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आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आयनिक त्रिज्या और संक्रमण धातुओं की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी समइलेक्ट्रॉनिक प्रजाति (Isoelectronic species) के समूह में, जैसे $O^{2-}, F^-, Na^+, Mg^{2+}$ और $Al^{3+}$, नाभिकीय आवेश (Nuclear charge) बढ़ने के साथ आयनिक त्रिज्या लगातार घटती जाती है।
- 2. d-ब्लॉक के तत्वों की 'द्वितीय संक्रमण श्रेणी' (4d श्रेणी) के तत्वों की परमाणु त्रिज्या अपने से ठीक ऊपर स्थित 'प्रथम संक्रमण श्रेणी' (3d श्रेणी) के तत्वों की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक होती है, क्योंकि नीचे जाने पर मुख्य क्वांटम संख्या (Principal quantum number) में वृद्धि होती है।
- 3. संक्रमण धातुएँ और उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय (Paramagnetic) प्रकृति के होते हैं, जिसका मुख्य कारण उनके d-कक्षकों में अयुग्मित (Unpaired) इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि समइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियों (जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है) में प्रोटॉनों (नाभिकीय आवेश) की संख्या बढ़ने पर प्रभावी आकर्षण बल बढ़ता है, जिससे आयनिक त्रिज्या घट जाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide contraction) के प्रभाव के कारण d-ब्लॉक की 4d और 5d श्रेणियों के तत्वों के आकार 3d श्रेणी के तत्वों के लगभग बराबर हो जाते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि संक्रमण धातुओं के आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण वे चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं, जिसे विकिपीडिया संदर्भ अनुचुम्बकत्व कहा जाता है।
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके समवयस्कता (Isomerism) तथा ईंधनों के दहन…
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Related Questions
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मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. छोटी आंत के अग्रभाग (ड्यूडेनम) में अग्नाशयी रस द्वारा स्रावित 'ट्रिप्सिनोजेन' एंजाइम आंत की श्लेष्मला कला द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' एंजाइम की उपस्थिति में सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है, जो प्रोटीन को डाइपेप्टाइड और अमीनो अम्ल में तोड़ता है।
2. फुफ्फुस वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के दौरान, बाह्य अंतःपर्शुक पेशियों (External intercostal muscles) और मध्यपट (Diaphragm) के संकुचन से छाती की गुहा का आयतन बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतःफुफ्फुसीय दाब वायुमंडलीय दाब से कम हो जाता है और वायु अंदर प्रवेश करती है।
3. हृदय के चक्र के दौरान, 'आर्टरीओवेंट्रिकुलर वाल्व' (जैसे त्रिवलनी और द्विवलनी वाल्व) का बंद होना 'डब' (Dubb) ध्वनि उत्पन्न करता है, जबकि 'सेमीलुनर वाल्व' (महाधमनी और फुफ्फुसीय कपाट) का बंद होना 'लब' (Lubb) ध्वनि उत्पन्न करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, 'मस्तिष्कराजी द्रव' (Cerebrospinal fluid) का मुख्य कार्य मस्तिष्क और मेरुरज्जु को यांत्रिक आघातों से बचाना तथा उन्हें पोषक तत्वों की आपूर्ति करना है, जिसका स्राव मुख्य रूप से वेंट्रिकल्स में स्थित 'कोरॉइड प्लेक्सस' द्वारा होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके संरूपण और ईंधनों के दहन तथा ऑक्टेन गुणवत्ता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) के शाखित श्रृंखला (Branched-chain) वाले समवयस्क, सीधी श्रृंखला (Straight-chain) वाले समवयस्क की तुलना में कम ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि शाखित संरचनाओं में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता कम होती है।
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जैसे एल्कीन्स (Alkenes) में द्विबंध ($C=C$) की उपस्थिति के कारण ये इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षित होने वाले अभिक अभिकर्मकों के साथ आसानी से योगशील अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
3. 'एंटी-मार्कोनीकॉव नियम' (Anti-Markovnikov's rule) या परॉक्साइड प्रभाव केवल हाइड्रोजन ब्रोमाइड ($HBr$) के साथ ही लागू होता है, जबकि हाइड्रोजन क्लोराइड ($HCl$) और हाइड्रोजन आयोडाइड ($HI$) के साथ यह प्रभाव इसलिए नहीं देखा जाता क्योंकि $HCl$ का आबंध विदलन ऊर्जा बहुत अधिक होती है और $HI$ का बना मध्यवर्ती मुक्त मूलक अत्यधिक अस्थिर होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के जैव रासायनिक चक्रों और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर अनिवार्य रूप से निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर अगुणित (Gametophyte) होता है जिस पर बीजाणुकोद्भिद (Sporophyte) आश्रित रहता है।
2. सी-4 (C4) पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान केल्विन चक्र से पहले कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में 'PEP कार्बोक्सिलेस' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे एक 4-कार्बन यौगिक (ऑक्सालोएसेटिक एसिड) बनता है, जो इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में उच्च प्रकाश तीव्रता और कम जल उपलब्धता के प्रति अत्यधिक अनुकूल बनाता है।
3. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) एक वृद्धि-प्रोत्साहक पादप हॉर्मोन है जो मुख्य रूप से तने की लंबाई में तीव्र वृद्धि, कोशिका दीर्घीकरण (Cell elongation) और बीजों के अंकुरण को प्रेरित करने के लिए उत्तरदायी होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भौतिक राशियों की विमाओं (Dimensions) और उनके एसआई मात्रकों (SI Units) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सार्वत्रिक गैस स्थिरांक' (Universal Gas Constant, R) की विमा $[ML^2T^{-2}K^{-1}mol^{-1}]$ होती है, और इसका एसआई मात्रक जूल प्रति केल्विन प्रति मोल ($J\,K^{-1}\,mol^{-1}$) है।
2. 'प्लांक स्थिरांक' (Planck's Constant, h) की विमा वही होती है जो 'कोणीय संवेग' (Angular Momentum) की विमा होती है, अर्थात $[ML^2T^{-1}]$, और इसका मात्रक जूल-सेकंड ($J\cdot s$) है।
3. 'पृष्ठ तनाव' (Surface Tension) का एसआई मात्रक न्यूटन प्रति मीटर ($N/m$) है, किंतु इसकी विमीय सूत्र को व्यक्त करते समय समय की घात ($T$) धनात्मक रूप में $[T^2]$ होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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