BaalVikas
Menu
General Science
Asked 2 months ago · Viewed 20 times

मानव शरीर में पोषण, कार्बोहाइड्रेट उपापचय और विटामिनों की जैव रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'ग्लाइकोजेनोलिसिस' (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें उपवास या व्यायाम के दौरान रक्त में ग्लूकोज का स्तर कम होने पर, ग्लूकागोन और एड्रेनालिन हॉर्मोन की प्रेरणा से संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-1-फास्फेट में विघटन होता है।
  2. 2. विटामिन B1 (थiamin) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफास्फेट' (TPP) है, जो पाइरुवेट डीहाइड्रोजनेज और अल्फा-कीटोग्लूटा्रेट डीहाइड्रोजनेज एंजाइमों के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीडेटिव डिकारबॉक्सिलेशन के लिए अनिवार्य है।
  3. 3. 'विटामिन E' (टोकोफेरोल) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोशिका झिल्ली में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड को मुक्त मूलकों (Free radicals) की क्षति से बचाने के लिए एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ग्लाइकोजेनोलिसिस वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा यकृत और पेशियों में संचित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में तोड़ा जाता है, जो मुख्य रूप से ग्लूकागोन और एड्रेनालिन द्वारा नियंत्रित होती है। कथन 2 सही है क्योंकि विटामिन B1 का सक्रिय रूप थियामिन पाइरोफास्फेट (TPP) क्रेब्स चक्र और ग्लाइकोलिसिस के बीच की कड़ी यानी पाइरुवेट के ऑक्सीडेटिव डिकारबॉक्सिलेशन के लिए एक महत्वपूर्ण सह-एंजाइम है। कथन 3 गलत है क्योंकि विटामिन E वसा-विलेय (Fat-soluble) विटामिन है, जल-विलेय नहीं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → परमाणु भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए… ← पिछला प्रश्न धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा…

Related Questions

→ सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में केंद्रक और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था के दौरान गुणसूत्र अपनी अधिकतम संघनन अवस्था में पहुँच जाते हैं, जिससे उनकी आकृति का अध्ययन सबसे स्पष्ट रूप से किया जा सकता है, और इस चरण में सभी गुणसूत्र कोशिका के मध्य रेखा पर 'मेटाफेज प्लेट' पर व्यवस्थित हो जाते हैं। 2. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की 'पैकाइटीन' (Pachytene) उप-अवस्था में समझात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing over) कहा जाता है, और यह प्रक्रिया 'रेकॉम्बीनेज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है। 3. केंद्रिका (Nucleolus) एक झिल्ली-रहित संरचना है जो केंद्रक द्रव्य में स्थित होती है और यह राइबोसोमी आरएनए (rRNA) के संश्लेषण तथा उनके प्राथमिक असेंबली का प्रमुख केंद्र होने के कारण प्रोटीन संश्लेषण में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → भौतिक राशियों की विमाओं (Dimensions) और उनके एसआई मात्रकों (SI Units) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'सार्वत्रिक गैस स्थिरांक' (Universal Gas Constant, R) की विमा $[ML^2T^{-2}K^{-1}mol^{-1}]$ होती है, और इसका एसआई मात्रक जूल प्रति केल्विन प्रति मोल ($J\,K^{-1}\,mol^{-1}$) है। 2. 'प्लांक स्थिरांक' (Planck's Constant, h) की विमा वही होती है जो 'कोणीय संवेग' (Angular Momentum) की विमा होती है, अर्थात $[ML^2T^{-1}]$, और इसका मात्रक जूल-सेकंड ($J\cdot s$) है। 3. 'पृष्ठ तनाव' (Surface Tension) का एसआई मात्रक न्यूटन प्रति मीटर ($N/m$) है, किंतु इसकी विमीय सूत्र को व्यक्त करते समय समय की घात ($T$) धनात्मक रूप में $[T^2]$ होती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आवर्तिता और आयनिक विभव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन (O) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे की ओर जाने पर (फ्लोरीन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता जाता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता अपने समूह में सबसे अधिक होती है। 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal Relationship) मुख्य रूप से द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तृतीय आवर्त के विकर्ण पर स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, सिलिकॉन) के बीच देखा जाता है, क्योंकि इनके ध्रुवणात्मक गुण (Polarizing power) और आयनिक आकार लगभग समान होते हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आयनन ऊर्जा, विद्युत ऋणात्मकता और उनके यौगिकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी परमाणु की 'विद्युत ऋणात्मकता' (Electronegativity) एक आवर्ती गुण है, और पॉलिंग पैमाने के अनुसार आवर्त सारणी में फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है, जबकि सीज़ियम सबसे कम विद्युत ऋणात्मक तत्वों में से एक है। 2. संक्रमण धातुएँ (d-ब्लॉक के तत्व) सामान्यतः परिवर्तनशील संयोजकता (Variable valency) प्रदर्शित करती हैं, क्योंकि इनके (n-1)d और ns कक्षकों की ऊर्जा में बहुत कम अंतर होता है, जिसके कारण दोनों कक्षकों के इलेक्ट्रॉन आबंध निर्माण में भाग ले सकते हैं। 3. अक्रिय गैसों (Noble gases) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान अपने-अपने आवर्त में न्यूनतम होता है, क्योंकि उनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत कम होती है, जिससे वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन बना सकती हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है। 3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था। 4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.