रति मोल ($J\,K^{-1}\,mol^{-1}$) है।
2. 'प्लांक स्थिरांक' (Planck's Constant, h) की विमा वही होती है जो 'कोणीय संवेग' (Angular Momentum) की विमा होती है, अर्थात $[ML^2T^{-1}]$, और इसका मात्रक जूल-सेकंड ($J\cdot s$) है।
3. 'पृष्ठ तनाव' (Surface Tension) का एसआई मात्रक न्यूटन प्रति मीटर ($N/m$) है, किंतु इसकी विमीय सूत्र को व्यक्त करते समय समय की घात ($T$) धनात्मक रूप में $[T^2]$ होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के जैव रासायनिक चक्रों और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर अनिवार्य रूप से निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर अगुणित (Gametophyte) होता है जिस पर बीजाणुकोद्भिद (Sporophyte) आश्रित रहता है।
2. सी-4 (C4) पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान केल्विन चक्र से पहले कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में 'PEP कार्बोक्सिलेस' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे एक 4-कार्बन यौगिक (ऑक्सालोएसेटिक एसिड) बनता है, जो इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में उच्च प्रकाश तीव्रता और कम जल उपलब्धता के प्रति अत्यधिक अनुकूल बनाता है।
3. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) एक वृद्धि-प्रोत्साहक पादप हॉर्मोन है जो मुख्य रूप से तने की लंबाई में तीव्र वृद्धि, कोशिका दीर्घीकरण (Cell elongation) और बीजों के अंकुरण को प्रेरित करने के लिए उत्तरदायी होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) वह प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा में उसके गलनांक बिंदु से नीचे गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं।
2. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite welding) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के साथ तीव्र अभिक्रिया करके पिघला हुआ लोहा उत्पन्न करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता आयरन से बहुत अधिक होती है।
3. 'जिंकोसाइट' (Zincite) और 'कैलेमीन' (Calamine) दोनों ही जिंक के प्रमुख अयस्क हैं, जिनमें से कैलेमीन एक कार्बोनेट अयस्क है जिसके निष्कर्षण के लिए निस्तापन (Calcination) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आवर्तिता और आयनिक विभव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन (O) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे की ओर जाने पर (फ्लोरीन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता जाता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता अपने समूह में सबसे अधिक होती है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal Relationship) मुख्य रूप से द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तृतीय आवर्त के विकर्ण पर स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, सिलिकॉन) के बीच देखा जाता है, क्योंकि इनके ध्रुवणात्मक गुण (Polarizing power) और आयनिक आकार लगभग समान होते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.